ब्रेकिंग
Gariaband Crime News: गरियाबंद में गांजा तस्करी का अनोखा मामला, मां-बेटे को 18 किलो गांजे के साथ पुल... Thane District News: आदिवासी आश्रम स्कूल के छात्र की मौत पर आक्रोश, परिजनों और संगठनों ने किया प्रदर... Durg Police Action: ठाणे के अपार्टमेंट में चल रहा था रेड्डी अन्ना और फेयरप्ले ऐप का खेल, छत्तीसगढ़ प... Balrampur Development News: डिप्टी सीएम अरुण साव ने 157 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण और भ... Balrampur News: विजयनगर स्कूल में मधुमक्खियों के हमले से घायल 12 बच्चों के लिए 3 लाख रुपये की सहायता... Magarlod Police Action: मेघा गांव में पेट्रोल पंप और बाइक फूंकने वाला आरोपी गिरफ्तार, पूछताछ में हुआ... Dhamtari Extortion Case: नहरनाका चौक पर वाहनों को रोककर पैसे लेने का मामला, खनिज अधिकारी ने दिए जांच... Bilaspur Crime News: गरबा ड्रेस पहनकर सिगरेट पीने और पिस्तौल दिखाने वाली युवतियों समेत 9 आरोपी गिरफ्... Women T20 Series Raipur: रायपुर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का रोमांच, जानिए टिकट दरें, श्रेणियां और प... Mahasamund Crime News: ऑपरेशन निश्चय के तहत महासमुंद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 2.80 करोड़ का गांजा जब्...
धार्मिक

Mahamrityunjaya Mantra: भगवान शिव की कृपा से मृत्यु को भी जीत लेता है महामृत्युंजय मंत्र, ऐसे हुई थी रचना

इंदौर। भगवान शिव को देवाधिदेव महादेव माना जाता है। कहा जाता है कि भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और उन्हें किसी भी बात का भय नहीं सताता है। महादेव की आराधना के लिए समर्पित महामृत्युंजय मंत्र भी बहुत प्रभावशाली माना जाता है।आइए, जानते हैं कि महामृत्युंजय मंत्र की रचना किसने और क्यों की?

महामृत्युंजय मंत्र –

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

महामृत्युंजय मंत्र अर्थ

हम तीन आंखों वाले यानी त्रिनेत्र धारी भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो इस पूरे विश्व का पालन-पोषण करते हैं। जिस प्रकार फल शाखा के बंधन से मुक्त हो जाता है, उसी प्रकार हम भी मृत्यु और नश्वरता से मुक्त हो सकते हैं।

ऐसे हुई महामृत्युंजय मंत्र की रचना

पौराणिक कथा के अनुसार, ऋषि मृकंडु शिव के शाश्वत भक्त थे। उनका कोई पुत्र नहीं था, इसलिए उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या की, जिससे भगवान शिव प्रसन्न हुए। महादेव ने ऋषि मृकण्डु को पुत्र का आशीर्वाद दिया, लेकिन यह भी कहा कि उनका पुत्र अल्पायु ही जीवित रहेगा। कुछ समय बाद ऋषि मृकण्डु के घर एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम मार्कण्डेय रखा गया। अपने पिता की तरह मार्कण्डेय जी भी भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त थे। वह भी महादेव की भक्ति में लीन रहते थे।

मार्कण्डेय जी के माता-पिता को सदैव दुःख रहता था कि उनका पुत्र केवल 16 वर्ष ही जीवित रहेगा। अपने माता-पिता के इस दुःख को दूर करने के लिए ऋषि मार्कण्डेय ने महामृत्युंजय मंत्र की रचना की और शिव मंदिर में बैठकर इसका निरंतर जाप करते रहे। जैसे ही उनकी मृत्यु का समय नजदीक आया, तो यमदूत उनके प्राण हरने वहां पहुंचे। लेकिन ऋषि मार्कण्डेय को शिव भक्ति में लीन देखकर, वे लौट आए और यमराज को पूरी कहानी बताई।

इसके बाद यमराज स्वयं उनके प्राण लेने आए और उस पर अपने पाश का प्रयोग किया। इस दौरान मार्कण्डेय ने शिवलिंग को गले लगा लिया, जिससे पाश शिवलिंग पर गिर गया। यमराज की आक्रामकता देखकर, भगवान शिव क्रोधित हो गए और वहां प्रकट हो गए। तब यमराज ने भगवान शिव से कहा कि इस बालक की मृत्यु निश्चित है और यही विधि के अनुसार है। तब भगवान शिव ने मार्कण्डेय को लम्बी आयु का आशीर्वाद दिया और विधि का विधान बदल गया।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

Related Articles

Back to top button