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दिल्ली चुनाव: BJP के लिए बंजर थीं ये 11 सीटें, क्या इस बार खत्म कर पाई जीत का सूखा?

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए 2025 का दिल्ली विधानसभा चुनाव 2 मायनों में बेहद खास रहा. पहला यह कि उसने 27 साल का सूखा खत्म कर दिया और दूसरा यह कि उसका राजधानी की 11 सीटों पर अब तक खाता नहीं खुला था, लेकिन इस चुनाव में उसने 3 सीटों पर जीत की शुरुआत कर दी है. इसमें एक रिजर्व सीट भी शामिल है.

बीजेपी ने 70 में से 48 सीटों पर जीत हासिल करते हुए सत्ता पर कब्जा जमा लिया है. 2025 के चुनाव से पहले दिल्ली में 11 ऐसी सीटें थीं जहां से उसे अब तक एक बार भी जीत नहीं मिली थी. इन 11 में से सुल्तानपुर माजरा, कोंडली, अंबेडकर नगर, मंगोलपुरी और देवली वो सीटें हैं जो अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व हैं और बीजेपी का खाता तक नहीं खुला था.

4 मुस्लिम बहुल सीटों पर नहीं खुल सका खाता

इसी तरह मुस्लिम बहुल सीटों जिसमें ओखला, मटिया महल, बल्लीमारान और सीलमपुर सीटें आती हैं, यहां पर भी बीजेपी को अपना खाता खोलना बाकी है. साथ ही विकासपुरी और जंगपुरा विधानसभा सीट पर भी उसे जीत नसीब ही नहीं हुई थी.

साल 2025 के चुनाव में बीजेपी को बड़ी जीत हासिल हुई, हालांकि जिन 11 सीटों पर उसका खाता नहीं खुला उसमें से महज 3 सीटों पर ही अपनी पहली जीत हासिल कर सकी. रिजर्व और मुस्लिम बहुल सीटों पर बीजेपी को काफी काम करना होगा क्योंकि अभी भी 8 सीटें ऐसी हैं जहां पर खाता खोलना बाकी है.

SC रिजर्व सीटों में 4 अभी भी बाकी

अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व सीट में मंगोलपुरी सीट वह सीट रही जहां से बीजेपी अपना पहला चुनाव जीतने में कामयाब रही. यहां से बीजेपी ने कांग्रेस छोड़कर आए दिग्गज नेता राज कुमार चौहान को उतारा और वह अपनी जीत हासिल करने में कामयाब रहे. राज कुमार लगातार 4 बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत चुके थे. उन्हें यहां से पांचवीं जीत मिली.

इसके अलावा बीजेपी जिन रिजर्व सीटों को नहीं जीत सकी उसमें कोंडली, अंबेडकर नगर, सुल्तानपुर माजरा और देवली सीट शामिल है. बीजेपी को यहां पर खाता खोलने के लिए कम से कम 5 साल का इंतजार करना पड़ेगा. ये चारों सीटें आम आदमी पार्टी के खाते में चली गई हैं. कोंडली से AAP के कुलदीप कुमार मोनू, अंबेडकर नगर से डॉक्टर अजय दत्त, सुल्तानपुर माजरा से मुकेश कुमार अहलावत को जीत मिली है.

ओखला-बल्लीमारान में कब खत्म होगा इंतजार

बात अब मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों मटिया महल, ओखला, सीलमपुर और बल्लीमारान की जाए तो यहां पर बीजेपी इस बार खाली हाथ ही रही. मुस्लिम बहुल सीट मुस्तफाबाद में बीजेपी को जीत मिली है और पार्टी के प्रत्याशी के मोहन सिंह बिष्ट ने 17 हजार से अधिक मतों से चुनाव जीत गए हैं, लेकिन पार्टी यहां पर 2015 में चुनाव जीत चुकी है.

ओखला से AAP के प्रत्याशी अमानतुल्लाह खान विजयी हुए. जबकि पुरानी दिल्ली में आने वाली बल्लीमारान सीट से AAP प्रत्याशी इमरान हुसैन के खाते में फिर से जीत आई. जबकि पड़ोस में पड़ने वाली मटिया महल सीट से पार्टी के प्रत्याशी आले मोहम्मद इकबाल ने भी जीत हासिल की. उत्तर पूर्वी दिल्ली की सीलमपुर सीट को AAP के प्रत्याशी चौधरी जुबैर अहमद ने 42 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की. इन सीटों पर जीत के लिए बीजेपी ने काफी कोशिश की, लेकिन मेहनत रंग नहीं ला सकी.

दूसरी हाई प्रोफाइल सीट पर खोल लिया खाता

दिल्ली में बीजेपी के लिए 2 अन्य सामान्य वर्ग की सीटों (जंगपुरा और विकासपुरी) पर जीत हासिल करने की चुनौती थी, जिसमें पार्टी कामयाब रहीं. नई दिल्ली के बाद दिल्ली की दूसरी सबसे हाई प्रोफाइल जंगपुरा सीट से बीजेपी के तरविंदर सिंह मारवाह ने महज 675 वोटों के अंतर से अप्रत्याशित जीत हासिल की. यहां से AAP ने दिग्गज नेता मनीष सिसोदिया को पहली बार उतारा था, लेकिन वो जीत हासिल नहीं कर सके बल्कि यह सीट पहली बार बीजेपी के खाते में आ गई.

जंगपुरा के अलावा विकासपुरी विधानसभा सीट भी ऐसी सीट है जहां से बीजेपी 2025 में पहली बार जीत का स्वाद चखने में कामयाब रही है. यहां पर बीजेपी के प्रत्याशी पंकज कुमार सिंह 12 हजार से अधिक मतों के अंतर से विजयी हुए थे.

इस तरह से बीजेपी साल 2025 के चुनाव में दिल्ली के अपने अभेद 11 सीटों की संख्या में कमी लाने में कामयाब हो गई है. इस बार 3 सीटों पर उसने अपना खाता खोला है, अभी 8 सीटों पर पार्टी का खाता खुलना बाकी है. देखना होगा कि अगला चुनाव जब 2030 में होगा तब बीजेपी यहां से अपना सूखा खत्म कर पाने में कितना कामयाब हो पाती है.

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