ब्रेकिंग
1984 सिख-विरोधी दंगों के दोषी पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का 80 साल की उम्र में निधन, तिहाड़ से... राजीव गांधी की जयंती पर PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि, सोनिया-राहुल और खरगे ने 'वीर भूमि' पर अर्पित किए ... 'वंदे मातरम्' पर सियासी घमासान: अमित शाह बोले- 2 छंद गाने का कांग्रेस का फैसला देश विरोधी, वेणुगोपाल... तेलंगाना के सिद्दिपेट में भीषण सड़क हादसा: 20 फीट गहरे कुएं में गिरी कार, एक ही परिवार के 4 लोगों की... उत्तराखंड में PMAY-U को मिली नई रफ्तार, दिसंबर तक 15 हजार परिवारों को मिलेगी पक्की छत प्रयागराज में भारी बारिश से हाहाकार: सड़कों पर भरा पानी, जलभराव पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त; DM और नग... हमीरपुर में फूड रेड के दौरान हड़कंप: SDM के कहने पर दुकानदार ने अपनी ही दुकान की मिठाई खाने से किया ... गोमतीनगर में दिल दहला देने वाला तिहरा हत्याकांड: पत्नी और बहन की हत्या के बाद मैनेजर ने की खुदकुशी दिल्ली मास्टर प्लान-2047 को केंद्र की मंजूरी: 40 लाख नए फ्लैट्स, नरेला एजुकेशन हब और मेट्रो विस्तार ... संसद में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर मतदान, राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा
देश

महाराष्ट्र के समुद्र तटों पर कर्नाटक-गोवा के मुकाबले सबसे ज्यादा प्लास्टिक प्रदूषण

पणजी: महाराष्ट्र के समुद्र तटों पर गोवा और कर्नाटक के समुद्र तटों के मुकाबले अधिक प्लास्टिक प्रदूषण है। यहां एक शोध संस्थान द्वारा किए गए अध्ययन में कहा गया कि महाराष्ट्र के समुद्र तट सूक्ष्म प्लास्टिक और वृहद प्लास्टिक से अधिक प्रदूषित हैं। इसमें समुद्र किनारे स्थित प्लास्टिक उद्योगों और पर्यटन की बढ़ती गतिविधियों को प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।

गोवा स्थित राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (एन.आई. ओ.) द्वारा किए गए अध्ययन में कहा गया है, ‘‘कर्नाटक और गोवा के मुकाबले महाराष्ट्र के समुद्र तटों पर आने वाली सबसे ऊंची लहर में वृहद और सूक्ष्म प्लास्टिक संदूषित पदार्थ अधिक पाए गए।’’ उसने कहा कि यह दिखाता है कि प्लास्टिक का यह कचरा समुद्री किनारों के समीप स्थित प्लास्टिक उद्योग, बंदरगाह इलाकों, पैट्रोलियम उद्योगों और अधिक संख्या में पर्यटक आने से होता है। शोधकर्त्ताओं ने भारत के पश्चिमी तट पर 10 समुद्र तटों पर 2 साल तक वृहद एवं सूक्ष्म प्लास्टिक संदूषित पदार्थों तथा समुद्री जीवों पर उनके जहरीले असर का आकलन किया।

एन.आई.ओ. के वैज्ञानिक डॉ. महुआ साहा और डॉ. दुष्मंत महाराणा के नेतृत्व वाले अध्ययन में समुद्री पर्यावरण को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाने के लिए सुझाव दिया गया है कि सरकार एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के प्रयोग को बंद करने तथा इसे फिर से इस्तेमाल योग्य बनाने के लिए नीतियां बनाए। इसके अलावा निरंतर रूप से सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम चलाए। गौरतलब है कि लंबाई में 5 मिलीमीटर से कम के प्लास्टिक के कणों को ‘सूक्ष्म प्लास्टिक’ और 5 मिलीमीटर से अधिक के कणों को ‘वृहद प्लास्टिक’ कहा जाता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button