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Palamu Police Poster War: नक्सलियों के बाद अब सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ पलामू पुलिस का ‘पोस्टर वॉर’

पलामू: सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ पुलिस ने पोस्टर बार शुरू किया है. एक समय में नक्सलियों के खिलाफ पोस्टर वॉर की शुरुआत की गई थी. नक्सलियों के खिलाफ मिली सफलता के बाद पुलिस ने सड़क हादसा, महिलाओं के खिलाफ अपराध, अफीम को खेती, बाल विवाह एवं विभिन्न समाजिक कुरीति के खिलाफ लड़ाई शुरू की है. इस लड़ाई में पुलिस पोस्टर का इस्तेमाल कर रही है.

पलामू पुलिस, पोस्टर वॉर को महत्वपूर्ण मान रही है एवं आम ग्रामीणों को इससे जोड़ रही है. पोस्टर के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है और ग्रामीणों को कानूनी जानकारी एवं सलाह दी जा रही है. पलामू के सभी थाना प्रभारी स्कूली बच्चों से लेकर आम ग्रामीणों को एक-एक बिंदु को जानकारी दे रहे हैं. इस दौरान पुलिस अधिकारियों के नंबर को भी साझा कर रही है ताकि विपरीत परिस्थितियों में ग्रामीण मदद मांग सके. पुलिस के पोस्टर का कई इलाकों में असर भी नजर आने लगा है.

पोस्टर वॉर के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल

पुलिस ग्रामीण इलाकों में पोस्टर को चिपका रही है. जबकि आधुनिक तकनीक को भी अपना रही है. पोस्टर का डिजिटल स्वरूप सोशल मीडिया में शेयर किया जा रहा है ताकि विभिन्न सोशल मीडिया ग्रुप के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके. पुलिस इस लड़ाई में सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल कर रही है. थाना प्रभारी एवं विभिन्न पुलिस अधिकारी, ग्रामीण से जुड़े कई सोशल मीडिया ग्रुप में जुड़ रहे हैं एवं पोस्टर संबंधी जानकारी को शेयर कर रहे हैं. पुलिस पोस्ट के माध्यम से विभिन्न परीक्षा में बैठने वाले छात्रों को सलाह भी दे रही है और इसके गाइडलाइन के बारे में जानकारी भी दे रही है.

केस स्टडी 1

पलामू पुलिस ने पोस्टर के माध्यम से सड़क दुर्घटना में जख्मी व्यक्ति को मदद पहुंचाने वाले को राहवीर योजना की जानकारी दी थी एवं नंबर को साझा किया था. शुक्रवार को हुसैनाबाद के इलाके में हुए सड़क हादसे में स्थानीय ग्रामीणों ने जख्मी को अस्पताल पहुंचाया था और पूरे मामले की जानकारी पलामू एसपी रीष्मा रमेशन को दी थी. ग्रामीणों ने पलामू एसपी को बताया था कि पोस्ट के माध्यम से राहवीर योजना की जानकारी मिली थी. सड़क हादसे में जख्मी व्यक्ति को मदद पहुंचाने पर राहवीर योजना है. मदद करने वालों को 25 हजार रुपये तक का इनाम मिल सकता है.

केस स्टडी 2

पलामू के मनातू का इलाका अफीम की खेती के लिए चर्चित है. अफीम की खेती के खिलाफ जागरूकता अभियान के दौरान पुलिस मनातू के विभिन्न इलाकों में पहुंची थी एवं ग्रामीणों के बीच पोस्टर को बांटा था. ग्रामीणों ने पोस्टर के माध्यम से मिली कानूनी जानकारी के बाद मनातू के कुसहा में अफीम की फसल को नष्ट कर दिया था और पुलिस को इससे संबंधित जानकारी साझा की है.

पलामू पुलिस के द्वारा पोस्टर कैंपेन शुरू किया गया है. पोस्टर कैंपेन का उद्देश्य है कि समाज के अंतिम लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके और उनकी समस्याओं को सुना जा सके. विभिन्न सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी पोस्टर कैंपेन सफल हो रहा है. सड़क दुर्घटना में लोग मदद भी पहुंचा रहे हैं. आज के दौर में अधिकतर लोग सोशल मीडिया से जुड़े हुए हैं. यही वजह है कि पोस्ट को विभिन्न सोशल मीडिया ग्रुप में शेयर किया जा रहा है. दो-तीन प्रतिशत भी लोग जागरूक हो जाए तो पुलिस यह समझेगी कि उनका अभियान सफल हो रहा है: रीष्मा रमेशन, एसपी

पलामू के इलाके में सामाजिक कुरीति एवं बाल विवाह बड़ी चुनौती

पलामू के इलाके में सड़क हादसा, सामाजिक कुरीति एवं बाल विवाह को रोकना एक बड़ी चुनौती है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, पलामू के इलाके में 35 प्रतिशत शादियां बाल विवाह के दायरे में है. महिलाओं के खिलाफ सामाजिक अपराध भी एक बड़ी चुनौती है, जो अंधविश्वास एवं घरेलू हिंसा से जुड़ा हुआ है.

पलामू के इलाके में हर महीने विभिन्न सड़क हादसों में 15 से 18 लोगों की मौत हो जाती है. 2023-24 में पलामू में हुए विभिन्न सड़क हादसों में 223 लोगों की मौत हुई थी. 2025 में यह आंकड़ा 160 के करीब था. कई ऐसे सड़क हादसे हैं, जिसमें लोगों को मदद पहुंचाने में घंटों लग जाते हैं. इन सभी को ध्यान में रखकर पुलिस ने पोस्टर वॉर की शुरूआत की है ताकि ग्रामीणों को जागरूक करने के साथ विपरीत परिस्थितियों में मदद पहुंचाई जा सके.

नक्सलियों के खिलाफ पोस्टर वॉर हुई थी सफल

नक्सलियों के खिलाफ पुलिस ने 2013 के बाद एक मानसिक लड़ाई शुरू की थी. इस लड़ाई में सबसे पहले आठ विभिन्न भाषाओं में, पलामू की इलाके में पोस्टर तैयार किए गए थे और ग्रामीण इलाकों में चिपकाया गया था. 2018-19 तक बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर इनामी नक्सलियों की जानकारी को साझा किया गया और उनके नीतियों के बारे में भी ग्रामीणों को जानकारी दी गई थी. नक्सलियों की नीति और उनसे होने वाले नुकसान के बारे में पुलिस ने पोस्टर के माध्यम से ही ग्रामीणों को बताया था. पोस्टर वॉर के कारण ही नक्सलियों की पकड़ कई ग्रामीण इलाकों में कमजोर हो गई थी और लोग मुख्यधारा से जुड़ने लगे थे.

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