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Chardham Yatra 2026: अक्षय तृतीया के शुभ योग में शुरू हुई चारधाम यात्रा; जानें केदारनाथ-बद्रीनाथ के कपाट खुलने की तारीख और विशेष महत्व

Chardham Yatra 2026 Start: उत्तराखंड की पावन वादियों में एक बार फिर भक्ति, आस्था और उत्साह की गूंज सुनाई देने लगी है. साल 2026 की बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा का शुभारंभ 19 अप्रैल से विधिवत रूप से हो गया है. अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए. इस बार कपाट उद्घाटन का विशेष महत्व इसलिए भी बढ़ गया, क्योंकि यह शुभ कार्य कृतिका नक्षत्र और आयुष्मान योग जैसे बहुत ही मंगलकारी संयोग में संपन्न हुआ. आइए ज्योतिष शास्त्र के नजरिए से इन शुभ योगों का महत्व जानते हैं जिसमें चारधाम की पवित्र यात्रा का आगाज हुआ है.

क्या होता है कृतिका नक्षत्र?

वैदिक ज्योतिष में कृतिका नक्षत्र को बेहद प्रभावशाली और पवित्र नक्षत्र माना गया है. यह नक्षत्र अग्नि तत्व से जुड़ा होता है और इसका स्वामी सूर्य माना जाता है. कृतिका नक्षत्र का अर्थ है काटने वाला यानी नकारात्मकता, पाप और अज्ञान को समाप्त करने वाला. मान्यता है कि इस नक्षत्र में किए गए धार्मिक कार्य, तप, दान और पूजा विशेष फलदायी होते हैं. इसी कारण जब किसी बड़े धार्मिक आयोजन या मंदिर के कपाट इसी नक्षत्र में खोले जाते हैं, तो इसे आध्यात्मिक रूप से बहुत ही शुभ संकेत माना जाता है. यह संयोग भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शुद्धता और नई शुरुआत का प्रतीक बनता है.

आयुष्मान योग का महत्व

कृतिका नक्षत्र के साथ-साथ जब कपाट को खोला गया उस आयुष्मान योग भी बना हुआ था, जो कि पंचांग के अनुसार बहुत ही शुभ योगों में गिना जाता है. आयुष्मान योग का अर्थ होता है दीर्घायु और स्वस्थ जीवन प्रदान करने वाला. इस योग में किए गए कार्य लंबे समय तक फल देने वाले और सफल माने जाते हैं. धार्मिक दृष्टि से यह योग जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति लाने वाला माना जाता है. ऐसे में चारधाम यात्रा की शुरुआत इस योग में होना श्रद्धालुओं के लिए विशेष आशीर्वाद के रूप में देखा जा रहा है.

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