ब्रेकिंग
Nagpur Firing News: नागपुर में वर्चस्व की लड़ाई में देर रात ताबड़तोड़ फायरिंग, RSS मुख्यालय से 1 किम... MP Govt & Org Meeting: मध्य प्रदेश में सरकार-संगठन तालमेल की परीक्षा, निगम-मंडल अध्यक्षों को आज मिले... Kanpur Jail Suicide Attempt: बेटियों की हत्या के आरोपी दवा व्यापारी शशि रंजन ने जेल में थाली से रेती... Delhi-Mumbai Expressway: डीएनडी से जैतपुर तक 9 किमी का नया रूट तैयार, जून 2026 में खुलेगा, नितिन गडक... NEET UG Paper Leak 2026: अब सीबीआई के रडार पर आए पेपर खरीदने वाले अमीर अभिभावक, महाराष्ट्र में कई ठि... Sasaram Railway Station: सासाराम रेलवे स्टेशन पर खड़ी पटना पैसेंजर ट्रेन में लगी भीषण आग, धू-धू कर ज... Howrah Eviction Drive: हावड़ा में भारी सुरक्षा के बीच महा-अतिक्रमण हटाओ अभियान, मंत्री दिलीप घोष की ... Bada Mangal 2026: 19 मई को है ज्येष्ठ महीने का तीसरा बड़ा मंगल, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और अचूक... Mexico Mass Shooting: मेक्सिको के प्यूब्ला में बंदूकधारियों का तांडव, मासूम बच्चे समेत 10 लोगों की ग... Weather Update: दिल्ली-NCR में जारी रहेगा भीषण गर्मी का सितम, यूपी-पंजाब समेत इन राज्यों में हीटवेव ...
विदेश

अमेरिका के लिए पलट गया पूरा खेल, 12000 KM से चीन को कर दिया ‘परास्त’

नेपाल में सिर्फ दो दिन चले युवाओं के आंदोलन ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया. नेपाल में इस हफ्ते जो भी देखने को मिला, इसका असर सिर्फ नेपाल की राजनीति तक ही सीमित नहीं है. इसका असर पूरी एशियाई राजनीति पर पड़ा है क्योंकि ओली को चीन का सबसे बड़ा करीबी माना जाता था.

उनके हटने से यह माना जा रहा है कि अमेरिका ने एक बड़ा गेम खेला है और चीन को सीधे-सीधे झटका दिया है. नेपाल हमेशा से भारत और चीन के बीच संतुलन बनाकर चलता आया है. लेकिन ओली के कार्यकाल में नेपाल का झुकाव चीन की ओर ज्यादा दिखने लगा था. उन्होंने बीजिंग की “बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव” को बढ़ावा दिया, यहां तक कि चीन की विजय दिवस परेड में भी शामिल हुए. यह सब अमेरिका को खटक रहा था.

नेपाल के आंदोलन में अमेरिका का कनेक्शन

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने इस साल नेपाल में मिलेनियम चैलेंज कॉम्पैक्ट (MCC) को फिर से ज़िंदा कर दिया था. यह प्रोजेक्ट करीब 500 मिलियन डॉलर की मदद के साथ ऊर्जा और सड़क ढांचे को मजबूत करने के लिए है. इसे चीन की “बेल्ट एंड रोड” के सीधे टक्कर का प्रोजेक्ट माना गया. इसलिए विश्लेषक कहते हैं कि ओली के खिलाफ भड़की नाराज़गी और आंदोलन में अमेरिका की गहरी भूमिका हो सकती है.

अब हालात ये हैं कि ओली बाहर हैं और अब अंतरिम प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी सुशीला कार्की संभालने जा रही है. कार्की के भारत से अच्छे रिश्ते हैं, उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है और पीएम मोदी का नाम लेकर आभार भी जताया है. साफ है कि नेपाल की राजनीति अब चीन से थोड़ी दूरी और भारत अमेरिका के करीब जाती दिख रही है.

भारत- अमेरिका की दोस्ती में फिर तेजी

कुछ साल पहले भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में टैरिफ विवाद के चलते तनाव आ गया था. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी नेतृत्व के बीच बातचीत बढ़ रही है. अगले हफ्ते ही अमेरिकी प्रतिनिधि भारत आ सकते हैं जिसमें -8I विमान को लेकर डील हो सकती है. आने वाले दिनों में अगर टैरिफ को लेकर भी कुछ क्लैरिटी आ जाती है तो भारत अमेरिका के रिश्ते वापस पटरी पर आ सकते हैं. इसका मतलब है चीन पर दबाव. क्योंकि एशिया में अगर कोई एक ताकत है जो चीन को चुनौती दे सकती है, तो वो भारत ही है. अमेरिका इसे अच्छी तरह समझता है और इसलिए मोदी सरकार के साथ रिश्ते सुधारने में जुटा है.

पाकिस्तान को अपने पाले में रखने की कोशिश

पाकिस्तान लंबे समय से चीन का सबसे बड़ा साथी रहा है. चाहे आर्थिक मदद हो या रक्षा सौदे, बीजिंग हमेशा इस्लामाबाद के साथ खड़ा रहा. लेकिन पाकिस्तान की अपनी राजनीतिक और आर्थिक परेशानियों ने हालात बदल दिए हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में पाकिस्तान पर ज्यादा ही मेहरबान नजर आ रहे हैं. हाल ही में पाकिस्तानी आर्मी चीफ व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ डिनर कर चुके हैं. यह छोटा इशारा नहीं है. इससे साफ है कि अमेरिका चीन के सबसे भरोसेमंद साथी को भी अपनी तरफ खींचने में लगा है.

Related Articles

Back to top button