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बिहार

BJP के लिए ‘अछूत’ सीट: लगातार पांच चुनावों से स्वीटी का दबदबा बरकरार, पार्टी ने फिर भी उन पर ही जताया भरोसा

बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव प्रचार पूरी तरह से जोर पकड़ चुका है. राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर ताबड़तोड़ चुनाव प्रचार में भी जुटे हुए हैं. हालांकि प्रदेश की सियासत में कई सीटें ऐसी भी हैं जहां अहम माने जाने वाले प्रतिष्ठित दलों का अब तक खाता तक नहीं खुल सका है. चाहे वो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), राष्ट्रीय जनता दल (आरेजेडी) हो या कांग्रेस. ऐसी ही एक चर्चित सीट है किशनगंज, जहां से बीजेपी कई प्रयासों के बाद भी अपना खाता नहीं खोल सकी है.

सीमांचल क्षेत्र में पड़ने वाले किशनगंज जिले में 4 विधानसभा सीटें आती हैं जिसमें किशनगंज सीट भी शामिल है. मुस्लिम बहुल इस जिले की किशनगंज सीट पर बीजेपी को अब तक एक बार भी जीत हासिल नहीं हुई है. यहां पर 60 फीसदी से अधिक मुस्लिम आबादी रहती है. साल 1967 के बाद से यहां पर मुस्लिम प्रत्याशी ही चुनाव जीतता आ रहा है. इस जिले में महागठबंधन का ऐसा दबदबा है कि यहां पर एनडीए 2020 के चुनाव में अपना खाता तक नहीं खोल सकी थी. 4 में से 3 सीटों पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को जीत मिली तो एक सीट कांग्रेस के खाते में गई थी.

कांग्रेस-AIMIM को मिली जीत

कांग्रेस ने तब कमहरूल होदा के रूप में किशनगंज सीट से जीत हासिल की थी. हालांकि कमहरूल कांग्रेस में आने से पहले कई अन्य दलों में भी रह चुके हैं. यहां पर 2019 के उपचुनाव में उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के टिकट पर जीत हासिल की थी. जबकि 2015 के चुनाव में उन्हें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के टिकट से हार मिली थी. 2010 और 2015 में भी कांग्रेस के मोहम्मद जावेद को जीत मिली थी.

किशनगंज सीट पर भले ही पिछले 4 चुनावों में कांग्रेस और एआईएमआईएम के अलग-अलग प्रत्याशियों ने जीत हासिल की हो, लेकिन इस दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सिर्फ एक ही प्रत्याशी पर भरोसा जताया. बीजेपी ने पूर्व विधायक सिकंदर सिंह की पत्नी स्वीटी सिंह पर हर बार लगातार भरोसा जताया. 2010 से लगातार 4 चुनाव में हार के बाद भी स्वीटी सिंह बीजेपी की 2025 के चुनाव में भी उम्मीदवार हैं.

पहले चुनाव में 264 वोटों से हार

हालांकि राजपूत बिरादरी से आने वाली स्वीटी सिंह की किस्मत ने साथ भी नहीं दिया और वह एक बार बेहद करीबी मुकाबले में पराजित हो गई थीं. 2010 के चुनाव में स्वीटी सिंह जीत के बेहद करीब पहुंच गई थीं और कांग्रेस के डॉक्टर मोहम्मद जावैद (38,867 वोट) को कड़ी टक्कर दी. अंत तक चले मुकाबले में स्वीटी (38,603 वोट) को महज 264 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा.

फिर 2015 के चुनाव में बीजेपी ने स्वीटी के प्रदर्शन को देखते हुए फिर से भरोसा जताया. इस चुनाव में भी बीजेपी प्रत्याशी ने कांग्रेस के मोहम्मद जावैद को कड़ी चुनौती दी. लेकिन वह महज 8,609 वोटों के अंतर से चुनाव हार गईं. इसके बाद साल 2019 में किशनगंज सीट पर उपचुनाव कराया गया तो स्वीटी सिंह लगातार तीसरी बार बीजेपी की प्रत्याशी बनीं और उन्होंने एआईएमआईएम कमहरूल होदा को कड़ी चुनौती दी. लेकिन वह 10,204 मतों के अंतर से चुनाव हार गईं.

2020 में कड़े संघर्ष में शिकस्त

साल 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने एक बार फिर इस सीट से स्वीटी सिंह के रूप में किस्मत आजमाई. मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में स्वीटी ने अपनी ओर से जोरदार चुनौती दी, और कांग्रेस के प्रत्याशी इजहारूल हुसैन को अंत तक फंसाए रखा.

मतगणना के दौरान कभी स्वीटी तो कभी हुसैन आगे निकलते. लेकिन जब काउंटिंग पूरी हुईं तो स्वीटी महज 1,381 मतों के अंतर से जीत से दूर रह गईं और उन्हें एक ही सीट से लगातार चौथी हार का सामना करना पड़ा. AIMIM के कमहरूल होदा तीसरे स्थान पर रहे थे.

47 साल की स्वीटी सिंह बीजेपी के पूर्व विधायक सिकंदर सिंह की पत्नी और पेशे से वकील हैं. विधायकी का चुनाव लड़ने से पहले ही वह राजनीति में आ गई थीं. साल 2006 में स्वीटी जिला परिषद सदस्य के रूप में चुनी गईं, फिर जिला परिषद अध्यक्ष भी बनीं. इसके बाद वह जिला पार्षद के रूप में भी चुनी गईं. स्वीटी के पति सिकंदर सिंह ने साल 1995 के विधानसभा चुनाव में किशनगंज की ठाकुरगंज सीट पर जीत हासिल कर बीजेपी के लिए जिले में खाता खोला था.

2025 में चतुष्कोणीय जंग में स्वीटी

बीजेपी ने साल 2025 में भी स्वीटी सिंह को लगातार पांचवीं बार अपना उम्मीदवार बनाया है. महागठबंधन की ओर से कांग्रेस ने मौजूदा विधायक इजहारूल हुसैन का टिकट काट दिया और पूर्व विधायक कमहरूल होदा को फिर से चुनावी मुकाबले में उतार दिया. ओवैसी की AIMIM ने यहां से शम्स आगाज को खड़ा किया है, टिकट नहीं मिलने से AIMIM से बागी हुए इसहाक आलम इस जनसुराज पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं. खास बात यह है कि इस बार चुनाव में 10 प्रत्याशी मैदान में हैं और इस सीट पर अकेली महिला प्रत्याशी भी हैं.

अब देखना होगा कि पिछले 4 मुकाबलों में अलग-अलग प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर देने के बाद स्वीटी सिंह 2025 के चुनाव में जीत का स्वाद चख पाती हैं या नहीं. उनके पति जिले की ठाकुरगंज सीट जीतकर पहले ही इतिहास रच चुके हैं. अब अगर स्वीटी किशनगंज से जीत हासिल करने में कामयाब होती हैं तो यह जीत न सिर्फ उनके लिए बल्कि पार्टी के लिए भी बहुत ही अहम जीत साबित होगी.

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