Bird Flu in Maharashtra: महाराष्ट्र के नंदुरबार में बर्ड फ्लू का पहला संदिग्ध ह्यूमन केस; कर्मचारियों की RT-PCR जांच के आदेश

नंदुरबार: महाराष्ट्र में नंदुरबार जिले के नवापुर से एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) के पहले संदिग्ध ह्यूमन केस सामने आए हैं, जिसने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य प्रशासन ने बर्ड फ्लू प्रभावित क्षेत्रों में पक्षियों को मारने (कलिंग) और वायरस रोकथाम के काम में लगे सभी ग्राउंड कर्मचारियों की अनिवार्य RT-PCR जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि नंदुरबार के बर्ड फार्म पर काम करने वाले या पक्षियों को मारने की प्रक्रिया (Culling Process) में शामिल पोल्ट्री कर्मचारियों के 8 सैंपल, एवियन फ्लू की पुख्ता जांच के लिए तत्काल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजे जा रहे हैं।
🧪 पुणे स्थित एनआईवी (NIV) लैब भेजे जाएंगे संदिग्धों के सैंपल: लक्षणों के बिना भी एहतियातन दी जा रही है ‘टैमीफ्लू’ दवा
जिला स्वास्थ्य अधिकारी रविंद्र सोनवणे ने बताया कि ये 8 सैंपल उन लोगों के हैं जो नंदुरबार जिले में संक्रमित पोल्ट्री और दूसरे पक्षियों के सीधे संपर्क में आए थे। गौरतलब है कि नंदुरबार इस समय पूरे महाराष्ट्र राज्य में बर्ड फ्लू से सबसे अधिक प्रभावित जिला बना हुआ है। सोनवणे के अनुसार, “8 लोगों के सैंपल इसलिए लिए गए हैं क्योंकि वे पक्षियों के लगातार संपर्क में थे या उन्हें डिस्पोज करने की प्रक्रिया का हिस्सा थे। हालांकि, राहत की बात यह है कि वर्तमान में उनमें एवियन फ्लू का किसी तरह का कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखा है। इन सैंपलों को, जिनमें नाक और गले के स्वैब भी शामिल हैं, पुणे स्थित NIV लैब भेजा जा रहा है।” उन्होंने आगे बताया कि एहतियात के तौर पर इन सभी फील्ड कर्मचारियों को एंटी-वायरल दवा ‘टैमीफ्लू’ (Tamiflu) की गोलियां दी जा रही हैं।
🏥 दो स्वास्थ्य कर्मचारियों में दिखे थे फ्लू के लक्षण: अस्पताल में भर्ती कराने के बाद किया गया डिस्चार्ज, निगरानी जारी
स्वास्थ्य अधिकारी सोनवणे ने स्पष्ट किया कि अभी तक किसी भी नियमित सरकारी कार्यालय कर्मचारी का कोई सैंपल नहीं भेजा गया है। इससे पहले जिले में दो संदिग्ध मामले पशु चिकित्सा विभाग के फील्ड कर्मचारियों अशोक लालसिंग पवार (49) और इंदस गोवल्या वाल्वी (36) से जुड़े पाए गए थे। ये दोनों ही कर्मचारी ग्राउंड जीरो पर बर्ड फ्लू की रोकथाम के उपायों में सीधे तौर पर शामिल थे। पवार में 2 मई को फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखे थे और उन्हें 4 मई को नवापुर सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि वाल्वी में 3 मई को लक्षण दिखने के बाद 5 मई को अस्पताल में आइसोलेट किया गया था।
🥚 17 दिनों के भीतर मारी गईं 4 लाख से अधिक मुर्गियां: संक्रमण फैलने से रोकने के लिए 25 लाख अंडे और पोल्ट्री फीड नष्ट
नवापुर सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. कीर्ति वासावे का कहना है कि दोनों मरीजों में शुरुआती दौर के बेहद हल्के लक्षण थे, जिनमें तेज बुखार, गले में खराश, नाक बहना और बदन दर्द शामिल था। उन्हें एहतियातन डॉक्टरों की देखरेख में अस्पताल में भर्ती किया गया था, हालांकि रिकवरी के बाद दोनों को अस्पताल से सुरक्षित डिस्चार्ज कर दिया गया है। राहत की बात यह है कि महाराष्ट्र में अब तक एवियन इन्फ्लूएंजा की वजह से किसी भी इंसान की मौत का कोई पुख्ता मामला सामने नहीं आया है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 1 मई से 17 मई के बीच एक्टिव रोकथाम टीमों (Containment Teams) ने क्षेत्र के 15 संक्रमित पोल्ट्री फार्मों में रिकॉर्ड 4,06,682 मुर्गियों को वैज्ञानिक तरीके से मार दिया है, जबकि अकेले नवापुर में 24.9 लाख अंडे और 5.48 लाख किलोग्राम से अधिक पोल्ट्री फ़ीड (दाना) को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है ताकि संक्रमण आगे न फैले।






