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बिहार

चुनावी ड्यूटी का बढ़ता दबाव: केरल, बंगाल और MP में BLOs की मौत पर मचा सियासी बवाल, क्या अधिकारियों (SIR) की सख्ती ने ली जान?

बिहार के बाद देश के नौ राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया चल रही है. SIR की प्रक्रिया में सबसे अहम जिम्मेदारी बीएलओ (ब्लॉक लेवल ऑफिसर) को दी गई है. वह घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित कर रहा है और फिर से उसे संग्रहित कर रहा है, लेकिन मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया में सबसे चिंता का विषय यह उभर कर आया है कि बीएलओ की लगातार मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं.

बीएलओ के परिवार के सदस्य शिकायत कर रहे हैं कि काम के अत्यधिक दवाब है और निर्धारित समय के अंदर काम पूरा करने का बहुत ही प्रेशर है. इस वजह से बीएलओ अपनी जान दे रहे हैं. बीएलओ की मौत को लेकर विपक्षी पार्टियां सरकार और चुनाव आयोग पर हमलेवार है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर एसआईआर की प्रक्रिया स्थगित करने की मांग की है. ममता बनर्जी का आरोप है कि तीन साल की प्रक्रिया तीन महीने में पूरा करने के लिए चुनाव आयोग का दबाव बना रहा है. इस वजह से बीएलओ आत्महत्या कर रहे हैं. ममता बनर्जी ने इससे पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया था कि बंगाल में 28 बीएलओ ने दवाब की वजह से अपनी जान दे दी है.

बंगाल में फिर एक बीएलओ ने दी जान

शनिवार को पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर जिले में एक और महिला बीएलओ ने आत्महत्या कर ली है. टीएमसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मृतक का नाम रिंकू तरफदार (54) है, वो चोपरा के बंगालजी स्वामी विवेकानंद विद्या मंदिर में पार्ट-टाइम टीचर थी और चोपरा दुई पंचायत के बूथ नंबर 201 की BLO थी. वह कृष्णानगर में छठी मंजिल पर रहती थी. उसने कल रात घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. आज सुबह शव बरामद किया गया. उसने अपने सुसाइड नोट में एसआईआर प्रक्रिया की दबाव को मौत का कारण बताया है.

Tmc Twitter

इस बीच ममता बनर्जी की सरकार ने ऐलान किया है कि पश्चिम बंगाल सरकार मृत BLO के परिवार को 2-2 लाख रुपये मुआवजे के तौर पर देगी और जो BLO काम के दौरान बीमार पड़ जाते हैं, उन्हें 1 लाख रुपये दिए जाएंगे.

MP, गुजरात, राजस्थान और केरल में भी मौत

ऐसा नहीं है कि केवल पश्चिम बंगाल में ही बीएलओ की मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं. मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और केरल में बीएलओ की मौत की घटनाएं सामने आई हैं. मध्य प्रदेश के दतिया में बीएलओ उदयभान और झाबुआ में बीएलओ भुवन सिंह चौहान ने जान दे दी हैं.

इसी तरह से गुजरात के गिर सोमनाथ में 40 वर्षीय बीएलओ अरविंद मुगरी बढेर और खेड़ा में 50 वर्षीय रमेश भाई परमार ने जान दे दी है. राजस्थान के सवाई माधोपुर में बीएलए हरिओम बैरवा और जयपुर में मुकेश जांगिड की मौत हुई है. केरल के कन्नूर में अनीज जॉर्ज ने जान दे दी है.

तृणमूल कांग्रेस ने अपने सोशल साइट पोस्ट में कहा है कि तमिलनाडु, राजस्थान और केरल के बाद अब मोदी-शाह के गुजरात में SIR के बहुत ज्यादा दबाव में एक BLO ने सुसाइड कर लिया है. गुजरात के BLO अरविंद वढेर ने अपने सुसाइड नोट में लिखा, मैं अब SIR का काम नहीं कर सकता.

बीएलओ की मौत से सियासी उबाल

उन्होंनेे कहा कि सिर्फ बंगाल में ही नहीं, दूसरे राज्यों में भी BLO बीमार पड़ रहे हैं, और बदकिस्मती से कुछ ने काम के बहुत ज्यादा बोझ के कारण अपनी जान भी दे दी है. जाहिर है, BLO पर काम के बहुत ज्यादा दबाव और हालात को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं. क्या चुनाव आयोग इन बार-बार होने वाली मौतों की जिम्मेदारी लेगा?

दूसरी ओर, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में होने वाली मौत की वजह काम का अत्यधिक दबाव बताया जा रहा है. केरल में बीएलओ की मौत के खिलाफ सोमवार को बीएलओ ने हड़ताल करने का ऐलान किया है, तो दूसरी ओर, देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही बीएलओ की मौत को लेकर चुनाव अधिकारी ने संबंध राज्यों से रिपोर्ट तलब की है.

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