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टला नहीं टकराव! तालिबान-पाकिस्तान के बीच होगी अब खुली जंग? तुर्की की शांति डील इस वजह से हुई फेल

तुर्की के इस्तांबुल में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रही लंबी अवधि की शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई. न्यूज एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच हालिया सीमा संघर्षों के बाद यह बातचीत बेहद अहम मानी जा रही थी, लेकिन अब इसके विफल होने से क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका गहरी हो गई है.

दोनों देशों के प्रतिनिधि हाल के हफ्तों में हुई घातक झड़पों के बाद सुलह की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे. अक्टूबर की शुरुआत में अफगान और पाकिस्तानी बलों के बीच सीमा पर भीषण गोलीबारी हुई थी, जिसमें दर्जनों लोगों की मौत हुई थी. यह संघर्ष 2021 में तालिबान के काबुल पर नियंत्रण के बाद सबसे गंभीर हिंसा बताई जा रही है.

दोहा में अस्थायी युद्धविराम पर सहमत थे

दोनों देशों ने 19 अक्टूबर को दोहा में अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई थी, जिसके बाद इस्तांबुल में तुर्की और कतर की मध्यस्थता में दूसरी दौर की बातचीत शुरू हुई. लेकिन वार्ता के दौरान कई मुद्दों पर मतभेद बने रहे और बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई.

तालिबान पर आरोप और तनावपूर्ण बातचीत

पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, अफगान तालिबान पाकिस्तानी तालिबान (TTP) को नियंत्रित करने के लिए तैयार नहीं थे. इस पर इस्लामाबाद ने कड़ा विरोध जताया. पाकिस्तान का आरोप है कि TTP के लड़ाके अफगानिस्तान में खुलेआम सक्रिय हैं और हाल के हमलों के पीछे वही हैं. वहीं, अफगान पक्ष ने कहा कि उनका TTP पर कोई प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं है. बातचीत के दौरान इस मुद्दे पर तनावपूर्ण बहस हुई और इसी कारण वार्ता बिना निष्कर्ष के समाप्त हो गई.

दोनों देशों के बीच नया संकट

अक्टूबर की शुरुआत में पाकिस्तान ने काबुल सहित कई इलाकों में हवाई हमले किए थे, जिनका लक्ष्य पाकिस्तानी तालिबान का प्रमुख बताया गया. इसके जवाब में तालिबान बलों ने सीमा चौकियों पर हमले किए, जिससे दोनों ओर भारी नुकसान हुआ. हालांकि, दोनों देशों ने युद्धविराम पर सहमति जताई थी, फिर भी सप्ताहांत में हुई झड़पों में पांच पाकिस्तानी सैनिक और 25 तालिबान लड़ाके मारे गए. वार्ता की विफलता से अब यह डर जताया जा रहा है कि सीमा पर फिर हिंसा बढ़ सकती है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने शनिवार को चेतावनी दी थी कि अगर इस्तांबुल वार्ता असफल रही, तो स्थिति खुली जंग में बदल सकती है.

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