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छत्तीसगढ़

Mahant Ghasidas Museum: 1930 से 1955 तक के ऐतिहासिक अभिलेखों का संग्रह; रायपुर में लग रही विशेष प्रदर्शनी

रायपुर: अंतरराष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस के अवसर पर रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में एक भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। 8 जून से 12 जून तक चलने वाली यह प्रदर्शनी छात्रों, शोधार्थियों और इतिहास प्रेमियों के लिए छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत को करीब से जानने का एक सुनहरा मौका है।

🏛️ प्रदर्शनी में क्या है खास?

प्रदर्शनी में राज्य पुनर्गठन के बाद भोपाल से स्कैन की गई डिजिटल प्रतिकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। इनमें सीपी एंड बरार (CP & Berar) कालीन प्रशासनिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास के महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। उपसंचालक डॉ. प्रतापचंद पारख ने बताया कि इसमें पंडित रवि शंकर शुक्ल से संबंधित दस्तावेजों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की 14 रियासतों के फ्लैग और उनके प्रतीक चिन्ह भी शामिल किए गए हैं।

🔎 प्रमुख आकर्षण और ऐतिहासिक दस्तावेज

प्रदर्शनी में 1930 से 1955 के मध्य के अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे गए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • रियासतों का विलय: खैरागढ़, छुईखदान और कोरिया रियासतों के फ्लैग व भूमि अधिकार संबंधी दस्तावेज।

  • द्वितीय विश्वयुद्ध: रायपुर (माना) एयरपोर्ट के निर्माण और उस दौरान हुए भूमि अधिग्रहण से जुड़ी योजनाएं।

  • प्रशासनिक रिकॉर्ड: राजिम मेला भूमि प्रबंधन, मंदिर प्रबंधन, जनगणना रिपोर्ट और पृथक कोसल राज्य के गठन के प्रयास।

  • विकास यात्रा: पुरातात्त्विक स्मारकों का संरक्षण, स्थानीय अवकाश की घोषणाएं और राष्ट्रपति के छत्तीसगढ़ प्रवास से जुड़े दस्तावेज।

💾 डिजिटल संरक्षण की मुहिम

डॉ. पारख ने बताया कि मध्यप्रदेश में अभी भी छत्तीसगढ़ के लगभग 13 लाख अभिलेख सुरक्षित हैं। ओरिजिनल कॉपी न मिल पाने के कारण विभाग उन्हें डिजिटलाइज करके लाने का कार्य निरंतर कर रहा है, ताकि छत्तीसगढ़ की अपनी विरासत को सहेज कर रखा जा सके।

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