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झारखण्ड

फाइलों में ही दौड़ रहीं सिटी बसें, 24 बसों पर पूरे शहर का बोझ

रांची: राजधानी में सिटी बस सेवा कागजों और फाइलों से बाहर निकलने का नाम नहीं ले रही है. हालत यह है कि पूरे शहर और प्रस्तावित रिंग रोड क्षेत्र की परिवहन जरूरतों को पूरा करने के लिए जहां 224 सिटी बसों की आवश्यकता बताई गई है, वहां फिलहाल महज 24 बसों के भरोसे शहर की पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था चल रही है. इसका सीधा खामियाजा रोजाना हजारों यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है.

शहर में सिटी बस संचालन को लेकर रांची नगर निगम की ओर से कई बार कोशिशें की गई. एक-दो नहीं, बल्कि सात बार टेंडर निकाले गए, जिसके बाद एक ऑपरेटर ने रांची में सिटी बस संचालन में रुचि भी दिखाई. इसके बाद टिकट वेंडिंग एजेंसी की तलाश शुरू हुई, लेकिन करीब सात महीने बीत जाने के बाद भी नई बसें सड़कों पर नहीं उतर सकीं. नतीजा यह है कि सिटी बसें आज भी सिर्फ फाइलों में ही दौड़ रही हैं.

24 बसों पर पूरा शहर, यात्रियों की मजबूरी

वर्तमान में चल रही दो दर्जन बसों में क्षमता से कहीं अधिक यात्रियों को ठूंस-ठूंस कर भरा जा रहा है. सुबह और शाम के व्यस्त समय में स्थिति और भी भयावह हो जाती है. कामकाजी लोग, छात्र और दूर-दराज जाने वाले यात्री खड़े-खड़े सफर करने को मजबूर हैं. कई बार तो बसों में चढ़ने तक की जगह नहीं बचती. जेब कटने, मोबाइल और पर्स गायब होने जैसी घटनाएं आम हो चुकी हैं. लेकिन यात्रियों के पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है. ऑटो और ई-रिक्शा चालकों की मनमानी और मनचाहा किराया भी लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है. ऐसे में सिटी बस ही आम आदमी के लिए सबसे सस्ता सहारा बचती है.

15 साल पुरानी बसें हटते ही बिगड़ा सिस्टम

जानकारी के अनुसार, 15 साल की अवधि पूरी कर चुकी पुरानी बसों को एक साथ सड़कों से हटा दिया गया. इसके बाद से ही राजधानी की पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई. बसों की संख्या अचानक कम होने से यात्रियों की भीड़ कई गुना बढ़ गई. लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों के लिए हालात और भी मुश्किल हैं. क्योंकि उनके पास निजी वाहन या महंगे साधनों का विकल्प नहीं होता है. बसों की भारी कमी के कारण कई रूटों पर यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है.

जब बस आती भी है, तो इतनी भरी होती है कि लोग आगे और पीछे की गेट पर लटककर सफर करने को मजबूर होते हैं. यह स्थिति किसी बड़े हादसे को दावत देके हैं. इसके बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं. सिटी बस ड्राइवर भी ऐसी हालात से परेशान हैं. ड्राइवरों का कहना है कि सीमित बसों में लगातार भीड़ ढोने से न सिर्फ बसों पर दबाव बढ़ रहा है, बल्कि उनके काम का तनाव भी कई गुना हो गया है. समय पर रखरखाव, तय शेड्यूल और यात्री सुरक्षा पर असर पड़ रहा है.

10 साल पुरानी बसें, जयंती पर लगे थे स्टीकर

गौरतलब है कि झारखंड राज्य की रजत जयंती के अवसर पर कुछ साल पहले सिटी बसों पर विशेष स्टीकर लगाए गए थे. इन बसों को खरीदे करीब 10 वर्ष हो चुके हैं. अब उन बसों की स्थिति भी सवालों के घेरे में हैं. नई बसों की जरूरत लगातार बढ़ती जा रही है. लेकिन विभाग की तरफ से निर्णय प्रक्रिया ठप पड़ी है.

प्रस्ताव तैयार, अमल का इंतजार

रांची नगर निगम ने सिटी बस सेवा को दुरुस्त करने के लिए पूरा प्रस्ताव बनाकर नगर विकास विभाग और राज्य सरकार को भेज दिया है. इसमें बसों की संख्या बढ़ाने, रूट विस्तार और आधुनिक संचालन व्यवस्था का खाका शामिल है. हालांकि, फिलहाल यह प्रस्ताव उच्च अधिकारियों के स्तर पर अटका हुआ है और जमीन पर इसका असर नजर नहीं आ रहा.

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