फरीदाबाद में कमाल! बिना खोपड़ी खोले नाक के रास्ते निकाला इराक के युवक का ब्रेन ट्यूमर, 5 दिन में डिस्चार्ज

फरीदाबाद (हरियाणा): आधुनिक चिकित्सा तकनीक और भारतीय डॉक्टरों के कौशल ने एक बार फिर गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक विदेशी मरीज को नई जिंदगी दी है। इराक के रहने वाले ताहा हसन अली नामक युवक के दिमाग (ब्रेन) में मौजूद ब्लीडिंग पिट्यूटरी ट्यूमर को फरीदाबाद स्थित मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञों ने बिना खोपड़ी खोले और बिना किसी बाहरी चीरे के सफलतापूर्वक निकाल दिया।
न्यूरोनैविगेशन गाइडेड एंडोस्कोपिक ट्रांसनेजल (Endoscopic Transnasal) तकनीक से करीब तीन घंटे तक चली इस अत्यंत जटिल और संवेदनशील सर्जरी के बाद मरीज तेजी से स्वस्थ हुआ और महज पांचवें दिन अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
🤕 लंबे समय से असहनीय सिरदर्द और आंखों की रोशनी जाने की समस्या से परेशान था इराकी युवक
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, ताहा हसन अली लंबे समय से लगातार तेज सिरदर्द, आंखों की रोशनी अचानक कम होने और हार्मोनल असंतुलन जैसी कई गंभीर समस्याओं से परेशान थे।
इलाज के लिए भारत आने पर मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के विशेषज्ञों ने उनकी विस्तृत जांच की। जांच में दोनों आंखों के विजुअल फील्ड (दृश्य क्षेत्र) में भारी कमी पाई गई, जबकि कॉन्ट्रास्ट एमआरआई (MRI) रिपोर्ट में पिट्यूटरी ग्रंथि में ट्यूमर और उसके भीतर रक्तस्राव यानी ‘पिट्यूटरी एपोप्लेक्सी’ (Pituitary Apoplexy) की पुष्टि हुई। डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति न्यूरोसर्जरी के लिहाज से बेहद गंभीर, आपातकालीन और जानलेवा मानी जाती है।
💊 स्टेरॉयड थेरेपी से पहले मरीज की स्थिति को किया गया स्थिर, फिर तैयार हुआ मास्टर प्लान
जटिल ऑपरेशन से पहले विशेषज्ञों की टीम ने मरीज को अस्पताल में भर्ती कर तुरंत स्टेरॉयड थेरेपी शुरू की, ताकि उसकी नाजुक स्थिति को पूरी तरह स्थिर किया जा सके। इसके साथ ही शरीर के हार्मोनल स्तर और अन्य जरूरी पैथोलॉजिकल जांचें की गईं।
इसके बाद न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञों की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने अत्याधुनिक न्यूरोनैविगेशन सिस्टम (Neuronavigation System) की मदद से 3D मैपिंग कर ऑपरेशन का विस्तृत और सुरक्षित ब्लूप्रिंट तैयार किया, जिससे ट्यूमर तक बिना किसी जोखिम के सटीक पहुंच बनाई जा सके।
👨⚕️ डॉ. तरुण शर्मा के नेतृत्व में नाक के रास्ते निकाला गया ब्रेन ट्यूमर, नहीं आया एक भी चीरा
इस अत्यंत जटिल सर्जरी का सफल नेतृत्व निदेशक (न्यूरोसर्जरी) डॉ. तरुण शर्मा ने किया। उनके साथ टीम में यूनिट हेड डॉ. सचिन गोयल और कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन डॉ. मनीष मिश्रा मुख्य रूप से शामिल रहे।
