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दिल्ली/NCR

दिल्ली में जनजातीय कला का जलवा! 12 दिनों में बिकीं ₹1.25 करोड़ की कलाकृतियाँ; ट्राइब्स आर्ट फेस्ट का शानदार समापन

देश की राजधानी नई दिल्ली में 12 दिवसीय ट्राइब्स मंत्रालय की तरफ से आयोजित ट्राइब्स आर्ट फेस्ट 2026 का समापन हो चुका है. यह समापन कार्यक्रम त्रावणकोर पैलेस नई दिल्ली में आयोजित किया गया. 12 दिनों तक चले इस उत्सव में देशभर के जनजातीय कलाकारों, समकालीन कलाकारों, सांस्कृतिक समूहों, विद्यार्थियों और कला प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.

कार्यक्रम की प्रदर्शनी में 10,000 से अधिक दर्शकों ने हिस्सा लिया, जो भारत की समृद्ध जनजातीय कला परंपराओं के प्रति बढ़ती सार्वजनिक रुचि और सराहना को दर्शाता है. यह महोत्सव कला सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जनभागीदारी का एक सशक्त मंच बना, जिसमें 30 से अधिक जनजातीय कला रूप, 70 जनजातीय कलाकार और 1,000 से अधिक कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गईं.

महोत्सव में हैंड्स-ऑन कार्यशालाएं, लाइव आर्ट डेमोंस्ट्रेशन और इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किए गए, जिससे आगंतुकों को जनजातीय कला और परंपराओं को करीब से समझने और उनसे जुड़ने का अवसर मिला. देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए जनजातीय समूहों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक संगीत और नृत्य ने भी कार्यक्रम को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाया.

कौन-कौन रहा कार्यक्रम में मौजूद?

समापन समारोह की शुरुआत गणमान्य अतिथियों के आगमन और प्रदर्शनी के अवलोकन से हुई, जिसके बाद राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की प्रस्तुति दी गई. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जुआल ओराम, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री उपस्थित रहेण. केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित जनजातीय कार्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे.

कार्यक्रम में क्या बोले अतिथि?

ट्राइब्स मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा ने कहा, यह वास्तव में एक सफल प्रयोग साबित हुआ है. आर्ट गैलरी इकोसिस्टम, कॉरपोरेट खरीदारों और संस्थागत साझेदारियों को एक साथ लाकर हमने ऐसा मंच तैयार किया है जो न केवल जनजातीय कला को प्रदर्शित करता है, बल्कि कलाकारों की आजीविका को भी सीधे सशक्त बनाता है.

इस अवसर पर मंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि जनजातीय कला, जनजातीय समुदायों के प्रकृति, संस्कृति और परंपराओं के साथ गहरे और स्वाभाविक संबंध को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि यह कलात्मक अभिव्यक्तियाँ केवल सौंदर्यात्मक रचनाएं नहीं हैं, बल्कि जनजातीय समाज के दैनिक जीवन, विश्वासों और सामूहिक स्मृतियों से गहराई से जुड़ी हुई हैं.

इस कार्यक्रम ने सांस्कृतिक दूरियों को किया कम-रेखा गुप्ता

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जनजातीय कार्य मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहलें देश के विभिन्न हिस्सों के कलाकारों को राष्ट्रीय राजधानी में अपनी कला और संस्कृति प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम भारत की जीवंत परंपराओं और विविध सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे मंच भारत के जनजातीय समुदायों की रचनात्मकता, कला और सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने के साथ-साथ नागरिकों और आगंतुकों को इन कला रूपों को करीब से अनुभव करने का अवसर भी प्रदान करते हैं. इस तरह के मंच कलाकारों को सीधे दर्शकों, कला प्रेमियों और संग्राहकों से जोड़कर सांस्कृतिक दूरियों को कम करने में मदद करते हैं.

1 करोड़ से ज्यादा की हुई बिक्री

दिल्ली में 12 दिनों तक चले इस महोत्सव ने जनजातीय कलाकारों और उनकी कला को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की. इस दौरान 800 से अधिक कलाकृतियां बिकने के साथ ₹1.25 करोड़ से अधिक की प्रत्यक्ष बिक्री दर्ज की गई. इससे न केवल कलाकारों को आर्थिक रूप से सशक्त समर्थन मिला, बल्कि समकालीन कला जगत में उनकी पहचान और दृश्यता भी मजबूत हुई.

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