ब्रेकिंग
Who is Makhanlal Sarkar: कौन हैं 98 वर्षीय माखनलाल सरकार? जिनके सम्मान में पीएम मोदी ने झुकाया सिर औ... Inspirational News: जब महिला पुलिस अधिकारी बनीं 12 साल के नाविक की 'मां'; पतवार छुड़वाकर थमाई किताब,... Wedding Brawl: ‘जूता नहीं चुराने देंगे...’ रस्म के दौरान मंडप में बवाल; दूल्हा-दुल्हन पक्ष के बीच चल... Civic Issues: कानपुर में सीवर की समस्या पर बवाल; छत पर चढ़कर महिला ने दी जान देने की धमकी, प्रशासन मे... Mother's Day 2026: एक हाथ में बंदूक, दूसरे में ममता! मिलिए उन 'Super Cop Moms' से जो अपराधियों और जि... Ujjain News: उज्जैन की कांता गोयल ने पेश की इंसानियत की मिसाल, 350 अनाथ बच्चों को दिया मां का प्यार ... Chandranath Murder Case: यूपी की ओर मुड़ी जांच की आंच; संभल और बदायूं में बंगाल पुलिस की छापेमारी, द... Weather Update: दिल्ली-NCR में फिर यू-टर्न लेगा मौसम; अगले 2 दिन बारिश का अलर्ट, बिहार में ओलावृष्टि... Political Reset: तमिलनाडु में सत्ता का सस्पेंस खत्म! एक्टर विजय कल बनेंगे नए मुख्यमंत्री, जानें शपथ ... Shashi Tharoor News: शशि थरूर के पर्सनैलिटी राइट्स पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; डीपफेक वीडियो ...
मध्यप्रदेश

Inspirational News: जब महिला पुलिस अधिकारी बनीं 12 साल के नाविक की ‘मां’; पतवार छुड़वाकर थमाई किताब, अब स्कूल जाएगा मासूम

Mother’s Day 2026: पतवार… जो लहरों से टकराकर नाव को किनारे लगाती है, लेकिन जबलपुर के बरगी बांध पर यही पतवार एक 12 साल के मासूम का भविष्य डुबो रही थी. जिस उम्र में हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, वहां गरीबी ने अभिषेक को नाव चलाने पर मजबूर कर दिया था. लेकिन महिला सब इंस्पेक्टर की नजर जब इस बाल नाविक पर पड़ी, तो उनका ममतामयी हृदय पसीज गया. उन्होंने न केवल अभिषेक का दाखिला कराया, बल्कि स्कूल फॉर्म पर खुद अभिभावक बनकर हस्ताक्षर भी किए.

आज अभिषेक के हाथों में पतवार नहीं, बल्कि सुनहरे भविष्य की कलम है. समाज में पुलिस के कई चेहरे देखे गए हैं. कहीं पुलिस मुसीबत बनी, तो कहीं रक्षक, लेकिन संस्कारधानी जबलपुर के बरगी से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने न केवल खाकी का मान बढ़ाया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि अगर दिल में इंसानियत हो, तो एक छोटा सा कदम किसी का पूरा भविष्य रोशन कर सकता है.

नाव चलाता दिखा मासूम

यह कहानी शुरू होती है बरगी बांध के विसर्जन घाट से, बरगी चौकी प्रभारी सरिता पटेल गणेश विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही थीं. चारों ओर भीड़ थी, जयकारे लग रहे थे, लेकिन इसी बीच सरिता की नजर एक 12 साल के मासूम बच्चे पर पड़ी, जो बड़ी फुर्ती से नाव (पतवार) चला रहा था. इतनी कम उम्र के बच्चे को खतरनाक लहरों के बीच नाव चलाते देख सरिता चौंक गईं. उन्होंने बच्चे को पास बुलाया और उसकी उम्र और इस काम के पीछे की वजह पूछी.

सब-इंस्पेक्टर सरिता की पसीजा दिल

बच्चे का नाम था अभिषेक उसने जो कहानी सुनाई, उसने सब-इंस्पेक्टर सरिता का दिल झकझोर दिया. अभिषेक ने बताया कि उसने आठवीं तक पढ़ाई की थी, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि वह नौवीं क्लास में दाखिला नहीं ले सका. उसके पिता दिल्ली मजदूरी करने चले गए थे, मां भी काम के सिलसिले में बाहर थी और वह अपनी नानी के पास रह रहा था. स्कूल की फीस, यूनिफॉर्म और किताबों के लिए पैसे नहीं थे, इसलिए पेट पालने के लिए उसने स्कूल बैग छोड़कर नाव की पतवार थाम ली.

अभिभावक के तौर पर किए हस्ताक्षर

अभिषेक की आंखों में पढ़ाई की चमक और चेहरे पर मजबूरी देख सरिता पटेल ने तुरंत फैसला किया कि वे इस बच्चे का बचपन नहीं डूबने देंगी. उन्होंने खुद अभिषेक की पढ़ाई का जिम्मा उठाया. अभिषेक के माता-पिता पास नहीं थे, तो सरिता खुद बरगी नगर के शासकीय स्कूल पहुंचीं. उन्होंने न केवल अभिषेक की फीस भरी, बल्कि स्कूल फॉर्म पर अभिभावक के तौर पर अपने हस्ताक्षर भी किए.

महिला SI ने अपनी जेब से दिए पैसे

सरिता पटेल ने अपनी जेब से अभिषेक के लिए यूनिफॉर्म, जूते और किताबों का प्रबंध किया. खाकी वर्दी वाली मां का सहारा मिलते ही अभिषेक के सपनों को पंख लग गए. शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है. डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर ने कहा था कि शिक्षा उस शेरनी का दूध है जो इसे पिएगा वह दहाड़ेगा. अभिषेक की कहानी इसी बात का प्रमाण है. सरिता पटेल की मदद से अभिषेक ने नौवीं और दसवीं कक्षा में न केवल मेहनत की, बल्कि शानदार अंक भी हासिल किए. आज अभिषेक 11वीं कक्षा का छात्र है और वह अब नाव नहीं चलाता, बल्कि अपनी सुनहरी भविष्य की इबारत लिख रहा है.

सरिता पटेल आज भी जब किसी बच्चे को मुश्किल में देखती हैं, तो उन्हें अपना बचपन याद आ जाता है. आज भी अगर कोई बच्चा चौकी आता है, तो वे उसकी समस्या को सबसे पहले सुनती हैं. अभिषेक जैसे हजारों बच्चे आज भी होटलों में बर्तन साफ कर रहे हैं या सड़कों पर भीख मांग रहे हैं. आर्थिक तंगी उनके सपनों का गला घोंट देती है. सरिता पटेल का यह मानवीय चेहरा समाज को आईना दिखाता है कि यदि हम सक्षम हैं, तो हमें किसी एक बच्चे की जिम्मेदारी जरूर लेनी चाहिए.

लेडी सिंघम सरिता पटेल

पुलिस की यह लेडी सिंघम हमें सिखाती है कि वर्दी सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने के लिए भी है. अभिषेक के हाथों से पतवार छीनकर उसे कलम थमाना, असल मायनों में देशभक्ति और जनसेवा है. आज अभिषेक 14 साल का है ओर पढ़ाई कर रहा है और उसके साथ पढ़ रही है एक उम्मीद कि शिक्षा ही गरीबी के अंधकार को मिटाने का एकमात्र अस्त्र है.

Related Articles

Back to top button