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मध्यप्रदेश

सिंहस्थ से पहले MP में बड़ा बदलाव: 3D प्रिंटिंग तकनीक से रातों-रात खड़ी होंगी इमारतें, IIT मद्रास करेगा मदद

भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी भवन और कार्यालय अब आधुनिक अत्याधुनिक तकनीकी से बनाए जाएंगे. लोक निर्माण विभाग 3D प्रिंटिंग आधारित निर्माण प्रणाली को अपनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है. इस नई पहल के तहत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास लोक निर्माण विभाग को तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा. इसका उद्देश्य कम समय में बेहतर गुणवत्ता के साथ मजबूत और टिकाऊ सरकारी इमारतों का निर्माण करना है.

तकनीक आधारित निर्माण पर जोर

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि “मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशनुसार प्रदेश में निर्माण कार्यों को आधुनिक और फ्यूचर-रेडी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसी क्रम में विभाग के अधिकारीयों के साथ आईआईटी मद्रास का दौरा कर 3D प्रिंटिंग आधारित भवन निर्माण तकनीक का प्रत्यक्ष अवलोकन किया गया है. इस मामले में विशेषज्ञों से भी विस्तृत चर्चा की गई है.

उज्जैन सिंहस्थ में इसी तकनीकी से होंगे निर्माण

लोक निर्माण मंत्री सिंह ने कहा कि 3D प्रिंटिंग तकनीक से भवन निर्माण में गति के साथ-साथ गुणवत्ता में भी बड़ा सुधार होगा. उन्होंने बताया कि वर्ष 2028 में उज्जैन में प्रस्तावित सिंहस्थ कुंभ मेले जैसे बड़े आयोजनों में, जहां सीमित समय में बड़े पैमाने पर निर्माण की आवश्यकता होती है, वहां यह तकनीक अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती है.

क्या है 3D प्रिंटिंग आधारित निर्माण तकनीक

विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 3D प्रिंटिंग, जिसे एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग भी कहा जाता है, यह पारंपरिक निर्माण पद्धतियों से अलग है. इसमें पहले कंप्यूटर पर भवन का डिजिटल डिजाइन तैयार किया जाता है. इसके बाद विशेष मशीनों के माध्यम से कंक्रीट या अन्य निर्माण सामग्री को परत-दर-परत प्रिंट कर संरचना तैयार की जाती है. इस प्रक्रिया में ईंट, शटरिंग और पारंपरिक ढलाई की आवश्यकता बहुत कम हो जाती है.

कम समय में तैयार होंगी संरचनाएं

लोक निर्माण विभाग के अनुसार जहां पारंपरिक निर्माण कार्यों में महीनों का समय लगता है. वहीं 3D प्रिंटिंग तकनीक से कई संरचनाएं कुछ ही दिनों में तैयार की जा सकती है. मौसम, श्रमिकों की उपलब्धता और शटरिंग जैसी बाधाओं का इस तकनीक पर सीमित असर पड़ता है. आपदा प्रभावित क्षेत्रों, आपातकालीन आवास, स्कूल और स्वास्थ्य अवसंरचना जैसे कार्यों में इसका प्रभावी उपयोग किया जा सकेगा.”

पायलट प्रोजेक्ट और विशेष प्रशिक्षण की तैयारी

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस तकनीक को अपनाने के लिए पहले पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे. इसके साथ ही इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. आईआईटी मद्रास और अन्य तकनीकी संस्थानों के साथ समन्वय कर प्रदेश की आवश्यकताओं के अनुसार इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा.

सड़क सुरक्षा और डेटा आधारित तकनीकों पर भी चर्चा

मंत्री सिंह ने बताया कि आईआईटी मद्रास की अध्ययन यात्रा के दौरान सड़क सुरक्षा से जुड़ी नवीन तकनीकों और डेटा ड्रिवन कार्य प्रणालियों का भी अवलोकन किया गया. सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, ब्लैक स्पॉट विश्लेषण और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को लेकर विशेषज्ञों के साथ विस्तार से चर्चा हुई. इस अवसर पर आईआईटी मद्रास के सड़क सुरक्षा प्रभाग के प्रमुख प्रोफेसर वेंकटेश बालासुब्रह्मण्यम और इंजीनियरिंग डिजाइन प्रभाग के प्रमुख प्रोफेसर जयकांथन के साथ उभरती तकनीकों, इंजीनियरिंग नवाचार और सड़क सुरक्षा जैसे विषयों पर सार्थक संवाद हुआ.

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