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मध्यप्रदेश

कैदियों के हाथों से सजेगा नर्मदा का तट: जेल में बने पत्तों के द्रोण से होगा महा-दीपदान, श्रद्धालुओं को मिलेगा मुफ्त

नर्मदापुरम: केंद्रीय जेल खंड-ब के कैदी जेल परिसर में मौजूद बरगद, पीपल सहित अन्य पेड़ के पत्तों से दोने का निर्माण करने में जुटे हैं. इनका उपयोग मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी मां नर्मदा के प्राकट्योत्सव पर 25 जनवरी को किया जाएगा. इन दोने को नर्मदापुरम के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं को दीपदान के लिए निःशुल्क वितरित किया जाना है. इसका उद्देश्य जेल में बंद कैदियों को सकारात्मकता की ओर बढ़ावा देना और मां नर्मदा को प्रदूषण से मुक्त एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ावा देना है.

प्लास्टिक का उपयोग कम करने के लिए बना रहे पत्ते के दोने

असिस्टेंट जेलर ऋतुराज सिंह ने बताया कि “हमने सामान्यतः यह देखा है कि नर्मदा जी में दीपदान के लिए कागज के या पॉलीथीन दोनों का उपयोग अभी तक हो रहा था. जिसके कारण पॉल्यूशन भी होता है और इसकी वजह से हमारे आसपास के क्षेत्र में पॉलिथीन की मात्रा भी बढ़ी है. इसको ध्यान में रखकर जेल परिसर में पत्ते के दोने बनाए जा रहे हैं, जिससे प्लास्टिक का उपयोग कम हो सके.

नर्मदा जन्मोत्सव पर वितरित किए जाएंगे दोने

ऋतुराज सिंह ने बताया कि हमारे जेल परिसर में काफी बड़े-बड़े पेड़ हैं. जिनके पत्ते भी बड़े होते हैं. इनका उपयोग कर पिछले 1 सप्ताह से हमारे बंदी रोज दोने बना रहे हैं. हमारा उद्देश्य है कि नर्मदा जन्मोत्सव में 5 हजार पत्ते के दोने बनाकर विभिन्न घाटों पर वितरित करना है और पर्यावरण संरक्षण में जेल का सहयोग देना है.” उन्होंने बताया कि “हमारे यहां वर्तमान में 20 से 25 बंदी दोने बनाने का कार्य कर रहे हैं. इसके अलावा हमारे कैदियों ने आटे के दीपक भी बनाए हैं, जिनकी संख्या लगभग 50 हजार है. वह दीए भी 25 तारीख को विभिन्न घाटों पर वितरित करेंगे.”

कैदियों को सकारात्मक रखना जरूरी

असिस्टेंट जेलर ऋतुराज सिंह ने बताया कि “जेल में बंदी को मानसिक रूप से सकारात्मक रखना सबसे महत्वपूर्ण काम होता है. इसके लिए बंदी को व्यस्त रखना आवश्यक है. इसी व्यस्तता को बढ़ाने के लिए जेल में विभिन्न प्रकार के सकारात्मक कार्य कराए जाते हैं. बंदी अपनी मर्जी से भी इन कामों को करने के लिए सामने आते हैं. जिससे वे सकारात्मक सोच के साथ स्वस्थ रहकर जेल में सहयोग देते हैं.”

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