Uttarkashi Tourism News: उत्तरकाशी में ट्रेकर के लापता होने पर गाइड और मैनेजर हिरासत में; ट्रेकिंग एजेंसी का लाइसेंस होगा रद्द

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रेकिंग रूट से एक बेहद चिंताजनक और हैरान करने वाली खबर सामने आई है. यहाँ ट्रेकिंग के रोमांचक सफर पर निकली एक उच्च शिक्षित एमबीए (MBA) की छात्रा पिछले कई दिनों से रहस्यमय ढंग से लापता हो गई है. घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी घने जंगलों और बर्फीली चोटियों के बीच उसका कहीं कोई सुराग नहीं मिल पाया है. उत्तराखंड पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की विशेष टीमें अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों और हेलीकॉप्टरों की मदद से चप्पे-चप्पे पर छात्रा की खोज कर रही हैं. जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा है, प्रशासन की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं और मामला बेहद गंभीर होता जा रहा है. इस बीच, सुरक्षा मानकों में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में पुलिस ने दो स्थानीय लोगों को हिरासत में ले लिया है.
📸 सीसीटीवी (CCTV) फुटेज में दिखे थे दोस्त: रायथल गांव से शुरू की थी ट्रेकिंग, बीच कैंप से ही गायब हुई बबीता पांडे
उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल ट्रैक पर हुई इस अप्रत्याशित घटना के बाद यात्रा का आयोजन करने वाली ट्रेकिंग एजेंसी की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और स्थानीय प्रशासन इसकी बारीकी से जांच कर रहा है. लापता 23 वर्षीय छात्रा की पहचान बबीता पांडे के रूप में हुई है, जो अपने दो करीबी दोस्तों के साथ पहाड़ों की सैर पर निकली थी. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, बबीता और उसके दोनों दोस्त 28 मई को उत्तरकाशी के रायथल गांव में रुके थे, जिसका एक प्रामाणिक सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी पुलिस के हाथ लगा है. उन्होंने योजना के मुताबिक रायथल गांव से दयारा बुग्याल के लिए अपनी पैदल ट्रेकिंग शुरू की थी, लेकिन गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही बबीता बीच कैंप से अचानक और रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई.
🚁 भारतीय सेना और आईटीबीपी (ITBP) ने संभाला मोर्चा: 150 से अधिक जवानों का संयुक्त महा-अभियान, गाइड और मैनेजर हिरासत में
लापता छात्रा बबीता पांडे की सुरक्षित घर वापसी के लिए उत्तराखंड सरकार के निर्देश पर एक बेहद व्यापक और विशाल संयुक्त तलाशी अभियान (Joint Search Operation) चलाया जा रहा है. इस रेस्क्यू ऑपरेशन में भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), स्थानीय जिला पुलिस, वन विभाग के ट्रैकर्स और आपदा प्रबंधन कर्मी पूरी ताकत से जुटे हुए हैं. इस दुर्गम पहाड़ी इलाके में चल रहे अभियान में 150 से अधिक ट्रेंड कमांडो और पर्वतारोही शामिल हैं. मामले में त्वरित दंडात्मक कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ट्रेकिंग टीम के साथ मौके पर मौजूद स्थानीय गाइड और संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी के मैनेजर को हिरासत में ले लिया है और बंद कमरे में उनसे कड़ी पूछताछ की जा रही है.
📜 ‘प्रतिबंधित रास्तों पर ले गई थी ट्रेकिंग कंपनी’: उत्तराखंड सरकार ने बदले नियम, हर ट्रेकर के लिए GPS ट्रैकिंग डिवाइस अनिवार्य
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रशासनिक सवाल यह उठ रहा है कि छात्रा के लापता होने के तुरंत बाद ट्रेकिंग एजेंसी द्वारा जिला प्रशासन या स्थानीय पुलिस को समय रहते सूचना क्यों नहीं दी गई. शुरुआती जांच में यह गंभीर आरोप सामने आए हैं कि यात्रा का आयोजन करने वाली प्राइवेट ट्रेकिंग कंपनी ने सुरक्षा के आवश्यक और अनिवार्य सावधानियों का पालन नहीं किया. कंपनी पर गाइडों की कमी और युवाओं को जानबूझकर प्रतिबंधित या अत्यधिक खतरनाक रास्तों पर ले जाने के संगीन आरोप हैं. नियमों के इस उल्लंघन के कारण सरकार द्वारा उक्त ट्रेकिंग एजेंसी का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द करने की तैयारी की जा रही है. इस दुखद घटना से सबक लेते हुए उत्तराखंड सरकार ने संपूर्ण हिमालयी क्षेत्र में काम करने वाली सभी ट्रेकिंग कंपनियों के लिए तत्काल प्रभाव से नए और बेहद सख्त दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी कर दिए हैं. अब से देवभूमि में आने वाले प्रत्येक ट्रेकर के लिए सैटेलाइट आधारित ‘जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस’ (GPS Tracking Device) साथ रखना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है, और बिना किसी सरकारी रजिस्टर्ड गाइड के किसी भी सैलानी को साहसिक या संवेदनशील रास्तों पर जाने की अनुमति नहीं होगी.






