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मध्यप्रदेश

Kanha National Park: कान्हा में 5 बाघों की मौत से हड़कंप; न शिकारी, न आपसी संघर्ष, ‘अदृश्य दुश्मन’ बना खतरा

Bhopal News: मध्य प्रदेश के गौरव और ‘टाइगर स्टेट’ की पहचान माने जाने वाले कान्हा टाइगर रिजर्व से आई एक हृदयविदारक घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है. जंगल में दहाड़ने वाली एक बाघिन टी-141 और उसके चार मासूम शावकों की मौत ने न सिर्फ वन विभाग, बल्कि वन्यजीव प्रेमियों को भी गहरे सदमे में डाल दिया है. यह त्रासदी किसी शिकारी या संघर्ष का नहीं, बल्कि एक अदृश्य और खतरनाक वायरस कैनाइन डिस्टेंपर (सीडीवी) का परिणाम है.

कुछ ही दिन पहले तक यह बाघिन अपने चार शावकों के साथ जंगल में सुरक्षित जीवन जी रही थी, लेकिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. गश्ती दल ने जब उन्हें कमजोर और बीमार हालत में देखा तो तुरंत रेस्क्यू कर उपचार शुरू किया गया. वन्य चिकित्सकों ने पूरी कोशिश की, लेकिन वायरस ने उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को पूरी तरह तोड़ दिया. एक-एक कर सभी पांचों की मौत हो गई. जांच में इनकी मौत का कारण केनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) पाया गया है. यही वायरस 2018 में गुजरात के गिर नेशनल पार्क में 34 शेरों की मौत का कारण बना था. यह जानलेवा वायरस कुत्तों से जानवरों में फैलता है.

कुत्तों से जंगल तक पहुंचा खतरा

जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख वेटरनरी यूनिवर्सिटी की जांच में सीडीवी की पुष्टि के बाद वन विभाग ने मामले की जानकारी नेशनल वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट, देहरादून और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) को भेज दी है. जांच में सामने आया कि यह घातक वायरस आमतौर पर पालतू और आवारा कुत्तों में पाया जाता है. यही संक्रमण अब जंगल तक पहुंच गया है, जो बाघों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है. इस खुलासे ने वन विभाग की चिंता कई गुना बढ़ा दी है.

जंगल में हाई अलर्ट और सख्त पहरा

संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कान्हा प्रबंधन के द्वारा जहां बाघिन और शावकों के शव मिले प्रभावित क्षेत्र के करीब 2 वर्ग किलोमीटर इलाके को पूरी तरह सील कर नो-गो जोन घोषित कर दिया गया है. जल स्रोतों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और संभावित संक्रमण रोकने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं.

कान्हा से लगे 8 गांवों में कुत्तों की पहचान कर टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है. अब तक 103 कुत्तों की पहचान कर 94 को टीका लगाया जा चुका है. क्षेत्र में 40 ट्रैप कैमरों से निगरानी की जा रही है, ताकि संक्रमण को जंगल की सीमा पर ही रोका जा सके. सरही क्षेत्र को पर्यटन के लिए अस्थायी रूप से बैन कर दिया गया है. वहीं, वायरस की आशंका को देखते हुए पहले से 84 गांवों में 12,734 पालतू पशुओं और विशेष रूप से 404 से अधिक कुत्तों का टीकाकरण किया गया है.

गिर जैसी त्रासदी का डर

यह घटना 2018 में गुजरात के गिर जंगलों की याद दिलाती है, जहां इसी वायरस ने कई शेरों की जान ले ली थी. इसी खतरे को देखते हुए प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व- पेंच, बांधवगढ़ और पन्ना में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है. जंगल की खामोशी में छिपा खतरा…यह सिर्फ पांच बाघों की मौत नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र के लिए एक चेतावनी है. कान्हा की फिजाओं में अब सन्नाटा और चिंता दोनों है. वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी में जुटी हैं, ताकि इस अदृश्य दुश्मन को रोका जा सके और जंगल के राजा को बचाया जा सके.

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