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मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश में मखाने की खेती किसानों को करेगी मालामाल, सब्सिडी पाने फटाफट करें ये काम

छिंदवाड़ा: बांध नदी या फिर नहरों के किनारे खेत हैं और उन खेतों में लगातार पानी भरा रहने से फसल बोना मुश्किल होता है. जिसकी वजह से खेती घाटे का सौदा साबित होती है. घाटे की खेती को मुनाफे में बदलने के लिए उद्यानिकी विभाग ऐसी फसल लगाने का आईडिया लेकर आया है, जिससे किसान मालामाल हो सकता है. यह फसल है मखाने की, जिससे किसान लाखों रुपए कमा सकते हैं.

मखाने से होंगे मालामाल, सब्सिडी भी देगी सरकार
उप संचालक उद्यान एमएल ऊइके ने बताया कि, ”छिंदवाड़ा जिले के उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण विभाग में इनोवेशन के रूप में मखाना की खेती की योजना इस साल चलाई जा रही है. राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी में मखाना उत्पादन को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने का निर्णय लिया है. इस योजना के तहत प्रदेश में 150 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना खेती विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है.

बांध व नहरों के किनारे, जहां पानी का भराव होने से खेती करने में समस्या रहती है, ऐसे किसानों को प्राथमिकता और समुदाय आधारित मखाना की खेती करने वाले किसानों को वनपट्टा धारी हितग्राहियों को भी योजना के अंतर्गत लाभान्वित किया जा सकता है. योजना के अन्तर्गत जिले को 38 हेक्टर के टारगेट मिले हैं. इसके साथ ही योजना में किसान को 30 हजार रुपए प्रति हेक्टर के हिसाब से सब्सिडी भी दी जाएगी.”

ऑनलाइन करें आवेदन, इन कागजों की होगी जरूरत
योजना का लाभ लेने के लिये विभाग की वेवसाइट MPFSTS पोर्टल पर किसान आवेदन कर सकते हैं, जिसके लिये आवश्यक दस्तावेज जैसे हितग्राही की पासपोर्ट साइज फोटो, भूमि के खसरा/किश्तबंदी की नकल, आधार कार्ड, बैंक पास बुक छायाप्रति तथा अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के किसानों के लिये जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता होगी. योजना में स्व सहायता समूह के सदस्यों को भी शामिल किया जा सकता है.

1 लाख रुपए तक होता है मुनाफा
उपसंचालक उद्यान विभाग एमएल ऊइके ने बताया कि, ”मखाना की खेती करने के लिए एक एकड़ में करीब ₹20000 तक खर्च होता है लेकिन मखाने की डिमांड इतनी ज्यादा है की उपज के हिसाब से करीब एक एकड़ में ₹80000 से ₹100000 तक का उत्पादन होता है. सरकार द्वारा प्रति एकड़ ₹12000 की सब्सिडी दी जा रही है. इस हिसाब से किसानों को एक एकड़ में मात्र ₹8000 की लागत लगानी होगी.”

8 महीने में पककर तैयार होता है मखाना
मखाना मार्च और अप्रैल में लगाया जाता है और जिसे पककर तैयार होने में करीब 8 महीने का समय लगता है. नवंबर में उसके बीज हार्वेस्टिंग के लिए तैयार हो जाते हैं. भारत में सबसे ज्यादा मखाने का उत्पादन बिहार में किया जाता है.

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