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उत्तराखंड

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का बड़ा फैसला: रील और वीडियो के चक्कर में वन्यजीवों की सुरक्षा से समझौता नहीं

उत्तराखंड के नैनीताल में स्थित कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) में हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक जाते हैं और जंगल सफारी के जरिए जंगल के अंदर मौजूद हिरण, हाथी, अलग-अलग पक्षियों और बाघ देखने का अनुभव करते हैं. इस दौरान लोग अपने इस जबरदस्त एक्सपीरियंस को अपने मोबाइल के कैमरे में कैद करते हैं और वीडियो बनाते हैं, लेकिन अब पर्यटक सफारी के दौरान मोबाइल अपने साथ नहीं ले जा पाएंगे.

हालांकि, प्रकृति और वन्यजीवों की फोटोग्राफी करने वाले पर्यटकों को DSLR जैसे प्रोफेशनल कैमरे ले जाने की इजाजत रहेगी, ताकि वह बिना शोर-शराबे के अपने अनुभव को कैमरे में कैद कर सकें. दरअसल, प्रशासन की ओर से ये फैसला सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद लिया गया है, जिसमें वन्यजीवों के प्राकृतिक घर में इंसानों की दखलअंदाजी कम करने के निर्देश दिए गए हैं.

नई गाइडलाइन की जा रही तैयार

पार्क के डिप्टी डायरेक्टर राहुल मिश्रा ने बताया कि कोर्ट के आदेशों को जमीन पर उतारने के लिए नई गाइडलाइन तैयार की जा रही है. इस नई व्यवस्था के चलते जंगल में एंट्री से पहले ही पर्यटकों को अपने मोबाइल फोन गेट पर जमा करने होंगे. यह नियम सिर्फ सैलानियों पर नहीं, बल्कि रजिस्टर्ड टूर गाइड, जिप्सी ड्राइवर, नेचरलिस्ट और यहां तक कि कोर जोन में मौजूद होटल और लॉज के कर्मचारियों पर भी लागू होगा. यानी कोई भी अपना फोन अपने साथ नहीं ले जा पाएगा. इसके साथ ही नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

जीवों की सुरक्षा सबसे बड़ी वजह

इस सख्त फैसले के पीछे वन्यजीवों की सुरक्षा सबसे बड़ी वजह है. वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट और एक्सपीरियंस नेचर राइड्स का कहना है कि मोबाइल फोन जंगल में कई तरह की परेशानियां पैदा कर रहे थे. फोटो और वीडियो लेने की होड़ में लोग जानवरों के बहुत करीब पहुंच जाते थे, जिससे वह घबरा जाते हैं और कई बार आक्रामक भी हो जाते हैं.

इसके अलावा, मोबाइल नेटवर्क के जरिए जानवरों की लोकेशन एक-दूसरे को बताई जाती थी. नतीजा यह होता था कि एक ही जगह पर कई जिप्सियां जमा हो जाती थीं. वहीं, रील और सेल्फी बनाने की सनक में लोग अपनी जान के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल रहे थे. यह नया आदेश कॉर्बेट के सभी प्रमुख क्षेत्रों में लागू होगा. इनमें ढिकाला, बिजरानी, झिरना, गर्जिया, सर्पदुली, गैरल, सुल्तान, सोनानदी, पाखरो और सितावनी जैसे डे-सफारी और नाइट-स्टे वाले इलाके शामिल हैं.

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