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मध्यप्रदेश

पुलिस की तरह अब डीएफओ से लेकर रेंजर स्तर के अधिकारियों के वाहनों पर चमकेगी बहुरंगी बत्ती

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर देशभर में वीआइपी कल्चर समाप्त करते हुए मंत्रियों और वीआइपी के वाहनों से लाल-पीली बत्ती तो हटा दी गईं, लेकिन आपात सेवा में लगे पुलिस अधिकारियों को ड्यूटी के दौरान वाहन पर बत्ती लगाने का अधिकार है। अब ऐसे अधिकार वन विभाग के डीएफओ से लेकर रेंजर स्तर के अधिकारियों को भी दिए जाएंगे।

वन विभाग के अंतर्गत संरक्षित एवं वन्यप्राणी वाले वनमंडलों में डीएफओ से लेकर रेंजर तक वाहनों पर बहुरंगी बत्ती लगा सकेंगे। इसका प्रस्ताव वन मुख्यालय ने राज्य शासन को भेजा है। गृह एवं परिवहन विभाग की स्वीकृति के बाद वन विभाग के लिए भी यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।

दरअसल, केंद्र सरकार ने प्रविधान किया है कि आग जैसी आपदाओं को रोकने वाली सरकारी एजेंसियों के अधिकारी अपने वाहन पर बहुरंगी बत्ती लगा सकेंगे। इसी को आधार बनाकर वन मुख्यालय ने यह प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा है ताकि जंगलों में आग लगने, अतिक्रमण होने या वन्यप्राणियों का शिकार करने के लिए शिकारियों और वन की लकड़ियों काटने वालों का जमावाड़ा होने पर वन अमला प्रभावी कार्रवाई करने के लिए अपने वाहनों पर बहुरंगी बत्ती जलाकर इसका भय पैदा करने के लिए उपयोग कर सकें।

भारत सरकार ने जंगल की आग को आपदा माना है क्योंकि इससे जन, वन्यजीव, वन संपदा सहित बड़ी क्षति होती है। मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के जंगलों में आग की घटनाओं का अध्ययन कराया था। आग की घटनाओं की रोकथाम के लिए गाइडलाइन भी जारी की है।

अब इसके तहत प्रदेश सरकार कार्य योजना बनाकर काम कर रही है। इसी योजना के तहत वाहनों पर बहुरंगी बत्ती लगाने का अधिकार भी मांगा जा रहा है। मध्य प्रदेश के बालाघाट, छिंदवाड़ा, बैतूल, मंडला, सागर, रायसेन, दमोह, नर्मदापुरम, देवास, बुरहानपुर सहित 22 ऐसे जिले चिन्हित किए गए हैं, जहां जंगल में आग लगने की घटनाएं अधिक होती हैं।

 

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, जंगल की सुरक्षा में लगे वन कर्मियों की चुनाव में न लगाए ड्यूटी

 

 

 

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में जंगल की आग से निपटने में लापरवाह रवैये को लेकर वहां की राज्य सरकार को फटकारा है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को भी तलब किया है। वहीं जंगल की सुरक्षा में लगे वन अमले की चुनाव में ड्यूटी को लेकर भी कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की और निर्देश दिए कि वन अमले की चुनाव में डयूटी न लगाए।

बता दें कि मप्र में भी वन अमले की चुनाव में डयूटी लगा दी गई थी। जंगल की सुरक्षा के लिए पेट्रोलिंग के दौरान वाहनों में बहुरंगी बत्ती लगाने के अधिकार की मांग के पीछे मप्र वन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी हवाला दिया गया है।

भारत सरकार ने जंगल की आग को आपदा माना है। वन विभाग ने आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जंगल की सुरक्षा के लिए डीएफओ से लेकर रेंजर स्तर के अधिकारियों के वाहनों पर बहुरंगी बत्ती लगाने की अनुमति मांगी है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा है। – असीम श्रीवास्तव, वन बल प्रमुख, मप्र वन विभाग

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