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मध्यप्रदेश

Vegetable Price Hike: मालवा-निमाड़ में सब्जियों के दाम आसमान पर; पेट्रोल-डीजल की महंगाई ने बिगाड़ा आम आदमी का बजट

इंदौर: पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर अब आम आदमी की रसोई पर दिखने लगा है। क्षेत्र के कई जिलों में हरी सब्जियों के दाम तेजी से बढ़े हैं। परिवहन लागत में वृद्धि, भीषण गर्मी और मंडियों में हरी सब्जियों की कम आवक के कारण टमाटर, लौकी, गिलकी, हरी मिर्च और नींबू जैसी रोजमर्रा की सब्जियां महंगी हो गई हैं। इसका सबसे अधिक प्रभाव मंदसौर, खरगोन और उज्जैन जैसे जिलों में देखने को मिल रहा है।

🥦 सब्जियों की कीमतों में 20 प्रतिशत तक का उछाल

इंदौर और आसपास की मंडियों में सब्जियों के भावों में अचानक तेजी आई है। मंदसौर के व्यापारियों का कहना है कि परिवहन खर्च बढ़ने से हरी सब्जियों के दामों में 5 से 20 रुपये प्रति किलो तक की वृद्धि हुई है। वर्तमान में टमाटर 70 से 80 रुपये किलो और गिलकी 60 से 70 रुपये किलो तक बिक रही है। वहीं, पालक और धनिया जैसी पत्तेदार सब्जियों के भाव लगभग दोगुने हो गए हैं।

🚚 स्थानीय आवक में कमी बनी बड़ी वजह

क्षेत्र में स्थानीय उत्पादन कम होने और महाराष्ट्र-राजस्थान से आने वाली आवक के महंगे होने के कारण स्थिति और जटिल हो गई है। खरगोन में डीजल के ऊंचे दामों का असर फलों पर भी पड़ा है, जिससे इनके दामों में 10 से 20 प्रतिशत तक उछाल आया है। नींबू 80 रुपये किलो और केला 50-60 रुपये दर्जन तक बिक रहा है। उज्जैन में भी हरी मिर्च और शिमला मिर्च जैसी सब्जियां आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही हैं।

☀️ गर्मी के कारण सूख रही फसलें

व्यापारियों का मानना है कि इस बार भीषण गर्मी का असर फसलों पर भी पड़ा है। खेतों में पानी की कमी और अत्यधिक गर्मी के कारण हरी सब्जियां सूखने लगी हैं, जिससे मंडियों में आवक लगातार घट रही है। आवक घटने और मांग बढ़ने के कारण कीमतों में ये उछाल दर्ज किया गया है। आने वाले दिनों में यदि परिवहन लागत कम नहीं होती है, तो आम जनता को महंगाई की और अधिक मार झेलनी पड़ सकती है।

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