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कोरोना से जल्द ही जंग जीत सकता है भारत! तेजी से ठीक हो रहे मरीज

देश में भले ही कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या एक लाख से अधिक हो गई है लेकिन ठीक होने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है और अब कोरोना के ठीक होने की दर बढ़कर 38 प्रतिशत से अधिक हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में इस समय कोरोना के 58802 सक्रिय मामले हैं और पिछले 24 घंटों में 2350 लोगों के ठीक हो जाने के बाद स्वस्थ हुए लोगों की कुल संख्या 39173 हो गयी है। कोरोना से अब तक देश में 3163 लोगों की मौत हो गयी है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के मुताबिक देश में अभी तक 24,04267 कोरोना परीक्षण हो चुके हैं और पिछले 24 घंटों में 101475 नमूनों की जांच की गई थी और संक्रमितों का कुल आंकडा 4़ 2 प्रतिशत है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थिति रिपोर्ट 118 में बताया गया है कि विश्व के विभिन्न देशों में कोरोना के पुष्ट मामलों यानि प्रति एक लाख आबादी की बात की जाए तो यह भारत में यह बहुत ही बेहतर है और देश में यह संख्या 7.1 प्रति लाख हैं जबकि विश्व की आबादी के अनुसार यह 60 मामले प्रति एक लाख है। तथा विश्व स्तर पर मृत्यु दर 6.92 प्रतिशत है और हमारे देश में मृत्यु दर 3.1 प्रतिशत के आसपास है। अमेरिका में यह आंकड़ा 1,409452(431),रूस 281,752(195), ब्रिटेन 240,165(361),स्पेन 230,689(494),इटली 224,760(372), ब्राजील,218,223(104) , जर्मनी 174,335(210), फ्रांस 140,008(209), ईरान 118,392(145) और भारत में 96,169(7़ 1 ) है। इसका सबसे बड़ा कारण भारत में शुरू से ही उठाए गए कड़े कदम रहे हैं। देश में इस समय प्रतिदिन एक लाख कोराना परीक्षण प्रतिदिन की क्षमता हासिल की जा चुकी है और देश में अभी तक कोरोना के 24 लाख से अधिक टेस्ट हो चुके हैं। इसके अलावा विदेश से एक उच्च गुणवत्ता युक्त कोबास 6800 मशीन को नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल(एनसीडीसी) में लगा दिया गया है। यह मशीन पूरी तरह ऑटोमेटिक है और 24 घंटे में 1200 टेस्ट करने में सक्षम है। देश में कोरोना जांच की किट पर्याप्त मात्रा में है और राज्यों तथा संघ शासित प्रदेश में आईसीएमआर के 15 डिपों में वितरित की जा रही है।

देश में इस समय रोजाना तीन लाख पीपीई प्रतिदिन बनाने की क्षमता हासिल की जा चुकी है और तीन लाख एन 95 मॉस्क बनाए जा रहे हैं जो निकट भविष्य में देश की जरूरतों के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा देश में घरेलू स्तर पर वेंटीलेटर का निर्माण शुरू हो चुका है और आडर्र भी दिए जा चुके हैं। राज्य सरकारों ने कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने में जो सक्रिय कदम उठाए हैं, वे बहुत ही कारगर और प्रभावी साबित हो रहे हैं और इस बात की पुष्टि इन आंकड़ों से हो जाती है कि कोरोना वायरस का प्रकोप विश्व के 20 विकसित देशों में अधिकतर देखने को मिला है। इन 20 देशों की जनसंख्या हमारी जनसंख्या के बराबर है लेकिन कोरोना से निपटने से हम उनसे कहीं बेहतर हैं। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों को भी देखा जाए तो साफ पता चलता है कि उनके यहां पाये जाने वाले मामले हमारे देश से 84 गुना अधिक हैं और उनके यहां होने वाली मौतों की संख्या हमारे देश में हुई मौतों से 200 गुना अधिक है। यह सब केन्द्र सरकार की ‘प्रिएम्पटिव, ग्रेडेड, प्रोएक्टिव’ रणनीति के तहत संभव हुआ है।

अगर देश में लॉकडाउन लागू करने का फैसला समय पर नहीं किया होता तो भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या 24 अप्रैल को ही एक लाख से अधिक हो गई होती लेकिन केन्द्र सरकार ने समय रहते जो कदम उठाए उनसें कोरोना मामलों की रफ्तार धीमी पड़ गई। देश में 21 मार्च को कोरोना मामलों के दोगुना होने की दर 3.2 दिन थी और उस दिन 300 केस सामने आए थे इस समय देश में कोरेाना मामलों के दुगना होने की दर 13 दिन औसतन है। कोरोना के मामलों में 23 मार्च को एक मोड़ आया था और उस समय डबलिंग रेट का ग्राफ पांच दिन हो गया था और तब लाकडाउन शुरू नहीं हुआ था लेकिन जनता कर्फ्यू हो चुका था। यह सब यात्रा संबंधी प्रतिबंधों और सामाजिक दूरी के मानकों को अपनाने की वजह से हुआ था। इसके बाद लाक डाउन की घोषणा कर दी गई थी और छह अप्रैल को देश पांच दिनों के डबलिंग रेट को पार गया था। अगर केन्द्र सरकार इन नियमों को लागू नहीं करती तो हम तीन दिन के डबलिंग रेट की रफ्तार से आज कहां होते, कोई भी इसका अनुमान लगा सकता है इसमें सर्विलांस की भी अहम भूमिका रही है और जो लोग कोरोना पीड़ित थे उनके कांटेक्ट ट्रेस किए गए थे।

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