नए साल में घूमने का है प्लान तो फटाफट मध्य प्रदेश आ जाएं, मिलेगा रोमांच का गजब डोज

शहडोल : नए साल में अगर आप कुछ नया प्लान कर रहे हैं और सुकून के पल या पार्टी के लिए कुछ अलग हटके सोच रहे हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए है. इस बार जोरदार ठंड के बीच आप मध्य प्रदेश की कुछ ऐसी ट्रैवल डेस्टिनेशन पर जा सकते हैं, जहां आप प्रकृति के बीच नए साल के आगमन का जश्न मना सकते हैं. इस बार नव वर्ष पर आप ट्राइबल बेल्ट की डेस्टिनेशन और टूरिस्ट स्पॉट्स भी जा सकते हैं, जहां बाघों की दहाड़ है, हाथियों की चिंघाड़ है और तो और जंगल के बीच रहने का अपना एक अलग ही मजा.
नया साल और नया रोमांच
शहडोल के पुरातत्व विद और इतिहासकार रामनाथ सिंह परमार कहते हैं, ” नए साल में अगर आप घूमने के शौकीन हैं और अगर अभी भी प्लान नहीं किया है तो कम बजट में भी आप नए साल को खूबसूरत बना सकते हैं. मध्य प्रदेश के शहडोल संभाग में ऐसी कई बेहतरीन जगह हैं, जहां आप जा सकते हैं. यहां आपको बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वाइल्ड लाइफ का आनंद मिलेगा, तो वहीं अमरकंटक में धार्मिक स्थलों के साथ हिल स्टेशन की तरह लुत्फ उठा सकते हैं. इसके अलावा यहां के ट्राइबल बेल्ट से आपको बहुत कुछ नया मिलेगा. यहां की नेचुरल ब्यूटी, रामपथ गमन मार्ग समेत ऐसे कई सारे स्थल हैं जो आपके लिए आपके नए साल को नए रोमांच से भर देंगे.”
नए साल के लिए उमरिया में कई टूरिस्ट स्पॉट्स
रामनाथ सिंह परमार कहते हैं, ” अगर आप शहडोल संभाग में घूमने आते हैं, तो शहडोल संभाग में तीन जिले आते हैं शहडोल, अनूपपुर और उमरिया. तीनों ही जिलों में पर्यटन के हिसाब से अपार संभावनाएं हैं. ये गोंडवाना शासन काल का एरिया रहा है, यहां कई ऐसी ऐतिहासिक धरोहर हैं, जो अद्भुत हैं. पर्यटन के हिसाब से उमरिया जिले की बात करें तो यहां का बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बहुत ही खास है, देश-विदेश से लोग यहां के बाघों के दर्शन करने आते हैं, अब तो यहां बाघ और हाथी एक साथ देखने को मिलते हैं. इसके अलावा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में तरह-तरह के वन्य प्राणी पक्षी पर्यटकों का मन मोह लेते हैं, यहां के नदी, झरने, घना जंगल अद्भुत हैं. यहां आप रिसॉर्ट्स में भी नए साल का जश्न मना सकते हैं. उमरिया जिले में ही अमोल खोह एक नेचुरल ब्यूटी है, जो धार्मिक और प्राकृतिक दोनों स्थल है.”
उमरिया जिले के नौरोजाबाद में स्थित नागोताल एक ऐसी जगह जहां माना जाता है कि यहां अद्भुत सांपों की दुनिया है. ऐसा माना जाता है कि यहां पर कभी मणि वाले सांप भी रहते थे, ऋषि मुनि यहां साधना करते थे, एक ऐसी जगह जो अलग-अलग तरह के सांपों के लिए अनुकूल है.
इसके अलावा उमरिया जिले के ही बिरसिंहपुर पाली में बिरासिनी देवी महिषासुर मर्दिनी मंदिर है, जो की दसवीं सदी का है. ये काफी सिद्ध माता मानी जाती हैं. यहां के छोटे-छोटे झरने, यहां का खान-पान, परंपरा, रहन-सहन बहुत ही अद्भुत है. सीतामढ़ी पुरातात्विक स्थल और बांधवगढ़ का पुरातात्विक स्थल भी आप जा सकते हैं. इसके अलावा दशरथ घाट है, जिसे लेकर ऐसा माना है कि यहां प्रभु श्रीराम ने वनवास के दौरान एक रात बिताई थी.
नए साल के लिए शहडोल में क्या खास?
उमरिया जिले में घूमने के बाद आप शहडोल जिले का भी आनंद ले सकते हैं. यहां हाल ही में पर्यटन की दृष्टि से बाणसागर के बैकवॉटर में एक आईलैंड का निर्माण किया गया है, जिसका नाम सरसी आइलैंड दिया गया है. इसकी खूबसूरती देखकर ऐसा लगता है अंडमान निकोबर का कोई आईलैंड हो. यहां पर्यटकों के लिए बहुत सारी सुविधाएं दी गई हैं, जिसमें रिसॉर्ट में स्टे के साथ वॉटर व स्पोर्ट्स एक्टिविटी भी शामिल हैं, जो पर्यटकों के लिए काफी रोमांचकारी है. इसके अलावा यहां पर आपको बाणसागर बांध भी देखने को मिलेगा.
शहडोल जिला मुख्यालय आ जाएंगे तो यहां पर आपको कलचुरिकालीं शासन काल के 10वी- 11वीं सदी के विराट शिव मंदिर के अद्भुत दर्शन होंगे, जो पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व का है. यहां मौजूद बाणगंगा कुंड के बारे में कहा जाता है कि अर्जुन ने बाण मार कर इस कुंड का निर्माण किया था. इसके अलावा नजदीकी सेंटर में कंकाली मंदिर है, जो की काफी सिद्ध मंदिर है. यह तंत्र साधना का केंद्र बिंदु भी रहा है.
अनूपपुर जिले के पर्यटन स्थल
शहडोल जिले में घूमने के बाद आप अनूपपुर जिले के अमरकंटक भी जा सकते हैं, जो एक धार्मिक स्थल है. यहां से तीन महा नदियों का उद्गम हुआ है, जो हैं नर्मदा नदी, सोन नदी और जोहिला नदी जो अपने आप में अद्भुत और चमत्कारी हैं. इसके अलावा यह जगह धार्मिक, पुरातात्विक, सामाजिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक दृष्टिकोण से बहुत ही अद्भुत है. यहां आप एक हिल स्टेशन का अनुभव हासिल कर सकते हैं. नए साल में यहां लोग ट्रैकिंग करने भी पहुंचते हैं, यहां पास ही सिलहरा की गुफाएं भी हैं जो की नागवंशी गुफाएं हैं, यहां भी आप जा सकते हैं.
ट्राइबल बेल्ट के बीच नए साल का जश्न
पुरातत्व विद और इतिहासकार रामनाथ परमार बताते हैं, ” ये अंचल धार्मिक, सामाजिक, पुरातात्विक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक तौर पर तो बहुत रिच है ही, इसके अलावा यहां पर अगर आप घूमने आते हैं तो आपके यहां के सामाजिक वातावरण में, खासकर ट्राइबल प्राचीन जनजातियों के बीच समय बिताने का मौका मिलता है. आप उनकी संस्कृति, उनके समाज, सभ्यता, खान-पान, बोली आदि को करीब से जान सकते हैं. इसके अलावा यहां देसी खाने का जमकर मजा ले सकते हैं.”






