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छत्तीसगढ़

Durg Police Success: दुर्ग पुलिस की बड़ी कामयाबी; 60 लाख रुपये के 800 गुम मोबाइल फोन मालिकों को लौटाए

मोबाइल फोन आज के समय में हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। फोन खो जाने पर न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि डेटा चोरी और बैंक फ्रॉड का डर भी सताता है। ज्यादातर लोग शिकायत दर्ज करने को समय की बर्बादी मानते हैं, लेकिन दुर्ग पुलिस ने अपनी कार्यशैली से लोगों का नजरिया बदल दिया है। मंगलवार को दुर्ग डीआईजी विजय अग्रवाल ने गुम हुए 800 मोबाइल फोन उनके असली मालिकों को अपने हाथों से सौंपे।

🕵️ पड़ोसी राज्यों से बरामद हुए फोन

डीआईजी विजय अग्रवाल ने बताया कि दुर्ग पुलिस की ‘एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट’ और थाना प्रभारियों ने अथक परिश्रम से इन फोनों को खोजा है। पुलिस की टीम ने न केवल छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों, बल्कि पड़ोसी राज्यों जैसे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश से भी गुम हुए फोन बरामद किए हैं। बरामद किए गए कुल 800 मोबाइल फोनों की बाजार कीमत लगभग 60 लाख रुपये आंकी गई है।

🛠️ कैसे काम करती है पुलिस?

पुलिस ने इन फोनों को ट्रेस करने के लिए भारत सरकार के CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है। डीआईजी ने बताया कि वे साल भर में चौथी बार लोगों को उनके फोन लौटा रहे हैं। दुर्ग पुलिस अपने सोशल मीडिया पेजों पर बरामद फोनों के IMEI नंबरों की सूची भी डाल रही है, ताकि लोग अपने फोन का मिलान कर सकें और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट कार्यालय से उन्हें प्राप्त कर सकें।

📢 आमजन के लिए पुलिस की सलाह

डीआईजी ने साफ कहा कि अगर आपका फोन गुम हो जाता है, तो यह सोचकर न बैठें कि वह कभी वापस नहीं मिलेगा। तुरंत थाने में शिकायत दर्ज कराएं। दुर्ग पुलिस का यह अभियान लगातार जारी रहेगा। इस पहल से पुलिस और जनता के बीच के भरोसे की नई मिसाल कायम हुई है, जिसकी लोग जमकर सराहना कर रहे हैं।

संपादकीय टिप्पणी: तकनीक और पुलिस की तत्परता का यह मेल वाकई काबिले तारीफ है। क्या आपको लगता है कि हर जिले में इसी तरह की ‘समर्पित साइबर यूनिट’ होने से मोबाइल चोरी और गुम होने के मामलों में कमी आएगी? अपने विचार नीचे साझा करें।

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