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ED की कार्रवाई, दलबदल… संजय राउत की बुक पर सियासी बवाल, ‘हेल टू हेवेन’ ने खोले इन नेताओं के राज

शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के सांसद संजय राउत की किताब ‘हेल टू हेवेन’ ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है. इस पुस्तक में ईडी की कार्रवाई, सरकार की धमकी, ईडी और सीबीआई के नोटिसों के कारण विपक्षी विधायकों और सांसदों की जान जाने का डर तथा उनके पार्टी बदलने से लेकर कई बीजेपी और पार्टी नेताओं पर टिप्पणी की गई है. इससे देश और महाराष्ट्र की सियासत में बवाल मच गया है.

संजय राउत की किताब ‘हेवन इन हेल’ का शनिवार को विमोचन हो रहा है. यह पुस्तक प्रकाशन से पहले ही चर्चा में रही है. इस किताब में कई सनसनीखेज खुलासे किए गए हैं. संजय राउत ने इस पुस्तक में पर्दे के पीछे की कई घटनाओं पर प्रकाश डाला है.

इस किताब में बताया गया है कि कैसे ठाकरे गुट का एक नेता ईडी के नोटिस के कारण गिरफ्तारी के डर से हताश हो गया, कैसे वह अपनी मां के सामने रोया और कैसे उद्धव ठाकरे भी इसके कारण हताश हो गए थे. बाद में वह नेता ईडी की कार्रवाई के भय से भाजपा में शामिल हो गया.

पहले रोया और फिर जेल जाने से डर से बदल डाली पार्टी

संजय राउत ने पुस्तक में लिखा कि रवींद्र वाईकर शिवसेना के वफादार माने जाने वाले विधायकों में से एक थे. वह उद्धव ठाकरे के किचन कैबिनेट के सदस्य थे. वे अपनी मां की पूजा करते थे. जब एकनाथ शिंदे ने चालीस विधायकों के साथ पार्टी छोड़ी तो वे शिंदे के साथ नहीं गए, लेकिन किरीट सोमैया ने अचानक वाईकर पर निशाना साधना शुरू कर दिया.

उन्होंने झूठी कहानी फैलाई कि रायगढ़ में जमीन पर नौ बंगले बनाए गए हैं. उन्होंने यह दिखावा किया कि ये बंगले ठाकरे परिवार के हैं. झूठे अपराधों की रिपोर्ट की गई. पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने घोटालेबाजों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है. संजय राउत ने इस किताब में कहा है कि इन्हीं अपराधों के आधार पर ईडी को फंसाया गया.

उन्होंने लिखा कि जैसे ही सोमैया ने यह खबर फैलाई कि ईडी वाईकर को गिरफ्तार करेगी, वाईकर और उनका परिवार सदमे में आ गया. वाईकर और उनका परिवार मातोश्री आया और रोया. वाइकर ने मातोश्री से कहा, “मुझमें जेल जाने की ताकत नहीं है और मुझमें ईडी के आतंकवाद से लड़ने का साहस भी नहीं है. मुझे दौरा पड़ेगा और मैं मर जाऊंगा, या मुझे आत्महत्या करनी पड़ेगी. वाइकर निराशा और निर्वाण की बात करने लगे और कहने लगे कि वे जेल की अपेक्षा बाहर मरना पसंद करेंगे.

उस समय उद्धव ठाकरे भी हताश थे. राउत ने पुस्तक में लिखा है कि जो लोग कल तक खुद को बाघ समझते थे, वे वास्तव में बकरियां हैं. अंततः वाइकर ने पार्टी छोड़ दी. अंततः वाइकर शिवसेना छोड़कर शिंदे गुट में शामिल हो गये. उसी समय, उनके खिलाफ सभी आरोप हटा दिए गए.

हसन मुश्रीफ को लेकर खोला राज

इस पुस्तक से एक और रहस्योद्घाटन हुआ है. यानी हसन मुश्रीफ ठाकरे सरकार में गृह मंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे थे, लेकिन संजय राउत ने अपनी किताब में खुलासा किया है कि वह गृह मंत्री बनने का मौका इसलिए चूक गए क्योंकि उनके धर्म के कारण ऐसा हुआ.

राउत ने किताब में कहा है कि महा विकास अघाड़ी सरकार का गठन आसान नहीं था. उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस बात पर सट्टा लगाया जा रहा था कि गृह मंत्रालय किसे मिलेगा? सुबह शपथ ग्रहण समारोह पूरा करने के बाद अजित पवार खाली हाथ घर लौट आए. मैंने नहीं सोचा था कि वह इसके बारे में सोचेंगे. हालांकि छगन भुजबल को जेल से रिहा कर दिया गया था, लेकिन उनके खिलाफ मामले अभी भी लंबित थे. भुजबल की गृहमंत्री बनने की इच्छा प्रबल थी. उनमें क्षमता थी, लेकिन जेल यात्रा उनके लिए बाधा बनी होगी.

जयंत पाटिल गृह मंत्री बनने की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते थे. उन्होंने कहा कि यह एक धन्यवादहीन काम था. वाल्से-पाटिल को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं थीं. मुश्रीफ एक बेहतरीन विकल्प होते, लेकिन पवार को डर था कि मुसलमान होने के कारण उन्हें हर बात पर निशाना बनाया जाएगा.

गृह मंत्री किसे बनाया जाए? इस सवाल पर एक बार शरद पवार ने कहा था, “आइये विदर्भ में एक नया प्रयोग करते हैं.” वह प्रयोग अनिल देशमुख हैं. देशमुख ने घरेलू मामलों को अच्छी तरह से संभाला. मुख्यमंत्री ठाकरे के साथ उनके अच्छे संबंध थे, लेकिन तीनों प्रमुख दलों के भीतर स्थानांतरण, पदोन्नति और नियुक्तियों को लेकर विवाद हुए.

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