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दिल्ली के पहले कोरोना मरीज ने जीती वायरस से जंग, ठीक होने की बताई पूरी कहानी

नई दिल्ली: कोरोना वायरस को लेकर जहां लोगों के मन में दहशत और डर का माहौल है ऐसे में कोरोना का शिकार बने पहले मरीज रोहित ने इस वायरस को शिकस्त दे दी है और वह बिल्कुल ठीक होकर अपने घर लौट गए हैं। जहां विदेश से लौट रहे कुछ लोग डर के मारे अस्पतालों से या घरों से लापता हो रहे हैं वहीं ऐसे लोगों के लिए रोहित दत्ता की कहानी हिम्मत देने वाली है।

दिल्ली के मयूर विहार फेज-2 के रहने वाले रोहिता दत्ता (45) ने बताया कि वह अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं और उनके शरीर से संक्रमण खत्म हो चुका है। रोहित ने कहा कि दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल का आइसोलेशन वॉर्ड किसी भी प्राइवेट वॉर्ड के वीआईपी रूम से कम नहीं था। पूरी साफ-सफाई थी और दिन में दो बार चादर बदली जा रही थीं। सादा और हेल्दी खाना दिया जा रहा था। इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि उनको परिवार के साथ दूरी भी महसूस नहीं हुई क्योंकि आइसोलेशन वॉर्ड में फोन, वीडियोकॉल और नेटफ्लिक्स जैसी सभी सुविधाएं दी गई थीं। उन्होंने बताया कि वो आइसोलेशन में योगा और चाणक्य नीति की किताबें पढ़ते थे।

जब स्वास्थ्य मंत्री ने किया फोन
रोहित ने बताया कि होली वाले दिन उनको स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की विडियो कॉल आई तो थोड़ा हैरान हुए लेकिन बहुत खुशी हुई कि उनको देश के हर नागरिक की चिंता है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने रोहित को होली की शुभकामनाएं दीं और उनका हालचाल पूछा। साथ ही अस्पताल में मिल रही सुविधाओं पर फीडबैक भी लिया कि कोई परेशानी तो नहीं है। डॉ हर्षवर्धन ने रोहित को कहा कि वे जल्द ही ठीक हो जाएंगे और घर लौट सकेंगे। आइसोलेशन वॉर्ड में रहते हुए रोहित के दो बार फिर से सैंपल लिए गए और जांच को भेजा। दोनों टेस्ट नेगेटिव आने पर 14 तारीख को उनको अस्रताल से छुट्टी दे दी गईष हालांकि डॉक्टरों ने 14 दिनों तक उनको घर पर ही रहने और रेस्ट करने की सलाह दी है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि कोरोना से डरें नहीं और घर में बंद होकर न बैठें। बाहर निकलें, लेकिन साथ में पूरी सावधानी भी बरतें और अगर जरा भी कोरोना के लक्षण नजर आते हैं, तो तुरंत अस्पताल जाकर जांच कराएं। रोहित ने कहा कि कोरोना ठीक हो सकता है और इसका एक उदाहरण मैं खुद हूं।

‘आइसोलेशन’ काल कोठरी नहीं
रोहित ने कहा कि ‘आइसोलेशन’ काल कोठरी नहीं है। हां कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। आपको  ‘आइसोलेशन’ से बाहर आने की इजाजत नहीं है लेकिन आपकी सुविधा की हर चीज वहां मौजूद होती है। अखबार से लेकर मैगजीन और फोन सब। वॉर्ड में एक खिड़की थी, जहां से बाहर का पूरा नजारा दिखता था। उन्होंने कहा कि अफवाह है कि कोरोना की जांच के लिए ब्लड सैंपल लिया जाता है लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। सैंपल के रूप में नाक और गले का स्वैब देना होता है, जो डॉक्टर इतने अच्छे तरीके से निकालते हैं कि पता ही नहीं चलता और दर्द नहीं होता।

बिजनेस के सिलसिले में गए इटली
रोहित का दिल्ली में टेक्सटाइल का बिजनेस करते हैं और इसी सिलसिले में वो  16 फरवरी को दिल्ली से इटली गए थे। रोहित 25 फरवरी को भारत लौटे थे। 28 फरवरी को उनके बेटे का जन्मदिन आ गया। उस दिन उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों और 2 करीबी दोस्तों के परिवार समेत 11 लोगों के साथ हयात रिजेंसी होटल में पार्टी की लेकिन तब तक उनको कोई बुखार नहीं था। घर लौटते ही उनको बुखार हो गया। अगले दिन वह अपने डॉक्टर के पास गए और कहा कि कहीं उन्हें कोरोना तो नहीं हो गया है। डॉक्टर ने उनको चेकअप कराने और परिजनों से दूर रहने की सलाह दी। इसके बाद वह आरएमएल अस्पताल गए। वहां जांच के लिए उनके सैंपल लिए गए और उनमें कोरोना के लक्षण को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में ही रहने की सलाह दी और फिर 1 मार्च को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इस तरह वे दिल्ली में कोरोना के पहले मरीज बने जिनमें कोरोना वायरस पाया गया।

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