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मध्यप्रदेश

AI in Engineering: अब भूकंप से नहीं गिरेंगी इमारतें! AI तकनीक से तैयार होगा बिल्डिंग डिजाइन, इंजीनियरों को दी गई ट्रेनिंग

छिंदवाड़ा: भूकंप अगर आ जाए तो मकान से लेकर सब कुछ तहस नहस हो जाता है, लेकिन बिल्डिंग बनाने के पहले ही अगर कुछ तैयारी कर ली जाए तो ये थोड़ी सी तैयारी से हम बड़ी दुर्घटना को कैसे बचा सकते हैं, इसके लिए भूकंप रोधी ट्रेनिंग छिंदवाड़ा में PWD के इंजीनियरों को दी गई.

तीन दिनों तक बताया गया डिजास्टर मैनेजमेंट

छिंदवाड़ा के जिला पंचायत परिसर में तीन दिनों तक आपदा से निपटने के लिए पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों को भोपाल के अधिकारियों ने ट्रेनिंग दी. उन्होंने बताया कि अगर कोई आपदा आती है, तो सबसे पहले जनहानि को कैसे कंट्रोल किया जा सकता है. तैयारी एवं क्षमतावर्धन कार्यक्रम के लिए कार्यपालन यंत्री एसएस ठाकुर ने बताया कि “नोडल अधिकारी जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के समन्वय से प्रशिक्षण में प्रतिभागी भूकंप आपदा प्रबंधन, बिल्डिंग कोड्स, फायर सेफ्टी कोड, स्ट्रक्चर एनालिसिस सॉफ्टवेयर आदि के विषय में प्रशिक्षण दिया गया.”

भूकंप से बचाने जे लिए बिल्डिंग का निर्माण कैसे करें

आपदा प्रबंधन संस्थान के अधिकारी तुषार गोलाइत ने बताया कि “जब भूकंप आता है, तो सबसे पहले कोई भी बिल्डिंग को नुकसान पहुंचता है. अगर उन बिल्डिंगों का निर्माण भूकंपरोधी तरीके से किया जाए, तो बड़े नुकसान को टाला जा सकता है. इसीलिए पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों के लिए विशेष तौर पर यह प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा गया था. इसमें बिल्डिंग निर्माण के पहले स्ट्रक्चर तैयार करना और लोहे के सरिए को बांधने की तकनीक से लेकर जमीन के समतलीकरण का विशेष ध्यान देने की बात कही गई थी. इन सभी बातों को लेकर तीन दिनों तक लगातार प्रशिक्षण दिया गया.

एआई तकनीक का सहारा और क्विक रेस्क़ुए कैसे करें

पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों को स्पेशलिस्ट अधिकारियों ने बताया आजकल एआई तकनीक का सहारा लेकर चीजें आसान की जा सकती है. बिल्डिंग निर्माण में भी एआई तकनीक का विशेष सहयोग लेकर डिजाइन और उपयोग किये जाने वाले मेटेरियल को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है. उसके साथ ही SDRF की टीम को बाढ़ आने और आग लगने जैसे हालातों पर कैसे काबू पाना जैसे तरीकों पर भी क्विक रिस्पॉन्स कैसे किया जाए, इसको लेकर भी ट्रेनिंग दी गई.

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