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Digital Censorship in Russia: रूस में इंटरनेट पर सख्त पाबंदियां; दो-दो फोन रखने को मजबूर हुए रूसी नागरिक

मॉस्को: रूस में सरकार द्वारा इंटरनेट पर कड़ी निगरानी और नियंत्रण लागू करने के बाद आम लोगों के लिए डिजिटल दुनिया जटिल हो गई है। विदेशी ऐप्स और वेबसाइटों तक पहुँचने के लिए रूसी नागरिकों को अब कई तरह के जुगाड़ अपनाने पड़ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कई लोग अपनी डिजिटल गोपनीयता और सरकारी सेवाओं के उपयोग के लिए दो-दो मोबाइल फोन रखने को मजबूर हैं।

🕵️ सरकारी निगरानी और VPN का बढ़ता चलन

रूसी सरकार नागरिकों को विदेशी ऐप्स (जैसे वॉट्सऐप) छोड़कर सरकारी समर्थन वाले ऐप्स अपनाने का दबाव डाल रही है। डर इस बात का है कि MAX जैसे सरकारी ऐप्स के जरिए सरकार उनकी हर गतिविधि पर नजर रख सकती है। यही कारण है कि लोग सरकारी ऐप्स को अलग फोन में रखते हैं, जबकि विदेशी ऐप्स के लिए VPN का सहारा लेते हैं। आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2026 में रूस में VPN ऐप्स के डाउनलोड पिछले वर्ष की तुलना में 14 गुना तक बढ़ गए हैं।

🛡️ इंटरनेट बैन के पीछे रूस का तर्क

रूस ने यूक्रेन युद्ध के बाद इंटरनेट पर पाबंदियां और सख्त कर दी हैं। सरकार का दावा है कि सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाया गया है, क्योंकि यूक्रेन के ड्रोन मोबाइल नेटवर्क का उपयोग कर सकते हैं। इसके चलते सरकार ने वॉट्सऐप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म की इंटरनेट स्पीड कम कर दी है या उन्हें पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है।

🚧 जनजीवन पर क्या पड़ा असर?

इंटरनेट पर इन प्रतिबंधों ने आम नागरिकों की दैनिक दिनचर्या को अस्त-व्यस्त कर दिया है:

  • बैंकिंग और डिलीवरी: ऑनलाइन बैंकिंग, ट्रांसपोर्ट और फूड डिलीवरी सेवाएं बार-बार बाधित हो रही हैं।

  • नेविगेशन की समस्या: मॉस्को में नेविगेशन ऐप्स के ठप होने से डिलीवरी स्टाफ को वाई-फाई या कागजी नक्शों पर निर्भर होना पड़ रहा है।

  • डिजिटल जटिलता: सरकारी वेबसाइटें अब उन यूजर्स को सर्विस देने से मना कर रही हैं जो VPN का उपयोग कर रहे हैं।

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