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राजस्थान

खौफ ऐसा कि 200 साल से इस गांव में नहीं बना कोई दो-मंजिला मकान, डरावनी है वजह

देश की करीब 70 फीसदी आबादी गांवों में रहती है. वहीं, देश में 7 लाख के लगभग गांव है. आज के आधुनिक युग में अधिकतर गांवों में पक्के और बहुमंजिला मकान देखे जा सकते हैं. लेकिन राजस्थान के जोधपुर से 30 किलोमीटर दूर एक अनोखा गांव ऐसा भी है, जहां पर एक मंजिल से ऊपर कोई मकान नहीं मिलेगा.इसके साथ ही लोक मान्यता के चलते गांव में आज से 200 साल पहले संत के कहे वचनों का पालन आज भी ग्रामीण कर रहे हैं.

गांव में आज भी ग्रामीण दो मंजिल का मकान नहीं बनाते हैं. साथ ही ऐसे कई समाज और जाति के लोग हैं, जिन्हें इस गांव में रहने की अनुमति नहीं है. इस गांव का नाम है डोली गांव और यह जोधपुर बाड़मेर हाईवे के नजदीक है. गांव में रहने वाले लोग दो मंजिल का मकान नहीं बनाते हैं. यहां ज्वेलर्स रात में नहीं रुकते. इस गांव में कच्चा तेल निकालने वाली कोई घाणी भी नहीं लगाई जाती. 200 साल पहले बैरागी महाराज की कही एक बात का यह गांव आज भी पालन कर रहा है.

गांव की 200 साल पुरानी कहानी

गांव के लोगों ने बताया कि 200 साल पहले डॉली गांव में हरिराम बैरागी महाराज तपस्या किया करते थे. उन्होंने अपनी तपस्या स्थल के समय एक सूखी लकड़ी की डंडी को लगाया, जो खेजड़ी के वृक्ष के तौर पर आज भी गांव में मौजूद है. राजा महाराजाओं के समय कविराज मुरारी लाल जी चारण, जोकि यहां के राजा के द्वारा ख्याति प्राप्त थे, उन्हें जोधपुर राजा द्वारा 12 गांव दिए हुए थे. इनमें यह डॉली गांव भी शामिल था. कवि मुरारी लाल ने बैरागी महाराज से गांव में करणी माता का मंदिर बनाए जाने की बात कही.

बैरागी महाराज ने लगाई फटकार

कवि मुरारी की बात सुनकर हरिराम बैरागी ने मंदिर बनाने से मना किया और कहा कि उन्होंने देवी को त्याग रखा है. इसके बाद बैरागी महाराज तीर्थ यात्रा के भृमण पर निकल गए. उनके जाने के बाद कविराज ने गांव में करणी माता का मंदिर बना दिया और मूर्ति का प्रतिष्ठान कर दिया. जब महाराज वापस आए और उन्होंने पूछा कि ‘आपने यह मंदिर क्यों बनाया?’ इसपर कविराज ने कहा कि ‘यह मेरी ईस्ट देवी हैं, उन्हें रोज मीठा प्रसाद चढ़ाऊंगा’ इस बात पर बैरागी महाराज को गुस्सा आ गया. उन्होंने कविराज को फटकारते हुए कहा कि ‘आपके पीछे कोई पानी देने वाला भी नहीं रहेगा.’

इसलिए नहीं बनते दो मंजिला मकान

बैरागी महाराज की फटकार के बाद कविराज के घर पर कभी बच्चों को किलकारी नहीं गूंजी और उनके वंश का अंत हो गया. 12 गांव की जागीदार को कोई संभालने वाला तक ना मिला. आज गांव में बनी सभी हवेलियां सरकार के अधीन हैं. उधर, बैरागी महाराज डोली गांव से रवाना हो गए. पूरा गांव उनसे रुकने की विनती करने लगा. लेकिन वह नहीं रुके. इस बीच लोगों की आस्था देखते हुए उन्होंने कहा कि ‘उनका समाधि स्थल ऐसे ही यहां रहेगा. मेरी समाधि के दिन पूरे गांव के आसपास दूध की धार देनी होगी, साथ ही मेरी समाधि से ऊपर किसी का घर नहीं होगा.’

दो मंजिला मकान बनाए पर आई आफत

इसके बाद गांव में केवल एक मंजिल ही मकान बनता है.कहा जाता है कि कुछ लोगों ने पौराणिक मान्यताओं को ना मानकर गांव में दो मंजिला मकान बनाए. लेकिन वे उस घर में रह नहीं पाए. किसी को अलग-अलग आवाज सुनाई देने लगीं, तो किसी के परिवार में अकाल मृत्यु होने लगी. कहीं किसी के परिवार में सभी बीमारी से ग्रसित हो गए. आखिरकार उन्हें गांव छोड़कर जाना पड़ा.

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