NEET पेपर लीक विवाद के बाद NTA का बड़ा फैसला: नए मुख्यालय में तैनात होंगे CISF जवान

नई दिल्ली: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के पेपर लीक और गंभीर प्रशासनिक खामियों को लेकर उपजे भारी विवाद के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह अभेद्य बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब NTA के नए कार्यालय में संचालन शुरू होने के साथ ही सुरक्षा का जिम्मा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों के हाथों में सौंपा जाएगा।
एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि राजधानी के मिंटो रोड स्थित ‘गवर्नमेंट ऑफ इंडिया प्रेस’ की इमारत में 55,000 वर्गफीट से अधिक क्षेत्र में फैला एक अत्याधुनिक ऑफिस कॉम्प्लेक्स तैयार किया गया है। NTA को इस इमारत की पूरी पांचवीं मंजिल के साथ-साथ चौथी और छठी मंजिल का कुछ भाग आवंटित किया गया है। एजेंसी से जुड़े सभी गोपनीय और अति-संवेदनशील कामकाज को पिछले एक महीने के भीतर इस नई इमारत में सफलतापूर्वक स्थानांतरित कर दिया गया है।
🔍 गोपनीय जोन में आवाजाही पर कड़ी निगरानी: गृह मंत्रालय ने दी सुरक्षा को हरी झंडी
नई इमारत में सुरक्षा के कड़े इंतजाम:
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आधिकारिक सुरक्षा मंजूरी: समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) के अनुसार, गृह मंत्रालय ने इस नए कार्यालय परिसर की सुरक्षा के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की स्थायी तैनाती को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।
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संवेदनशील जोन की पहचान: नई इमारत के भीतर विशेष ‘गोपनीय जोन’ (Confidential Zones) चिह्नित किए गए हैं, जहां किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा।
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कड़ी निगरानी व्यवस्था: इन संवेदनशील क्षेत्रों में अधिकारियों व कर्मचारियों की दैनिक आवाजाही और परीक्षा संचालन से जुड़े सभी गोपनीय कार्यों पर 24 घंटे तकनीकी व भौतिक निगरानी रखी जाएगी, ताकि सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक न हो।
⚖️ क्यों उठाया गया यह कड़ा कदम? NEET विवाद और शिक्षा मंत्रालय में हुए बदलाव
सुरक्षा सुधारों की पृष्ठभूमि:
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देशव्यापी छात्र आक्रोश: यह कड़ा सुरक्षात्मक फैसला इस वर्ष की शुरुआत में NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक होने और देशभर में लाखों विद्यार्थियों के व्यापक विरोध-प्रदर्शन के बाद लिया गया है।
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राजनीतिक जवाबदेही: छात्रों के भारी आक्रोश और प्रशासनिक दबाव के बीच तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
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नीलेकणि टास्क फोर्स का गठन: मंत्री के इस्तीफे के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भविष्य में सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के निष्पक्ष व पारदर्शी संचालन हेतु ठोस सुधार सुझाने के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा की थी, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
🕵️♂️ CBI चार्जशीट में खुलासा: 3 विषय विशेषज्ञ थे पेपर लीक के मास्टरमाइंड
जांच में उजागर हुई गंभीर खामियां:
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बिना चेकिंग के आते-जाते थे एक्सपर्ट्स: पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अपनी आधिकारिक चार्जशीट में तीन प्रमुख विषय विशेषज्ञों (Subject Experts) को इस पूरे षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार बताया है।
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सुरक्षा जांच का अभाव: चार्जशीट के अनुसार, जब ये विशेषज्ञ NTA के पुराने गोपनीय विभाग में आते-जाते थे, तो उनकी कोई सघन तलाशी या जांच-पड़ताल नहीं की जाती थी। इसी बुनियादी सुरक्षा चूक का फायदा उठाकर वे परीक्षा प्रश्नपत्र से सवालों को छोटी पर्चियों पर लिखकर बाहर ले जाते थे।
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2017 में हुआ था गठन: निष्पक्ष, पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित कराने के ध्येय से वर्ष 2017 में स्थापित की गई NTA अब तक ओखला स्थित कार्यालय से संचालित हो रही थी, जिसे अब नई सुरक्षा नीति के तहत पूरी तरह अपग्रेड कर दिया गया है।





