ब्रेकिंग
नाम के आगे 'शंकराचार्य' कैसे लगाया? मेला प्रशासन के नोटिस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का करारा जवाब,... सुखबीर बादल का CM मान पर बड़ा हमला: बोले- मुख्यमंत्री में लोगों का सामना करने की हिम्मत नहीं, वादों ... कातिल चाइना डोर का कहर! युवक के चेहरे और नाक पर आए दर्जनों टांके, मौत के मुंह से बचकर लौटा पीड़ित Jalandhar Crime: रिटायर्ड कर्नल के साथ धोखाधड़ी, 9 लोगों पर FIR दर्ज; जानें जालंधर में ठगी का पूरा म... भगवंत मान सरकार के रोजगार के दावे फेल! पंजाब में फैला फर्जी ट्रैवल एजेंटों का मकड़जाल, विदेश भेजने क... Drug Smuggling Case: पुलिस की बड़ी कार्रवाई, करोड़ों रुपये की हेरोइन बरामद; 2 तस्करों को रंगे हाथों ... शिक्षा क्रांति के दावों की खुली पोल! सरकारी स्कूलों में लेक्चरर्स का टोटा, बिना एक्सपर्ट्स के कैसे प... Ludhiana Weather: कोहरे की सफेद चादर में लिपटा लुधियाना, 22 और 23 जनवरी को आंधी-बारिश का डबल अटैक; म... आयुष्मान कार्ड धारकों को बड़ा झटका! 45 निजी अस्पताल योजना के पैनल से बाहर, इलाज के लिए दर-दर भटकने क... Haryana Agniveer Quota: हरियाणा में अग्निवीरों के लिए बड़ी खुशखबरी! इस सरकारी भर्ती में मिलेगी प्राथ...
देश

नितिन गडकरी को SC में बुलावा, ASG के विरोध पर बोले CJI- समन नहीं निमंत्रण समझें

नई दिल्लीः सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने के मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। वहीं इस मामले में केंद्र सरकार ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से समय मांगा है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एसए बोवडे ने कहा कि हम चाहते है कि केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी सुप्रीम कोर्ट में आकर बताएं कि आखिर समस्या कहां आ रही है। चीफ जस्टिस की इस बात पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) विरोध जताया और कहा कि अगर केंद्रीय मंत्री को सुप्रीम कोर्ट बुलाया जाएगा तो इसका राजनीतिक असर पड़ेगा।

ASG की बात पर चीफ जस्टिस ने कहा कि हम फिलहाल सुझाव दे रहे हैं, आदेश पारित नहीं कर रहे। दरअसल सीजेआई ने पूछा था कि क्या परिवहन मंत्री आकर हमें इस मामले के बारे में जानकारी दे सकते हैं? इसे समन नहीं बल्कि निमंत्रण समझें क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों के बारे में योजना की साफ तस्वीर अधिकारियों से ज्यादा स्पष्ट परिवहन मंत्री को होगी। साथ ही कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण को लेकर समझौता नहीं किया जा सकता है, यह सिर्फ दिल्ली-एनसीआर के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार से चार हफ्तों में मीटिंग कर इलेक्ट्रिक वाहनों से संबधित मामले में विचार करने को कहा। दरअसल याचिका दायर की गई थी जिसमें कहा गया था कि सरकार ने सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने की अपनी खुद की नीति का पालन करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button