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धार्मिक

Shani Pradosh Vrat 2026: शनि प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग; महादेव और शनिदेव को प्रसन्न करने का महाउपाय

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है, लेकिन जब यह शनिवार के दिन पड़ता है, तो इसे ‘शनि प्रदोष’ कहा जाता है। यह महादेव और कर्मफलदाता शनिदेव दोनों को एक साथ प्रसन्न करने का दुर्लभ अवसर है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर कुंडली में मौजूद शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम हो जाता है।

🗓️ शनि प्रदोष व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का विशेष महत्व है। उदया तिथि के आधार पर 27 जून, 2026 (शनिवार) को शनि प्रदोष व्रत रखा जाएगा।

  • पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 7:20 बजे से रात 9:29 बजे तक। प्रदोष काल में की गई पूजा को सबसे अधिक फलदायी माना गया है, क्योंकि इसी समय भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व होता है।

🔱 भगवान शिव की पूजा विधि

प्रदोष काल में स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल को पवित्र करें। शिवलिंग का जल, गंगाजल और दूध से अभिषेक करें। महादेव को बेलपत्र, धतूरा, भस्म, शमी पत्र और सफेद फूल अर्पित करें। ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें। अंत में घी का दीपक जलाकर आरती करें।

🪐 शनिदेव को कैसे प्रसन्न करें?

शनि प्रदोष के दिन भगवान शिव के साथ शनिदेव का पूजन भी अनिवार्य है:

  • शनिदेव को सरसों का तेल और काले तिल अर्पित करें।

  • पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

  • ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से शनि की अशुभ दृष्टि शांत होती है और जीवन के कष्टों का निवारण होता है।

✨ व्रत का धार्मिक महत्व और सावधानियां

शनि प्रदोष व्रत रखने से मानसिक तनाव दूर होता है और कार्यों में आ रही बाधाएं समाप्त होती हैं। इस दिन क्रोध, झूठ और किसी का अपमान करने से बचें। जरूरतमंदों को दान दें और सात्विक भोजन ग्रहण करें। सच्ची आस्था और नियम के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का संचार करता है।

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