
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग, कम्युनिकेशन टुडे (जयपुर) तथा भारती विद्यापीठ इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशंस एंड मैनेजमेंट, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार “नई पीढ़ी की नज़र से हिन्दी पत्रकारिता” में हिन्दी पत्रकारिता की दो सौ वर्ष की गौरवशाली यात्रा, उसकी वर्तमान चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर और सार्थक विमर्श हुआ। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षकों, पत्रकारों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में जनसंचार एवं पत्रकारिता विभागाध्यक्ष एवं डीन, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर, प्रो. मनोज मिश्र ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह जानना आवश्यक है कि नई पीढ़ी इस विरासत को किस दृष्टि से देखती है और भविष्य के लिए उसकी क्या अपेक्षाएँ हैं।
विषय प्रवर्तन करते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार केंद्र के पूर्व अध्यक्ष एवं कम्युनिकेशन टुडे के संपादक प्रो. संजीव भानावत ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता ने मिशनरी दौर से लेकर डिजिटल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग तक निरंतर परिवर्तन और विकास का सफर तय किया है। उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल समाचारों का पाठक नहीं, बल्कि विषय-वस्तु सृजक, ब्लॉग लेखक, पॉडकास्ट निर्माता और नागरिक पत्रकार भी है। इसलिए हिन्दी पत्रकारिता का भविष्य नई पीढ़ी की सोच, आकांक्षाओं और भागीदारी से निर्धारित होगा।
जनसंचार एवं पत्रकारिता विभागाध्यक्ष एवं डीन, राजीव गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक, प्रो. राघवेंद्र मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य समाज में नीर-क्षीर विवेक जागृत करना है। उन्होंने पत्रकारिता में नैतिकता, वस्तुनिष्ठता, जनहित और सामाजिक उत्तरदायित्व को सर्वोच्च मूल्य बताते हुए कहा कि तकनीकी बदलावों के बावजूद इन मूल्यों को अक्षुण्ण बनाए रखना आवश्यक है।
जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के पूर्व अध्यक्ष, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक, प्रो. हरीश ने “सत्यमेव जयते” का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य ही पत्रकारिता की आत्मा है। उन्होंने हिन्दी समाचार-पत्रों में बढ़ते अनावश्यक अंग्रेज़ी प्रयोग, पत्रकारिता के विद्यार्थियों को मिलने वाले कम वेतन तथा तकनीकी परिवर्तनों से उत्पन्न चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की।
चर्चा सत्र में शोधार्थी, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर, नवनीत मिश्रा ने सोशल मीडिया युग में सूचना के लोकतंत्रीकरण की चर्चा करते हुए कहा कि आज नागरिक स्वयं सूचना निर्माता बन चुका है और तत्काल सूचना के दौर में समाचार-पत्रों के सामने अपनी प्रासंगिकता बनाए रखना बड़ी चुनौती है।
पत्रकार एवं शोधार्थी, एपेक्स विश्वविद्यालय, जयपुर, शालिनी अग्रवाल ने हिन्दी पत्रकारिता की भाषा, पत्रकारिता विद्यार्थियों में समाचार-पत्र पढ़ने की घटती प्रवृत्ति तथा समाचार लेखन और शीर्षक निर्माण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने नवोदित पत्रकारों में बढ़ती वर्तनी त्रुटियों को भी गंभीर विषय बताया।
शोधार्थी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी, नेहा वर्मा ने कहा कि हिन्दी समाचार-पत्र आज भी सर्वाधिक प्रसार वाले माध्यम हैं और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचकर आमजन की सूचना आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया की विश्वसनीयता के लिए पारदर्शिता और मीडिया साक्षरता को अनिवार्य बताया।
प्रथम वर्ष की विद्यार्थी, भारती विद्यापीठ इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशंस एंड मैनेजमेंट, नई दिल्ली, कशिश टंडन ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता का विस्तार निरंतर हो रहा है और उसकी सबसे बड़ी शक्ति सत्य तथा निर्भीकता है। उन्होंने पत्रकारिता को निष्पक्षता, साहस और जनहित से जुड़ा दायित्वपूर्ण पेशा बताया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सहायक प्राध्यापिका, भारती विद्यापीठ इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशंस एंड मैनेजमेंट, नई दिल्ली, सुश्री प्रियंका सिंह द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण सरस्वती वंदना से हुआ। मुख्य वक्ता का ई-पुष्पगुच्छ द्वारा अभिनंदन किया गया तथा अंत में ई-स्मृति-चिन्ह भेंट किए गए।
कार्यक्रम के सफल संचालन एवं तकनीकी समन्वय में जयंत राठी, पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. सुनील कुमार तथा अंबुश की सक्रिय भूमिका उल्लेखनीय रही। अंत में प्रतिभागियों एवं दर्शकों से इस सार्थक विमर्श को अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाने तथा आगामी वेबिनारों से जुड़े रहने का आग्रह किया गया।





