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उत्तरप्रदेश

पहली पत्नी से तलाक के 40 साल बाद फिर हो गया कांड, डॉक्यूमेंट में फर्जी बेटे का नाम देख शख्स के उड़े होश

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में संपत्ति के लिए फर्जीवाड़े का अजीबोगरीब मामला सामने आया है. यहां दुल्लहपुर में एक शख्स का पत्नी से तलाक करीब 40 साल पहले हो गया. फिर उसने अपनी दूसरी शादी की. दूसरी शादी से बच्चे भी हुए, जिनका नाम राशन कार्ड, कुटुंब रजिस्टर सहित अन्य दस्तावेजों में भी दर्ज हैं. लेकिन अचानक से उनके कुटुंब रजिस्टर में एक ऐसा नाम जुड़ा, जिसे ना वह परिवार जानता था और ना ही गांव के लोग. खुलासा तब हुआ, जब उस शख्स ने एक संपत्ति में हिस्सा दिलाने के लिए गांव के ही किसी से संपर्क किया. इसकी जानकारी के बाद परिवार वाले एक्टिव हुए, तब सेक्रेटरी ने अपना गला फंसता हुए देख उक्त व्यक्ति का नाम कुटुंब रजिस्टर से काट दिया.

मामला दुल्लहपुर थाना क्षेत्र के धामपुर गांव का है. यहां के गोरख यादव की शादी साल 1982 में मऊ के पखईपुर में हुई थी. लेकिन किसी बात को लेकर पत्नी एक माह बाद ही उन्हें छोड़कर चली गई. इसके 7 साल के बाद गोरख यादव की शादी 1989 में सीखरी गांव में हुई. इनसे तीन पुत्र बृजेश, मनोज और अनुज हुए. इनका नाम राशन कार्ड और परिवार रजिस्टर और कुटुंब रजिस्टर में भी दर्ज कराया गया.

जमीन हड़पने के लिए रची साजिश

पहली पत्नी जो एक माह बाद उन्हें छोड़कर चली गई थी, उनसे कोई बच्चा भी नहीं हुआ था. लेकिन इस बीच, फर्जीवाड़ा कर कुटुंब रजिस्टर में एक और नाम चढ़ा दिया गया. यह नाम कैलाश यादव था. कुटुंब रजिस्टर में इसे पहली पत्नी का बेटा बताया गया. आरोप है कि गांव के ही सचिव से मिलीभगत कर जमीन हथियाने के चक्कर में यह फर्जीवाड़ा किया गया था.

इसकी शिकायत गोरख यादव के पुत्र बृजेश ने एसडीएम जखनिया को बीते 3 फरवरी को प्रार्थना पत्र देकर किया. इसके बाद एसडीएम ने उस मामले पर कार्रवाई का निर्देश दिया. इसी बीच, सचिन राजकमल गौरव ने दोबारा से परिवार रजिस्टर का नकल जारी किया. इसमें उसने कैलाश यादव का नाम काट दिया. जबकि पूर्व में कुटुंब रजिस्टर की नकल में कैलाश यादव का नाम सबसे नीचे दर्ज किया गया था.

कब हुई फर्जीवाड़े की जानकारी?

परिवार वालों की माने तो इस फर्जीवाड़े की जानकारी तब हुई थी, जब कैलाश यादव ने गांव के ही एक व्यक्ति को फोन कर गोरख यादव की अचल संपत्ति में हिस्सा दिलाने की मांग की थी और उस हिस्से की बिक्री करने की भी बात कही थी. इस मामले को उक्त व्यक्ति के द्वारा इसकी जानकारी बृजेश यादव के परिवार के लोगों को दी गई. जब उन्होंने लोगों ने परिवार रजिस्टर का नकल निकलवाया तब इस फर्जी वाडे का मामला सामने आया था.

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