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मध्यप्रदेश

50 रुपये का जल जा रहा पेट्रोल और मिल रहे महज 5 रुपये, रतलाम में गौ सेवकों का फूटा गुस्सा

रतलाम: लगभग 50 रुपये का पेट्रोल और आधा दिन खर्च करने के बाद आपको अपने द्वारा किए गए कार्य का मानदेय अगर 5 रुपये मिले तो कैसा महसूस करेंगे आप. जी हां, मध्य प्रदेश में पशुपालन विभाग का हिसाब किताब तो कुछ ऐसा ही है. दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुओं की नस्ल सुधार के लिए चलाए जा रहे दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के सर्वे के लिए मित्र गौ सेवकों को काम पर लगाया गया है. इस सर्वे के लिए प्रति परिवार उन्हें 5 रुपये दिए जा रहे हैं.

मानदेय को लेकर मित्र गौसेवकों के संगठन ने सभी जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंप जताया विरोध

इस कार्य के लिए उन्हें चुनिंदा पशुपालकों के घर पर जाकर सर्वे करना है और उन्हें इस अभियान के बारे में विस्तृत जानकारी देना है. हर एक परिवार के सर्वे के एवज में उन्हें 5 रुपये मिलेंगे. आदिवासी अंचल के दूरस्थ गांव में कहीं 6 परिवारों का सर्वे करना है तो किसी गांव में केवल एक परिवार का. जिसके लिए उन्हें अधिकतम 30 रुपये और न्यूनतम 5 रुपये ही मिल पाएंगे. पशुपालन विभाग द्वारा इस कार्य के लिए दिए जा रहे हैं मानदेय को लेकर मंगलवार को मित्र गौसेवकों के संगठन ने सभी जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंप कर विरोध दर्ज कराया.

दरअसल पशुपालन विभाग ने दुग्ध उत्पादन और अच्छी नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान की शुरुआत की थी. जिसके दूसरे चरण में एक बार फिर घर-घर सर्वे करने का काम विभाग के फील्ड स्टाफ अधिकारी और कर्मचारियों के साथ गौसेवकों को भी करना है. इस सर्वे को अनिवार्य रूप से करने के लिए विभाग द्वारा उन्हें पाबंद किया गया है. जबकि उन्हें विभाग द्वारा किसी भी प्रकार का वेतन अथवा भत्ता नहीं मिलता है. विभाग ने इस कार्य को करने के लिए प्रत्येक परिवार के सर्वे पर 5 रुपए दिए जाने का निर्णय लिया है.

गौ सेवक बोले- 50 रुपये का पेट्रोल खर्च कर दिन भर में हो रहा 30-35 का काम

अपना विरोध दर्ज कराने जिला मुख्यालय पहुंचे गौसेवकों ने बताया कि हमें केवल कृत्रिम गर्भाधान करने और प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग देकर स्वरोजगार से जोड़ा गया है. लेकिन विभाग अपने अलग-अलग कार्य और सर्वे में हमारी अनिवार्य ड्यूटी लगाता है. गौसेवक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि हमारे क्षेत्र में किसान दूर-दूर मजरे और टोलों पर रहते हैं. जहां जाने के लिए पेट्रोल खर्च होता है और हमारा समय भी ज्यादा लगता है.

दिन भर में 15 से 20 परिवार का सर्वे कर भी लिया तो 5 रुपये के हिसाब से कितना मानदेय मिल जाएगा. इसमें तो उल्टा हमारी ही जेब से पैसा खर्च हो रहा है. गौ सेवक दीपक जाधव ने बताया “मुझे लालगुवाड़ी गांव के 6 परिवारों का सर्वे करने के लिए 30 किलोमीटर दूर जाना पड़ा. वर्तमान में कृषि कार्य चल रहा है जिसकी वजह से लोग अपने घरों पर नहीं मिलते हैं. वे खेतों में काम करते हैं. पूरा दिन खर्च करने के बाद एक भी परिवार का सर्वे नहीं हो पाया है.” गो सेवकों ने अपना विरोध दर्ज करवाते हुए अन्य मांगों को भी जिला मुख्यालय पहुंच कर रखा है.

रतलाम में 17000 बड़े पशुपालक परिवारों का किया जा रहा सर्वे

वहीं, इस मामले में पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ नवीन शुक्ला ने बताया “विभाग द्वारा दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान दिसंबर माह में चलाया जाना है. इसके लिए जिले में 17000 बड़े पशुपालक परिवारों का सर्वे करने के लिए विभाग के अधिकारी, कर्मचारियों के अलावा गौ सेवकों की भी ड्यूटी लगाई गई है. इस कार्य के लिए दिए जाने वाले मानदेय को लेकर निर्णय विभाग के द्वारा ही लिया जाता है. इस संदर्भ में वरिष्ठ अधिकारियों को सेवकों की समस्या से अवगत कराया गया है.” बहरहाल महंगाई के इस दौर में जहां 5 रुपये में चाय भी नहीं मिलती है, इतने कम मानदेय के साथ गौ सेवकों से पशुपालन विभाग द्वारा विभागीय कार्य करवाना कहां तक जायज है.

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