डॉक्टरों ने एंडोस्कोपिक ट्रांसनेजल तकनीक के जरिए मरीज की नाक के रास्ते मस्तिष्क के अत्यंत संवेदनशील ‘सेल्ला क्षेत्र’ (Sella Region) में स्थित ट्यूमर को पूरी तरह से बाहर निकाल दिया। गौरतलब है कि मस्तिष्क का यह हिस्सा बेहद संवेदनशील माना जाता है, जहां कैरोटिड आर्टरी जैसी शरीर की प्रमुख और महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाएं मौजूद रहती हैं।
🧭 न्यूरोनैविगेशन तकनीक ने रियल-टाइम गाइड बनकर जोखिम को किया शून्य
डॉक्टरों के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल किया गया अत्याधुनिक न्यूरोनैविगेशन सिस्टम सर्जनों के लिए जीपीएस की तरह एक ‘रियल-टाइम सर्जिकल गाइड’ साबित हुआ।
इसकी मदद से सर्जनों को ट्यूमर की सटीक स्थिति देखने और आसपास की नाजुक नसों व मुख्य रक्त वाहिकाओं को बिना कोई नुकसान पहुंचाए ट्यूमर हटाने में बड़ी सफलता मिली। इस मिनिमली इनवेसिव तकनीक (Minimally Invasive Technique) में किसी बाहरी चीरे की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे मरीज को कम दर्द होता है, रिकवरी तेजी से होती है और चेहरे पर किसी प्रकार का ऑपरेशन का निशान नहीं रहता।
🏥 सर्जरी के अगले ही दिन सामान्य भोजन, पांचवें दिन स्वस्थ होकर मरीज को मिली छुट्टी
सफल सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी बेहद संतोषजनक और उम्मीद से तेज रही। ऑपरेशन के अगले ही दिन मरीज ने सामान्य रूप से बातचीत करना और भोजन लेना शुरू कर दिया।
डॉक्टरों की टीम ने लगातार उनकी न्यूरोलॉजिकल स्थिति, आंखों की रोशनी, हार्मोनल संतुलन और संभावित जटिलताओं पर 24 घंटे निगरानी रखी। स्वास्थ्य में निरंतर और त्वरित सुधार होने के बाद मरीज को ऑपरेशन के पांचवें दिन ही पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
⚠️ पिट्यूटरी ट्यूमर के इन शुरुआती लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञों के मुताबिक, पिट्यूटरी ग्रंथि के ट्यूमर अपेक्षाकृत दुर्लभ होते हैं। इसके मुख्य और सामान्य लक्षणों में लगातार सिरदर्द बने रहना, आंखों की रोशनी तेजी से कम होना, हार्मोनल असंतुलन, शारीरिक कमजोरी और गंभीर मामलों में दृष्टि का पूरी तरह चले जाना, लकवा, याददाश्त कमजोर होना तथा बोलने में परेशानी शामिल हो सकती है। यदि ट्यूमर के भीतर अचानक रक्तस्राव हो जाए, तो यह एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी बन जाती है, जिसमें तत्काल उपचार न मिलने पर जान जा सकती है।
🗣️ “आधुनिक तकनीकों से अब संभव है जटिल से जटिल ब्रेन सर्जरी”: डॉ. तरुण शर्मा
सफल सर्जरी पर अनुभव साझा करते हुए डॉ. तरुण शर्मा ने कहा, “पिट्यूटरी ट्यूमर अक्सर तब तक पता नहीं चलते, जब तक वे आंखों की मुख्य नसों पर दबाव डालकर रोशनी को प्रभावित न करने लगें या लगातार सिरदर्द न पैदा करें। हार्मोन स्रावित करने वाले ट्यूमर में हाथ-पैरों का असामान्य रूप से बढ़ना, आवाज में बदलाव या महिलाओं में बिना गर्भावस्था के दूध का स्राव होना जैसे लक्षण दिख सकते हैं। ब्रेन सर्जरी को लेकर आम जनता में काफी डर रहता है, लेकिन आधुनिक न्यूरोनैविगेशन तकनीक और एंडोस्कोपिक तरीकों से आज जटिल से जटिल ब्रेन ट्यूमर का भी सुरक्षित व असरदार इलाज संभव है।”






