Power Crisis in Jaisalmer: तूफान के बाद जैसलमेर में ब्लैकआउट; ढाई करोड़ का नुकसान, बहाली में लगेगा 48 घंटे का समय

जैसलमेर में सोमवार शाम आए भीषण तूफान और बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण जोधपुर डिस्कॉम को भारी क्षति उठानी पड़ी है। जिले भर में करीब 1500 बिजली के खंभे धराशायी हो गए हैं, जिसके चलते लगभग 200 गांव पिछले 16 घंटों से अंधेरे की आगोश में हैं। विद्युत आपूर्ति ठप होने से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट भी गहरा गया है।
🚧 सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र और नुकसान का आकलन
तूफान की मार सबसे अधिक सम, मोहनगढ़ और चांधन क्षेत्रों में पड़ी है। इसके अतिरिक्त खुईयाला, सियाम्बर, सांगड़, चेलक और पोलजी की डेयरी सहित करीब 200 गांवों का जिला मुख्यालय से विद्युत संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता भैराराम चौधरी के अनुसार, तूफान के कारण कई ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हुए हैं और 33 केवी व 11 केवी की दर्जनों लाइनें प्रभावित हुई हैं। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक विभाग को ढाई करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है, जिसके और बढ़ने की आशंका है।
🛠️ बहाली कार्य: कब तक लौटेगी बिजली?
जोधपुर डिस्कॉम की तकनीकी टीमें सोमवार रात से ही फील्ड में डटी हुई हैं। हालांकि पोकरण और जैसलमेर शहर में विद्युत व्यवस्था को बहाल कर दिया गया है, लेकिन दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में स्थिति सामान्य होने में अभी 24 से 48 घंटे का समय लग सकता है। विभाग की पहली प्राथमिकता मुख्य फीडरों और हाई वोल्टेज लाइनों को दुरुस्त करना है ताकि जल्द से जल्द प्रभावित गांवों में बिजली लौट सके।
संपादकीय टिप्पणी: प्राकृतिक आपदाएं किसी के नियंत्रण में नहीं हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे को ‘डिजास्टर-प्रूफ’ बनाना समय की मांग है। क्या आपको लगता है कि ऐसे क्षेत्रों में बिजली लाइनों को भूमिगत (Underground) करना इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है? अपने विचार नीचे साझा करें।






