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उत्तरप्रदेश

लुटेरी दुल्हन पर कमजोर पड़ी पुलिस! बैंक मैनेजर और दारोगा से ठगी के बावजूद कोर्ट से मिली राहत, ठोस सबूत नहीं होने का मिला फायदा

कानपुर कोर्ट ने लुटेरी दुल्हन कहे जाने वाली महिला की 14 दिन की न्यायिक रिमांड को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि महिला के खिलाफ पेश किए गए तमाम सबूत पर्याप्त नहीं हैं. कोर्ट में बचाव पक्ष की दलीलों के बाद अदालत ने इस बात को स्वीकार किया कि रिमांड के लिए पुलिस कोई भी विश्वसनीय, ठोस एवं कानून रूप से पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सकी. पूरे प्रकरण में कोर्ट ने संबंधित विवेचक और अधिकारियों को तत्काल उपस्थित होने का निर्देश भी दिया है. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इतने संवेदनशील और बहुचर्चित मामले में जांच किस स्तर पर कमजोर पड़ी. अब पुलिस इसकी दोबारा जांच कर कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी.

कानपुर में बीते मंगलवार, ग्वालटोली थाना पुलिस ने दरोगा आदित्य के साथ धोखाधड़ी, रंगदारी समेत 12 धाराओं में नामजद उसकी पत्नी दिव्यांशी को गिरफ्तार कर एसीजेएम कोर्ट में 14 दिन की न्यायिक रिमांड के लिए पेश किया था. एफआईआर में दिव्यांशी पर लुटेरी दुल्हन होने और कई लोगों को शिकार बनाने के आरोप लगाए गए थे. कोर्ट में सुनवाई के दौरान अरेस्ट ऑफ ग्राउंड यानी किन धाराओं में आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, इसका स्पष्ट विवरण और सीआरपीसी 41 का नोटिस उपलब्ध न कराने सहित सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइनों के उल्लंघन पर अदालत ने रिमांड से इंकार कर दिया.

घटनाक्रम के बाद डीसीपी सेंट्रल श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी महिला दिव्यांशी चौधरी की रिमांड रिफ्यूज होने की जानकारी उन्हें मिली है और वे इस फैसले के खिलाफ जिला जज की अदालत में अपील दाखिल करेंगे.

पूरे मामले में दिव्यांशी के वकील योगेश ने रिमांड पर हुई बहस के दौरान बताया कि गिरफ्तारी के बाद पुलिस जिन धाराओं में न्यायिक रिमांड चाहती थी, उनके समर्थन में पर्याप्त आधार मौजूद नहीं थे, जिसे कोर्ट ने भी अस्वीकार कर दिया.

इसके अलावा, दिव्यांशी के अधिवक्ता ने दरोगा आदित्य और विवेचक दरोगा शुभम सिंह की एक तस्वीर कोर्ट में प्रस्तुत की जिसमें दोनों हाथ में हाथ डाले खड़े थे. इसके आधार पर बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि विवेचक शुभम सिंह, आदित्य के मित्र हैं, ऐसे में निष्पक्ष जांच संभव नहीं है.

कोर्ट ने कहा कि रिमांड जैसी पैट्रोल प्रक्रिया के लिए आवश्यक 7/14 आधार पुलिस पेश नहीं कर सकी. मात्र आरोप और अनुमान के आधार पर रिमांड नहीं दी जा सकती.

‘मेरा पति लुटेरा दूल्हा’

कोर्ट से राहत मिलने के बाद दिव्यांशी ने कहा, ‘मेरा पति लुटेरा दूल्हा है, न कि मैं लुटेरी दुल्हन. मेरे पैसों से उसने अपना घर बनवाया है. हमारी अरेंज मैरिज हुई थी.’ दिव्यांशी का आरोप है कि दरोगा होने के कारण आदित्य लोगों को फंसाने में माहिर है और विभाग के लोगों की मदद से मेरे खिलाफ साजिश कर रहा है.

ट्रांजैक्शन के मामले में दिव्यांशी ने सफाई देते हुए कहा, ‘2016 से मैं वर्किंग वुमन हूं. मेरे सभी खाते और सैलरी अकाउंट में जो भी लेन-देन हुआ है, वह वैध है. मेरे कई लोन हैं. मैं अच्छे परिवार से हूं, मेरे भाई बैंक मैनेजर हैं.’

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