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धार्मिक

Ramayan Katha: जब भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को दिया मृत्यु दंड, भक्त पर चलाया ब्रह्मास्त्र; जानें फिर क्या हुआ चमत्कार

हनुमान जी भगवान शिव के रुद्रावतार हैं. उनका जन्म भगवान श्रीराम के युग यानी त्रेतायुग में हुआ है. हनुमान जी को अमरता का वरदान प्राप्त वो आज भी इस धरती पर वास कर रहे हैं. हनुमान जी भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं. रामायण में दोनों की बहुत सी कहानियां मिलती हैं, रामायण में एक ऐसा भी प्रसंग है जब स्वंय भगवान श्रीराम ने अपने सबसे प्रिय भक्त हनुमान जी को मृत्यु दंड दे दिया था.

इतना ही भगवान श्रीराम ने हनुमान जी पर ब्रह्मास्त्र तक चला दिया था. रामायण में वर्णित इस कथा को भक्ति की शक्ति और राम नाम की महिमा का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को मृत्यु दंड क्यों दिया था और उसके बाद क्या हुआ? आइए रामायण में वर्णित इस रोचक कथा के बारे में जानते हैं.

रामायण की कथा के अनुसार…

रामायण की कथा के अनुसार, रावण के अंत के बाद अयोध्या वापस आकर भगवान श्रीराम ने राजपाट संभाल लिया था. एक बार उनके दरबार में कई महान ऋिषि और मुनि आए हुए थे. उसी समय नारद जी ने एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी, जिसने भगवान और भक्त यानी श्रीराम और हनुमान जी को एक दूसरे के खिलाफ खड़ा कर दिया.

नारद जी ने हनुमान जी के पास जाकर उनको सभी ऋषियों का आदर-सत्कार करने की सलाह दी, लेकिन गुरु विश्वामित्र को छोड़ देने के लिए कहा. नारद जी ने कहा कि विश्वामित्र जन्म से ब्राह्मण नहीं, बल्कि एक क्षत्रिय राजा थे. हनुमान जी ने नारद की बात मानी और सभी का अभिवादन किया, लेकिन विश्वामित्र को छोड़ दिया.

हनुमान जी के लिए मृत्यु दंड की मांग

शुरु में तो इस बात से विश्वामित्र जी को कोई फर्क न पड़ा, लेकिन फिर नारद जी ने उनको भड़काना प्रारंभ कर दिया. नारद जी ने इसे एक महान ऋषि का अपमान बताया. फिर विश्वामित्र क्रोधित होकर श्रीराम के पास पहुंचे और हनुमान जी को उनकी धृष्टता के लिए मृत्यु दंड देने के मांग कर दी. विश्वामित्र ऋषि के साथ-साथ भगवान श्रीराम के गुरु भी थे. इसलिए भगवान को गुरु की आज्ञा का पालन करना पड़ा.

इसके बाद हनुमान जी को सजा देने के लिए एक मैदान में ले जाया गया. वहां बजरंगबली बिना किसी भय के जमीन पर बैठ गए और अपने प्रभु का नाम जप करने लगे. श्रीराम ने हनुमान जी पर एक के बाद एक कई बाण चलाए, लेकिन वो सभी हनुमान जी के पास पहुंचते ही बेअसर हो गए. अंत में श्रीराम को गुरु की आज्ञा का पालन करने के लिए अपने भक्त पर ब्रह्मास्त्र चलाना पड़ा.

भक्ति से ब्रह्मास्त्र भी हुआ परास्त

हालांकि, राम नाम की शक्ति के आगे ब्रह्मास्त्र भी टिक नहीं पाया और हनुमान जी के पास जाकर वापस लौट आया. ये चमत्कार देखकर नारद जी और विश्वामित्र दोनों चौंक गए. फिर नारद जी ने अपनी भूल स्वीकार करते हुए ऋषि विश्वामित्र को सारी सच्चाई बता दी. तब जाकर विश्वामित्र का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने श्रीराम को प्रतिज्ञा से मुक्त कर दिया. इस तरह से हनुमान जी की भक्ति जीत गई.

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