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सरकार से संपर्क करिए… निमिषा प्रिया को लेकर दायर नई याचिका पर बोला सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यमन में फांसी की सजा पाने वाली भारतीय मूल की नर्स निमिषा प्रिया पर आज शुक्रवार को सुनवाई की. अदालत ने मामले मेंदायर नई याचिका पर याचिकाकर्ता से सरकार के समक्ष प्रस्तुतिकरण देने को कहा है. सर्वोच्च न्यायालय ने उस याचिकाकर्ता संगठन को भारत सरकार से संपर्क करने की अनुमति दे दी है जिसने निमिषा प्रिया को बचाने के लिए भारत सरकार के हस्तक्षेप की मांग की थीआज की सुनवाई के दौरान, सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल के वकील ने मृतक पीड़ितों के परिवार से बातचीत करने के लिए यमन जाने की अनुमति मांगी.

बता दें किसुप्रीम कोर्ट ने आज सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल द्वारा दायर मामले पर सुनवाई किया. यमन में मौत की सजा का सामना कर रही मलयाली नर्स निमिषा प्रिया को क्षमादान दिलाने और पीड़ित परिवार से बातचीत के लिए एक राजनयिक मध्यस्थता टीम नियुक्त करने का अनुरोध किया गया है. सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल के कोर कमेटी के मेंबर दिनेश नायर ने अपील की कि हम सभी को निमिषा प्रिया की नन्ही सी बेटी और बुजुर्ग मां के मुश्किल हालात को ध्यान में रखते हुए उनकी जान बचाने के इस मानवीय कोशिश में एकजुट होकर भाग लेना चाहिए.

सरकार ने कोर्ट में दी जानकारी

वहीं, सरकार ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि निमिषा प्रिया की फांसी पर रोक लग गई है. केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ को बताया कि इस मामले में प्रयास जारी हैं. उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि प्रिया सुरक्षित वापस आ जाएं.

पीठ ने कहा, सरकार हर संभव मदद कर रही है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि पहले उन्हें (नर्स को) क्षमादान मिले, उसके बाद ब्लड मनी का मुद्दा आएगा. याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि फांसी स्थगित कर दी गई है.

पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 अगस्त की तिथि निर्धारित की है.

क्या है पूरा मामला?

केरल की एक नर्स निमिषा प्रिया जिन्हें यमन बिज़नेस पार्टनर, तलाल अब्दो मेहदी की हत्या को लेकर 2017 में दोषी करार दिया गया था, उसके बाद निमिषा प्रिया को मौत की सजा सुनाई गई थी. कई अपील करने के बाद भी यमन के उच्च न्यायालयों ने निमिषा की सजा को बरकरार रखा गया. अब उनकी जान बचाने का एक ही तरीका है, और वो है ब्लड मनी. अगर मेहदी के परिवार से ब्लड मनी समझौते के जरिए माफी मिल जाती है, तो उनकी सजा माफ हो सकती है. ब्लड मनी यमन के शरिया कानून के तहत मान्य है.

विश्व मलयाली परिषद के वैश्विक महासचिव दिनेश नायर बताया कि सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल ने मेहदी के परिवार के साथ संवाद को आसान बनाने के उद्देश्य से एक 6-सदस्यीय राजनयिक मध्यस्थता दल का प्रस्ताव रखा है.

कौन-कौन दल में शामिल होंगे?

इस दल में कार्य परिषद के दो प्रतिनिधि, एडवोकेट सुभाष चंद्रन के.आर. जो कि सर्वोच्च न्यायालय के वकील और परिषद के कानूनी सलाहकार हैं, और कुंजम्मद कूराचुंड जो कि परिषद के कोषाध्यक्ष हैं.

मरकज के दो प्रतिनिधि, एडवोकेट (डॉ.) हुसैन सखाफ़ी जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मुस्लिम विद्वान हैं,और हामिद जो यमन से जुड़े एक व्यक्ति हैं.

केंद्र सरकार द्वारा नामित दो अधिकारी जो वार्ता में सहयोग के लिए सरकार की तरफ से नियुक्त किए जाएंगे. यह सभी सदस्य शामिल होंगे.

दिनेश नायर ने यह भी कहा कि हम आज यह उम्मीद करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट एक सकारात्मक निर्णय देगा, जो कि पीड़ित परिवार से बातचीत करने के लिए और निमिषा प्रिया के लिए न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक राजनयिक टीम नियुक्त करने का रास्ता खोल सके.

सुप्रीम कोर्ट ने यमन में फांसी की सजा मिलने वाली भारतीय मूल की नर्स निमिषा प्रिया के मामले में दायर नई याचिका पर याचिकाकर्ता को सरकार के सामने अपना प्रस्तुतिकरण देने का निर्देश दिया.

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