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उत्तरप्रदेश

प्रयागराज: शहर की ऊंची इमारतों के लिए नई गाइड लाइन, 15 मीटर से ऊंची बिल्डिंग के लिए सुरक्षा ऑडिट जरूरी

प्रयागराज शहर की ऊंची इमारतें एक नए निर्देश के तहत और अधिक सुरक्षित हो जाएंगी. इन निर्देशों में इन इमारतों के लिए संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य कर दिया गया है. नए दिशा निर्देशों के अनुसार, सभी ऊंची इमारतों (15 मीटर से ऊंची) को अब निर्माण के 10 साल बाद और उसके बाद हर पांच साल में एक बार सुरक्षा ऑडिट करवाना होगा. यह शहर भर की कई बहुमंजिला इमारतों में सुरक्षा खामियों और आग लगने की घटनाओं को लेकर चिंताओं के बाद किया गया है.

पिछले दो दशकों में, प्रयागराज में कई ऊंची इमारतें बनी हैं. हालांकि, इनमें से ज़्यादातर का निर्माण पूरा होने के बाद कभी कोई औपचारिक सुरक्षा जांच नहीं हुई. पहले, इमारतों के निर्माण के समय किसी संरचनात्मक इंजीनियर से केवल एक बार अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना आवश्यक होता था. उसके बाद, कई इमारतों की सुरक्षा की जाँच नहीं की गई, जिससे निवासियों को खतरा बना रहा.

शहर की कई इमारतों को, संरचनात्मक खामियों के बावजूद, मंज़ूरी मिल गई. इनमें से कई इमारतों में अग्नि सुरक्षा के उपाय काम नहीं कर रहे थे, बस दिखावे के लिए रह गए. यहां तक कि उच्च न्यायालय के पास महाधिवक्ता कार्यालय और इंदिरा भवन (जिसमें स्वयं विकास प्राधिकरण स्थित है) जैसी सरकारी इमारतों में भी बड़ी आग लगने की घटनाएं हुईं, जिसके परिणामस्वरूप प्रत्येक घटना की जांच की गई.

कैसे होगी सुरक्षा ऑडिट?

अब, नए सुरक्षा नियमों के तहत, संरचनात्मक दरारों या सुरक्षा जोखिमों वाली किसी भी इमारत का मालिक, बिल्डर या रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) द्वारा तुरंत ऑडिट कराना होगा . 50 मीटर से अधिक ऊंची इमारतों के लिए, केवल प्राधिकरण में पंजीकृत विशेषज्ञ स्ट्रक्चरल इंजीनियर ही ये ऑडिट कर सकते हैं. ऑडिट रिपोर्ट स्थानीय विकास प्राधिकरण को प्रस्तुत करनी होगी.

यदि ऑडिट के दौरान कोई जोखिम पाया जाता है, तो संबंधित पक्षों – मालिकों, बिल्डरों या आरडब्ल्यूए – को एक निर्धारित समय सीमा के भीतर उन्हें ठीक करना होगा. ऐसा न करने पर, अधिकारियों को स्वयं मरम्मत या पुनर्निर्माण का कार्य करने की अनुमति मिल जाएगी, और लागत भवन मालिकों या उनके संघों से वसूल की जाएगी.

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