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उत्तरप्रदेश

गाजीपुर में देखा सपना… फिर क्यों सर सैयद अहमद खान ने अलीगढ़ में की यूनिवर्सिटी की स्थापना?

देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में गिनी जाने वाली अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना सैयद अहमद खान ने 1875 में की थी. सर सैयद ने भले ही मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना अलीगढ़ में की, लेकिन इसको लेकर सपना उन्होंने गाजीपुर की सरजमीं पर देखा था. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने आज पूरे विश्व में एक अपना अलग स्थान बनाया हुआ है. मुसलमानों को आधुनिक शिक्षा प्रदान करने की जरूरत महसूस करते हुए सर सैयद अहमद खान ने 1877 में मुस्लिम एंग्लो ओरिएंटल कालेज की स्थापना की थी. यही कॉलेज आगे जाकर 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी बना.

सर सैयद ने 1863 में गाजीपुर में विक्टोरिया स्कूल की भी स्थापना की जो आगे चलकर हाई स्कूल में तब्दील हुआ और मौजूदा समय में गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज के रूपमें जाना जाता है. उस वक्त पूरे भारत में यह एक ऐसा विद्यालय हुआ करता था जो 5 भाषाओं की तालीम देता था.

गाजीपुर में खोलना चाहते थे कॉलेज

कॉलेज के प्रिंसिपल खालिद अमीर ने बताया कि सर सैयद 1862 से 1864 के मध्य गाजीपुर में जज रहे हैं. इस दौरान सर सैयद कोयला घाट के एक मकान में रहा करते थे, जिसमें मौजूदा समय में एनसीसी कार्यालय है. उन्होंने कहा कि सर सैयद उस वक्त गाजीपुर में एक बड़ा कॉलेज खोलना चाहते थे, लेकिन 1864 में अलीगढ़ के लिए ट्रांसफर होने की वजह से वो खोल नहीं पाए. ऐसे में उन्होंने अलीगढ़ में मुस्लिम यूनिवर्सिटी की नींव रखी और आज वह एक पढ़ाई का ऐसा इदारा बन चुका है जहां पर हर कोई तालिम लेना चाहता है.

कब होगा सपना साकार?

खालीद आमिर ने बताया कि सर सैयद का मृत्यु 1898 में हुई थी. उनके निधन को करीब 125 साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उनका गाजीपुर में यूनिवर्सिटी बनाने का सपना साकार नहीं हुआ है.ऐसे में गाजीपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सर सैयद अहमद की याद में एक यूनिवर्सिटी होनी चाहिए ताकि यहां के युवाओं को अच्छे तालीम के लिए कहीं दूसरे प्रदेश या जनपद में भटकना न पड़े.

अधिकारों के लिए उठानी पड

वरिष्ठ पत्रकार महताब खान ने बताया कि सर सैयद का कहना था कि जब तक आप अपने अधिकारों के लिए जागरूक नहीं होंगे आवाज नहीं उठाएंगे तब तक आपको कुछ मिलेगा नहीं. इसके लिए सबसे मुफीद रास्ता तालीम है. ऐसे में वह अपने पूरे जिंदगी में हर व्यक्ति तक तालीम की रोशनी पहुंचे इस पर जोर देते रहे.

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