सावधान! सर्दियों में अंगीठी बन सकती है ‘साइलेंट किलर’, सोते समय की गई ये एक गलती पड़ सकती है भारी

दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में इस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है. ठंड से बचने के लिए लोग अलग-अलग उपाय अपनाते हैं, जिनमें अंगीठी का इस्तेमाल एक आम और सस्ता विकल्प है. खासतौर पर ग्रामीण इलाकों और छोटे घरों में लोग अंगीठी से आग तापते हैं. हालांकि, ठंड में राहत देने वाली यही अंगीठी अगर सही तरीके से इस्तेमाल न की जाए, तो यह सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. कई बार लोग बंद कमरों में अंगीठी जलाकर बैठ जाते हैं, जिससे अनजाने में बड़ा खतरा पैदा हो जाता है.
अंगीठी के गलत इस्तेमाल से सांस संबंधी समस्याएं, बेहोशी और गंभीर मामलों में जान जाने का भी खतरा रहता है. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि सर्दियों में अंगीठी का इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और कौन-सी गलतियां भारी पड़ सकती हैं.
अंगीठी का इस्तेमाल किस तरह करना चाहिए?
आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि बताते हैं कि अंगीठी का इस्तेमाल हमेशा सावधानी के साथ करना चाहिए. इसे खुली जगह, जैसे आंगन, छत या ऐसी जगह पर रखें जहां हवा का पर्याप्त वेंटिलेशन हो. अगर कमरे में अंगीठी जलानी जरूरी हो, तो खिड़की या दरवाजा थोड़ा खुला रखें ताकि धुआं बाहर निकल सके.
अंगीठी को कभी भी सोते समय जलाकर न रखें. बच्चों और बुजुर्गों को इससे सुरक्षित दूरी पर रखें. जलती अंगीठी के पास आग पकड़ने वाली वस्तुएं न रखें. इसके अलावा अंगीठी को मजबूत और सपाट जगह पर रखें, ताकि पलटने का खतरा न रहे. अंगीठी जलाने के बाद हाथ अच्छी तरह धोएं और लंबे समय तक इसके बहुत पास न बैठें.
अंगीठी का गलत इस्तेमाल कैसे है जानलेवा?
बंद कमरे में अंगीठी जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनती है, जो न रंग वाली होती है और न ही इसकी कोई गंध होती है. इस गैस के संपर्क में आने से व्यक्ति को चक्कर, सिरदर्द, उलटी और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है. ज्यादा देर तक इसका असर रहने पर व्यक्ति बेहोश हो सकता है और जान जाने का खतरा भी रहता है.
कई बार लोग ठंड से बचने के लिए रात में अंगीठी जलाकर सो जाते हैं, जो सबसे बड़ी और खतरनाक गलती है. अक्सर लोग खतरे को समय पर पहचान नहीं पाते, जिससे हालात और गंभीर हो जाते हैं.
ये भी है जरूरी
बंद कमरे में अंगीठी न जलाएं.
सोते समय अंगीठी बुझा दें.
कमरे में हवा का रास्ता खुला रखें.
बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें.
किसी भी परेशानी पर तुरंत बाहर निकलें.






