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उत्तरप्रदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द किया NSA, ₹5 लाख का मुआवजा DM और पुलिस अफसरों से वसूलने का आदेश

नोएडा (उत्तर प्रदेश): नोएडा में अप्रैल माह के दौरान हुए श्रमिक आंदोलन के सिलसिले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत निरुद्ध की गईं कानून की छात्रा आकृति चौधरी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है।

अदालत ने आकृति पर लगाए गए एनएसए डिटेंशन ऑर्डर को पूरी तरह निरस्त करते हुए राज्य सरकार को याचिकाकर्ता को ₹5 लाख का हर्जाना (मुआवजा) अदा करने का स्पष्ट आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत के इस फैसले से यह सवाल खड़ा हो गया है कि यह भारी-भरकम मुआवजा राशि किसके खाते से जाएगी, जिसका स्पष्ट ब्योरा याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने प्रस्तुत किया है।

👩‍🎓 ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल थीं, तोड़फोड़ में नहीं’: अधिवक्ता राजवेंद्र सिंह ने रखा पक्ष

बचाव पक्ष की दलीलें और घटनाक्रम:

  • एलएलबी की छात्रा: आकृति के अधिवक्ता राजवेंद्र सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आकृति चौधरी एलएलबी प्रथम वर्ष (LLB 1st Year) की मेधावी छात्रा हैं।

  • शांतिपूर्ण भागीदारी: नोएडा में आयोजित श्रमिक आंदोलन के दौरान आकृति केवल शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। जब उपद्रव और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं, तब वह मौके पर उपस्थित तक नहीं थीं।

  • गलत एनएसए की चुनौती: प्रशासन ने राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव में आकर उन पर कठोर रासुका (NSA) लगा दिया था, जिसे मौलिक अधिकारों का हनन बताते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी।

💰 ‘DM और पुलिस अफसरों की जेब से वसूला जाएगा पैसा’: अधिवक्ता का बड़ा खुलासा

मुआवजे की अदायगी और जवाबदेही:

  • सबूत पेश करने में विफल सरकार: अधिवक्ता ने बताया कि सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से आरोप सिद्ध करने वाले पुख्ता दस्तावेज और साक्ष्य मांगे थे, परंतु अभियोजन पक्ष ऐसा कोई भी ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सका।

  • अफसरों पर व्यक्तिगत जवाबदेही: कोर्ट के निर्देशानुसार ₹5 लाख का यह मुआवजा सरकारी खजाने के बजाय नोएडा के तत्कालीन जिलाधिकारी (DM) और उन पुलिस अधिकारियों के वेतन/खाते से वसूला जाएगा, जिनकी अनुशंसा (Recommendation) पर यह गैर-कानूनी एनएसए लगाया गया था।

🎥 ‘हिंसा और पथराव भड़काने का वीडियो कहां है?’ कोर्ट ने प्रशासन को लगाई फटकार

अदालत की सख्त टिप्पणी और सवाल:

  • कहानी पर उठाए सवाल: उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा गढ़ी गई कहानी और आकृति पर लगाए गए निराधार आरोपों पर कड़ा ऐतराज जताया।

  • साक्ष्यों का अभाव: खंडपीठ ने सीधे सवाल किया कि अभियोजन ऐसा कौन सा वीडियो फुटेज या ऑडियो साक्ष्य दिखा सकता है, जिससे यह सिद्ध हो कि आकृति ने भीड़ को आगजनी, पथराव या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाया था?

  • डिटेंशन रद्द: रिकॉर्ड पर कोई भी साक्ष्य न होने के कारण कोर्ट ने हिरासत को पूरी तरह अवैध करार देते हुए तत्काल रिहाई और मुआवजे का ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

🛑 मनमानी कार्रवाई पर सख्त संदेश: अफसरों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय

फैसले का प्रशासनिक और कानूनी प्रभाव:

  • वेतन से भरपाई का नजीर: हाईकोर्ट का यह निर्णय प्रशासनिक गलियारों में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें मुआवजे का बोझ सीधे निर्णय लेने वाले अधिकारियों पर डाला गया है।

  • संविधान प्रदत्त स्वतंत्रता की रक्षा: इस आदेश से यह स्पष्ट संदेश गया है कि यदि किसी भी भारतीय नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन निर्धारित विधिक प्रक्रियाओं के विपरीत जाकर किया जाएगा, तो उसकी जिम्मेदारी केवल अमूर्त ‘सिस्टम’ की नहीं होगी, बल्कि संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय कर उनसे सीधे वसूली की जाएगी।

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