ब्रेकिंग
Dhamanheri Youth Death in UK: बेहतर भविष्य के सपने लेकर इंग्लैंड गए 20 वर्षीय कंवलजीत की अचानक मौत Rewari Food Poisoning News: रेवाड़ी में कन्या पूजन का प्रसाद खाने से तीन बच्चियों की तबीयत बिगड़ी, द... Kurukshetra Police Encounter: कुरुक्षेत्र में पुलिस और नशा तस्करों के बीच जबरदस्त मुठभेड़, 40 लाख का... Tiger Shroff Firing Case: मात्र 34 हजार रुपए में ली गई थी टाइगर की सुपारी, कोटा से गिरफ्तार हुए तीनो... Haryana Police Transfer: हरियाणा में पुलिस विभाग का बड़ा फेरबदल, 28 IPS-HPS अधिकारियों के तबादले Neeraj Kumar Health Update: JDU MLC उम्मीदवार नीरज कुमार को पड़ा दिल का दौरा, पटना के मेदांता अस्पता... Jharkhand Drugs Syndicate: झारखंड में NCB का बड़ा एक्शन, रांची और जमशेदपुर से मास्टरमाइंड जिम्मी समे... Tiger Shroff Firing Case Update: टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में कोटा से तीनों आरोपी गिरफ्तार, फुटबॉल ... Stock Market Holiday Today: विजयादशमी पर आज बंद रहेगा शेयर बाजार, जानें कब होगी नॉर्मल ट्रेडिंग और क... Karnataka Crime News: कर्नाटक के विजयपुरा में अवैध संबंध के चक्कर में रची गई खौफनाक साजिश, पत्नी ने ...
देश

सरकार को RSS को समझने में 50 साल लग गए…फैसले पर बोला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट

केंद्र सरकार ने 21 जुलाई को ऐतिहासिक फैसला लिया. 58 साल बाद सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (RSS) में शामिल होने पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया. सरकार के इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी. जिस पर दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. आज हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया. हाई कोर्ट ने कहा, केंद्र सरकार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के काम करने के तरीके और उसके उद्देश्यों को समझने में 50 साल से ज्यादा का समय लग गया, जिसके कारण कई सरकारी कर्मचारी, संघ के कामों में हिस्सा नहीं ले सके.

कोर्ट में यह याचिका पुरुषोत्तम गुप्ता ने दायर की थी, याचिका कर्ता की मांग की थी कि आरएसएस का नाम प्रतिबंधित ऑर्गेनाइजेशन की लिस्ट में से हटाया जाए और भारत सरकार जो समय-समय पर ऑफिस मेमोरेंडम जारी करती है उसको निरस्त किया जाए. याचिका में कहा गया की आरएसएस कोई राजनैतिक गतिविधियों को संचालित नहीं करती और न ही कोई राजनैतिक कार्य करती है. वह देश सेवा, राष्ट्र सेवा के साथ मानव सेवा के हितों का काम संचालित करती आई है.

RSS का नाम प्रतिबंधित ऑर्गेनाइजेशन से हटाया

याचिका के लंबित रहने के दौरान भारत सरकार की ओर से पैरवी कर्ता हिमांशु जोशी डिप्टी सॉलिसिटर जनरल द्वारा न्यायालय में बताया गया कि दिनांक 9 जुलाई 24 को ऑफिस मेमोरेंडम से आरएसएस का नाम प्रतिबंधित ऑर्गेनाइजेशन की सूची में से हटाए जाने का निर्णय लिया जा चुका है.

बिना किसी आधार के प्रतिबंधित किया गया

माननीय न्यायालय ने माना की आरएसएस किसी भी इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल नहीं रहा है जो राष्ट्र के हितों के खिलाफ हो, इसके बावजूद भी 1966 से आरएसएस को प्रतिबंधित ऑर्गेनाइजेशन की सूची में रखा जाना भारतीय संविधान के विपरीत है. पूर्व के ऑफिस मेमोरेंडम में उस समय की सरकार ने आरएसएस को बिना किसी आधार और सर्वे के प्रतिबंधित किया था. सरकार का किसी भी तरह का निर्णय किसी भी ठोस आधार और साक्ष्य के आधार पर होना चाहिए जिससे कि किसी भी व्यक्ति या संगठन के मूलभूत संवैधानिक अधिकारो का उल्लंघन न हो.

सरकार ने लिया ऐतिहासिक निर्णय

केंद्र सरकार ने 58 साल बाद ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिसमें अब केंद्र सरकार के हर कर्मचारी को उनके कार्यकाल के दौरान आरएसएस के सदस्य बनने और आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिलेगा. पहले यह प्रतिबंधित था. अब भारत सरकार ने यह प्रतिबंध हटा लिया है. यह प्रतिबंध राज्य शासन के कर्मचारियों पर लागू नहीं था, लेकिन केंद्र शासन में आने वाले हर कर्मचारी पर लागू था.

Related Articles

Back to top button