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बिहार

अटूट प्रेम! पति ने बनवाया पत्नी का मंदिर, शारदा देवी की लगवाई मूर्ति; खर्च कर दिए रिटायरमेंट के 60 लाख

प्यार हमारा अमर रहेगा याद करेगा जहां, तू मुमताज है मेरे ख्वाबों की मैं तेरा शाहजहां. जी हां मुद्दत फिल्म का यह गाना जिस समय आया था उस समय यह गाना प्रेमी और प्रेमिकाओं के बीच बड़ा ही मशहूर हुआ था. यह गाना उस समय से लेकर आज तक प्रेम की निशानी ताजमहल की याद दिलाता रहता है, लेकिन अब इस गाने को बिहार के मोतिहारी में रहने वाले पूर्व पंचायत सचिव ने सच करके दिखाया है. उन्होंने अपनी पत्नी की मौत के बाद उसकी याद में एक भव्य मंदिर बनाया है.

मोतिहारी के मधुचाई गांव के रहने वाले रिटायर्ड पंचायत सचिव बालकिशुन राम ने अपनी पत्नी शारदा देवी की याद में एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया है. उन्होंने न सिर्फ मंदिर बनवाया है बल्कि पति और पत्नी के बीच जो सात जन्मों का बंधन होता है उसे भी यादगार बना दिया है. आज के जमाने में बात करें तो तलाक की घटनाएं बेहद सामान्य हो गई हैं. वहीं, लोग इतने ज्यादा उग्र हो गए हैं कि वह छोटी-छोटी बातों पर हत्या करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं, लेकिन मोतिहारी के बालकिशुन की कहानी पति-पत्नी के गहरे संबंध को दर्शाती है.

पत्नी की याद में बनवाया मंदिर

बालकिशुन राम की पत्नी शारदा का निधन 6 साल पहले हो गया था. इसके बाद से ही बालकिशुन गमजदा और अकेलापन महसूस करने लगे थे. इसी अकेलेपन को दूर करने के लिए वह अपनी पत्नी की यादों को अनोखी तरीके से संजोने में जुट गए. रिटायरमेंट के दौरान उन्हें करीब 60 लाख मिले थे, जिससे उन्होंने पत्नी की याद में एक मंदिर बनवाया है. मंदिर इतना भव्य और बड़ा है कि उसे बनाने में 3 सालों का समय लगा है.

पर्यटन मंत्री ने किया उद्घाटन

इस मंदिर में बालकिशुन ने किसी देवी की नहीं बल्कि अपनी पत्नी की मूर्ति स्थापित की है, जिसका उद्घाटन बिहार राज्य के पर्यटन मंत्री राजू कुमार सिंह ने किया है. इस दौरान उन्होंने कहा कि यह काम आज के समय में कोई साधारण काम नहीं है बल्कि सबसे उत्तम काम है. क्योंकि पति-पत्नी का संबंध उन्हीं को समझ में आता हैं, जो दिल के सच्चे होते हैं.

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