ब्रेकिंग
पीएम मोदी ने देशवासियों को दी दिवाली की शुभकामनाएं, इस साल भी जवानों के साथ मनाएंगे पावन पर्व भारत में बाल विवाह के आंकड़ों में आई गिरावट, फिर भी पश्चिम बंगाल और बिहार में स्थिति गंभीर— जानें रि... तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में सामने आया एक बेहद अजीबोगरीब और हैरान करने वाला मामला, एक्स गर्लफ्रें... कर्नाटक के बेलगावी में सनसनीखेज वारदात, एसएसबी जवान प्रेमी ने 23 वर्षीय युवती की गला घोंटकर की हत्या कटिहार में चर्चित शाहरुल अपहरण और हत्याकांड मामला, अदालत ने 6 दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा कोलकाता में तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी के घर के बाहर भारी हंगामा, ममता बनर्जी ने पुलिस कमिश्नर से मां... भदोही में ऑनर किलिंग का सनसनीखेज मामला, दो भाइयों ने की 12वीं की छात्र बहन की गला घोंटकर हत्या न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे वनडे में बाल-बाल बची टीम इंडिया, बारिश और DLS नियम के सहारे 4 रन से जीता म... दिवाली 2026 पर घर लाएं सही लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, जानें खरीदने और स्थापना के जरूरी नियम सोनिया गांधी का बड़ा खुलासा, बाबरी ढांचा गिरते देख रो पड़ी थीं— इंदिरा गांधी की इमरजेंसी को माना गलत...
देश

BJP Candidate List: BJP को दलबदुलओं से ज्यादा अपनों पर भरोसा, पदाधिकारी भी निराश

नई दिल्ली। टिकट की उम्मीद में आस्था बदलकर भाजपा में शामिल होने वाले कई नेताओं को निराशा हाथ लगी है। पार्टी ने अधिकांश दलबदलुओं की जगह अपने कार्यकर्ताओं पर भरोसा जताते हुए उन्हें चुनावी समर में उतारा है। गुगन सिंह जैसे पुराने भाजपाई को भी उपचुनाव में पार्टी से बगावत भारी पड़ी है। उन्हें भी टिकट से वंचित कर दिया गया है।

कपिल मिश्रा को टिकट जरूर मिला लेकिन, उन्हें अपनी सीट छोड़कर मॉडल टाउन जाना पड़ा है। हालांकि, आम आदमी पार्टी (आप) से भाजपा में आने वाले अनिल वाजपेयी और कांग्रेसी रहे सुरेंद्र सिंह बिट्टू जरूर भाग्यशाली रहे हैं। इन दोनों को उनके पुराने सीट से मैदान में उतारा गया है। टिकट की उम्मीद में आप व कांग्रेस छोड़कर कई नेता भाजपा में शामिल हुए हैं।

दलबदलुओं से ज्यादा पुराने कार्यकर्ताओं पर भरोसा

लोकसभा चुनाव के समय बिजवासन के विधायक कर्नल देवेंद्र सहरावत और अनिल वाजपेयी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। इस वजह से दोनों की विधानसभा सदस्यता भी चली गई थी। दोनों इस बार फिर से दावेदारी जता रहे थे। पार्टी ने वाजपेयी को गांधीनगर से उम्मीदवार बना दिया, लेकिन बिजवासन सीट पर सहरावत की जगह अपने कद्दावर नेता सतप्रकाश राणा पर फिर से विश्वास जताया है।

इसी तरह से वेद प्रकाश ने वर्ष 2017 में आप छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। उस समय वह बवाना से विधायक थे और उनकी सदस्यता चली गई थी। उपचुनाव में पार्टी ने उन्हें भाजपा से टिकट दिया लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था। वहीं, इन्हें टिकट देने से नाराज होकर गुगन सिंह आप का दामन थाम लिए थे। आप टिकट पर वह लोकसभा चुनाव भी लड़े और कुछ दिनों पहले वापस भाजपा में चले आए। यह माना जा रहा था कि इस बार बवाना से पार्टी उन्हें चुनाव मैदान में उतारेगी, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। वेद प्रकाश को भी इस बार पार्टी ने टिकट नहीं दिया है।

ये नेता भी टिकट से वंचितलोकसभा चुनाव के समय ही पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता राजकुमार चौहान ने भी भाजपा का दामन था। वह भी मंगोलपुरी से टिकट की दौड़ में थे। अचानक प्रत्याशियों की घोषणा से पहले वह वापस कांग्रेस में चले गए। चर्चा है कि टिकट कटने की आशंका से वह वापस कांग्रेस में चले गए। कई वर्ष पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले पूर्व विधायक अंबरीश गौतम और प्रत्युष कंठ भी टिकट से वंचित रह गए हैं। हालांकि, कांग्रेस से आए पूर्व सुरेंद्र सिंह बिट्टू तीमारपुर से टिकट हासिल करने में सफल रहे हैं।

पदाधिकारियों को मिली निराशा

दिल्ली प्रदेश भाजपा के लगभग दो तिहाई पदाधिकारी टिकट की दौड़ में शामिल थे। कई उपाध्यक्ष और तीनों महामंत्री से लेकर कई प्रवक्ता, मीडिया टीम के सदस्य और मोर्चों के अध्यक्ष टिकट हासिल करने की कोशिश में जुटे हुए थे। इनमें से अधिकांश को निराशा हाथ लगी है। हालांकि, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, अभय वर्मा व राजीव बब्बर, महामंत्री रविंद्र गुप्ता और प्रवक्ता राजकुमार भाटिया बाजी मार गए। इसी तरह से उत्तर पूर्वी दिल्ली के जिला अध्यक्ष अजय महावर, महरौली जिला अध्यक्ष विजय पंडित और नई दिल्ली जिला अध्यक्ष अनिल शर्मा को भी चुनाव मैदान में उतारा गया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button