Indore Unique Petrol Pump Owner: इंदौर के इस पेट्रोल पंप पर पिछले 20 सालों से गूंज रहा है रामचरितमानस का पाठ, मालिक का अनोखा अंदाज

इंदौर: सनातन संस्कृति में ऐसा माना जाता है कि ईश्वर की सच्ची आराधना के लिए किसी विशेष स्थान की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि भक्त की सच्ची निष्ठा ही सर्वोपरि है। प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर शहर से एक बेहद अनूठी और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। यहाँ के एक पेट्रोल पंप के मालिक अपनी अनूठी आस्था और भक्ति के चलते इन दिनों खासे चर्चा में हैं। वे अपनी व्यस्त दिनचर्या के बीच पिछले 20 वर्षों से अपने ही पेट्रोल पंप परिसर पर नियमित रूप से पवित्र रामचरितमानस का पाठ करते आ रहे हैं और अपनी इस अनूठी परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ निभा रहे हैं।
भगवान भरोसे छोड़ रखी है पेट्रोल पंप की सारी व्यवस्थाएं, ऑनलाइन प्रणाली के चलते सुचारू रूप से चलता है कारोबार
शहर के व्यस्त चाणक्यपुरी चौराहे पर संजय दुबे का अपना पेट्रोल पंप संचालित होता है। संजय इंदौर के इकलौते ऐसे अनूठे व्यवसायी हैं जिन्होंने अपने इस पेट्रोल पंप की व्यावसायिक व्यवस्थाओं को पूरी तरह से भगवान राम के भरोसे सौंप रखा है। उनका अटूट विश्वास है कि जिसने कारोबार दिया है, वही इसकी पूरी संभाल भी करेंगे। उनके इस सकारात्मक व्यवहार और भरोसेमंद स्वभाव के कारण पंप पर कार्यरत तमाम कर्मचारी भी पूरी ईमानदारी और शिद्दत के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। वर्तमान समय में बिक्री से लेकर हिसाब-किताब तक की अधिकांश व्यवस्थाएं ऑनलाइन होने के कारण उन्हें मुख्य रूप से केवल कामकाज की निगरानी रखनी पड़ती है, जिससे उन्हें अपनी साधना के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।
शाम ढलते ही सज जाती है रामधुन की महफिल, हारमोनियम और माइक पर गूंजने लगती हैं रामचरितमानस की चौपाइयां
व्यवसायी संजय दुबे ने अपने पेट्रोल पंप के मैनेजर और अन्य स्टाफ को सभी कार्य में पूरी तरह पारंगत बना रखा है। जब भी उन्हें थोड़ा अवकाश मिलता है, वे अपने पंप पर ही रामचरितमानस की संगत सजा लेते हैं। व्यवस्थाओं के नाम पर उन्होंने अपने पास एक हारमोनियम के साथ माइक और स्पीकर की भी विशेष व्यवस्था कर रखी है, जिसके माध्यम से वे भक्ति भाव से ओतप्रोत दोहे और चौपाइयां सस्वर गुनगुनाते हैं। जैसे ही दिन ढलता और शाम का वक्त होता है, दुबे जी अपने इस पवित्र ग्रंथ का पाठ विधिवत शुरू कर देते हैं।
पेट्रोल डलवाने आने वाले ग्राहक भी हो जाते हैं मंत्रमुग्ध, आसपास के क्षेत्र में फैल रहा है भक्तिमय और आध्यात्मिक माहौल
इस दौरान जब दूर-दराज से लोग अपनी गाड़ियों में पेट्रोल या डीजल डलवाने के लिए उस पंप पर पहुंचते हैं, तो वे पंप मालिक को हारमोनियम की धुन पर रामचरितमानस के दोहे गाते देख पूरी तरह आश्चर्यचकित रह जाते हैं। कई नियमित ग्राहक तो ऐसे भी हैं जो पंप पर पहुंचते ही अपनी गाड़ी रोककर उनके साथ बैठ जाते हैं और उनके साथ मिलकर रामचरितमानस का पाठ सुनने व गाने लगते हैं। इस अनूठी पहल की सबसे खास बात यह है कि पेट्रोल पंप जैसी व्यावसायिक जगह पर इस तरह के निरंतर पाठ से आसपास के पूरे इलाके में एक बेहद सात्विक, सकारात्मक और भक्ति भाव से सराबोर माहौल नजर आने लगा है।
108 बार रामचरितमानस पाठ पूरा करने का है संकल्प, संगीत और सुरों की बारीकियां सीखकर शुरू की यह साधना
मीडिया से बातचीत के दौरान पेट्रोल पंप के मालिक संजय दुबे ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने पिछले 22 वर्षों के सफर में अब तक कुल 56 बार रामचरितमानस का संपूर्ण पाठ कर लिया है, जबकि उनका मुख्य लक्ष्य अपने जीवनकाल में कुल 108 बार इस ग्रंथ का पाठ पूरा करने का है। उनका कहना है कि इस कार्य के लिए यदि उन्हें अपने बाकी जरूरी काम भी छोड़ने पड़ें, तो भी वे पीछे नहीं हटते, क्योंकि रामचरितमानस का पाठ करना उनकी प्राथमिकता है। व्यवसाय के साथ-साथ अध्यात्म और भक्ति के प्रति उनका यह समर्पण उनके जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। शुरुआत में उन्हें संगीत की पूरी जानकारी नहीं थी, और वे हरि ओम शरण, रमेश ओझा, छन्नू लाल मिश्रा तथा अनूप जलोटा जैसे प्रसिद्ध गायकों को सुनकर प्रेरित हुए थे। चूंकि उन्हें उन कलाकारों की तरह सटीक लय और सुर में गाना नहीं आता था, इसलिए उन्होंने रामायण और रामचरितमानस का पाठ शुरू करने से पहले बाकायदा संगीत और गायन की विधिवत शिक्षा ली। जब उन्हें यह विश्वास हो गया कि अब वे पूरी तरह सुर में गा पा रहे हैं, तब उन्होंने इस सार्वजनिक गायन की शुरुआत की। उनका यह भी मानना है कि रामचरितमानस एक ऐसा अलौकिक ग्रंथ है जिसकी प्रत्येक चौपाई एक निश्चित छंद और मात्रा में रची गई है, जिसके सस्वर पाठ से अनजाने में ही सही तरीके से प्राणायाम जैसी शारीरिक क्रियाएं भी स्वतः संपन्न हो जाती हैं, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभदायक है।





