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मुस्लिमों से परेशान हिंदू गांव छोड़ने को मजबूर ! गृहमंत्री बोले- भय का माहौल नहीं पनपने दिया जाएगा

रतलाम: मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के ग्राम सुराना में सांप्रदायिक सद्भावना बिगड़ने और प्रशासन द्वारा सुनवाई ना करने का आरोप लगाकर गांव छोड़ने की बात कही है। मामले को लेकर बहुत से ग्रामीण रतलाम कलेक्ट्रेट पहुंचे थे और नाराजगी जताते हुए गांव छोड़ने की चेतावनी दे दी थी। इस घटनाक्रम के सुर्खियों में आने के बाद प्रशासन ने गांव जाकर असल स्थिति जानने के लिए कलेक्टर और एसपी गांव पहुंचे। मामले में एसपी का कहना है कि गांव वालों की आपसी रंजिश थी जिसे साम्प्रदायिक रूप दिया जा रहा है। वहीं गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस मामले में चिंता व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि वह पीड़ितों की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन से बात करेंगे। उन्‍होन लोगों को आश्‍वस्‍त करते हुए कहा कि हमारा प्रदेश शांति का टापू है, कोई भी यहां भय का वातावरण नहीं फैला सकता है।

दरअसल, रतलाम के सुराणा गांव में धार्मिक सद्भाव बिगडऩे के बाद वहां के हिंदू परिवारों ने गांव छोडऩे की चेतावनी दी है। ज्ञापन देने पहुंचे ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ग विशेष के लोगों की आबादी अधिक होने से वहां आए दिन विवाद हो रहे हैं। पुलिस और प्रशासन भी सुनवाई नहीं कर रहा है। ऐसे में गांव से पलायन करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं रह गया है। इन लोगों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर 3 दिनों में गांव छोडऩे की चेतावनी दी है।

एडीएम एमएल आर्य ने कहा है कि गांव में सांप्रदायिक सद्भाव बनाने के लिए प्रशासन की टीम गांव में जाकर दोनों पक्षों के लोगों से बातचीत करेगी। किसी परिवार को पलायन करना पड़े, ऐसी स्थिति निर्मित नहीं होने दी जाएगी। जनसुनवाई में सुराणा गांव के हिंदू परिवारों के कई लोग ज्ञापन देने एसपी कार्यालय पहुंचे थे। जहां सुनवाई नहीं होने से नाराज लोगों ने गांव छोडऩे का फैसला ले लिया। इसके बाद इन लोगों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्हें सुराणा गांव के अलावा कहीं और पट्टे देने की मांग की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पहले सभी वर्गों में सद्भावना संबंध थे, लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों से वर्ग विशेष के लोगों ने विधर्मी सोच अपना ली है। आए दिन गांव में विवाद करते हैं। शिकायत किए जाने के बाद भी पुलिस और प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है। जिससे परेशान होकर अब गांव के हिंदू परिवार गांव छोडऩा चाहते हैं।

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